मल्चिंग तकनीक से बदलें खेती का तरीका
सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए मल्चिंग एक बेहद कारगर और आधुनिक तकनीक साबित हो रही है। इस विधि को अपनाकर न केवल पानी की भारी बचत की जा सकती है, बल्कि फसल की कुल पैदावार में भी 20 से 40 प्रतिशत तक का इजाफा संभव है। वरिष्ठ उद्यान विस्तार अधिकारी प्रतिक्षा मिश्रा ने इस तकनीक के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है।
क्या है मल्चिंग और कैसे करें इसका उपयोग
मल्चिंग का मूल अर्थ है खेत की मिट्टी की ऊपरी परत को एक विशेष आवरण से ढक देना। यह प्रक्रिया पौधों के विकास के लिए एक सुरक्षित कवच का काम करती है। मल्चिंग के लिए किसान अपनी सुविधा और उपलब्धता के अनुसार निम्नलिखित सामग्रियों का चयन कर सकते हैं:
- सूखी घास
- पुआल
- फसल के अवशेष जैसे जैविक पदार्थ
- काली या सिल्वर प्लास्टिक मल्च शीट
क्यों फायदेमंद है यह तकनीक
मल्चिंग का मुख्य उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना और बाहरी प्रतिकूल परिस्थितियों से फसल की सुरक्षा करना है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- नमी का संरक्षण: यह मिट्टी में नमी को लंबे समय तक बनाए रखती है, जिससे सिंचाई के लिए पानी की खपत कम होती है।
- खरपतवार पर नियंत्रण: मिट्टी ढकी होने के कारण अनावश्यक खरपतवार नहीं उग पाते, जिससे फसल को पूरा पोषण मिलता है।
- अनुकूल वातावरण: यह तकनीक फसल की जड़ों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित वातावरण तैयार करती है, जिससे पौधों का विकास तेजी से होता है।
प्रतिक्षा मिश्रा के अनुसार, मल्चिंग का सही उपयोग किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा दिलाने में मदद करता है। जो किसान अपनी उपज को बढ़ाना चाहते हैं और जल संसाधनों का सीमित उपयोग करना चाहते हैं, उनके लिए यह तकनीक एक बेहतरीन विकल्प है।
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