खेती के साथ अपनाएं ये बिजनेस, कम लागत में बंपर कमाई का तरीका

छत्तीसगढ़ के एक प्रगतिशील किसान ने खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा लिया है। जानिए कैसे भेड़-बकरी पालन आपको अतिरिक्त मुनाफा देने के साथ-साथ खेती के खर्चों में भी कमी ला सकता है।

खेती और पशुपालन का सफल मेल

आज के दौर में जब किसान अपनी आय बढ़ाने के नए तरीकों की तलाश में हैं, तब छत्तीसगढ़ के मिलाराबाद गांव के युवा किसान लक्ष्मीकांत प्रधान ने एक मिसाल कायम की है। लक्ष्मीकांत का मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन को जोड़ना एक समझदारी भरा निर्णय है। उनके अनुसार, यह न केवल आय का एक अतिरिक्त जरिया बनता है, बल्कि खेती से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी समाधान करता है। एक किसान के लिए खेती और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हैं, जिससे कृषि लागत में काफी कमी आती है और शुद्ध मुनाफा बढ़ता है।

पशुपालन के दोहरे लाभ

लक्ष्मीकांत प्रधान के अनुभव के मुताबिक, भेड़ और बकरी पालन से किसानों को कई स्तरों पर फायदा होता है। सबसे महत्वपूर्ण लाभ जैविक खाद के रूप में मिलता है। इन पशुओं के गोबर से खेत को उच्च गुणवत्ता वाली खाद प्राप्त होती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो जाती है। इसके अलावा, खेत की मेड़ और आसपास के खाली क्षेत्रों में पशुओं को चराने से वहां उगने वाली अनावश्यक घास और खरपतवार की समस्या अपने आप हल हो जाती है। इस प्रक्रिया से खेत की सफाई का काम भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के हो जाता है, जो किसान के लिए श्रम और समय दोनों की बचत है।

आसान मार्केटिंग और मांग

बाजार की चिंता करने वाले किसानों के लिए यह एक राहत की बात है कि भेड़ और बकरी के मांस की मांग बाजार में साल भर बनी रहती है। लक्ष्मीकांत के अनुसार, इस व्यवसाय में मार्केटिंग के लिए ज्यादा भाग-दौड़ की जरूरत नहीं पड़ती है। अक्सर खरीदार और व्यापारी स्वयं किसान के घर या खेत तक पहुंचकर पशुओं की खरीदारी कर लेते हैं। इससे उत्पाद को बाजार तक ले जाने का खर्च और मशक्कत दोनों बच जाती है, जिससे किसान का मुनाफा सीधा उनकी जेब में आता है।

भेड़ पालन क्यों है फायदेमंद?

यद्यपि किसान भेड़ और बकरी दोनों का पालन एक साथ कर सकते हैं, लेकिन लक्ष्मीकांत प्रजनन दर के मामले में भेड़ों को अधिक प्राथमिकता देते हैं। उनके अनुसार, भेड़ों की प्रजनन क्षमता काफी बेहतर होती है। एक सामान्य अनुभव यह कहता है कि यदि बकरी साल में दो बार बच्चे देती है और हर बार दो बच्चे पैदा होते हैं, तो कुल चार बच्चे प्राप्त होते हैं। वहीं भेड़ों के मामले में यदि तीन बार प्रजनन चक्र पूरा हो, तो किसानों को साल में करीब 6 बच्चे तक मिल सकते हैं। इसके अलावा, भेड़ों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी देखी गई है और चराई की आदतों के कारण इनका प्रबंधन करना भी काफी सरल होता है।

मुनाफे का गणित

लक्ष्मीकांत ने अपने स्वयं के अनुभव से बताया कि उन्होंने इस यात्रा की शुरुआत केवल 10 भेड़-बकरियों के साथ की थी। शुरुआत में उन्होंने वयस्क पशुओं का चयन किया, जिसका परिणाम यह रहा कि महज एक साल के भीतर ही पशुओं की संख्या बढ़कर 20 हो गई। मेहनत और सही देखभाल का परिणाम यह रहा कि तीसरे साल तक उनके पास पशुओं की कुल संख्या 40 तक पहुंच गई। उनके आकलन के अनुसार, इस पशुपालन व्यवसाय से उन्हें सालाना लगभग 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक का शुद्ध अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है।

निष्कर्ष

खेती के साथ पशुपालन को एकीकृत करने की यह विधि आज के समय में छोटे और मध्यम वर्गीय किसानों के लिए बेहद प्रभावी है। यह न केवल आय में वृद्धि करती है, बल्कि खेती को टिकाऊ और लाभदायक बनाने में भी मदद करती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से और सीमित संसाधनों से शुरुआत करें, तो वे बहुत कम समय में अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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