धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र
सीकर जिले के गणेश्वर क्षेत्र में स्थित खादरा गांव अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए पहचाना जाता है। अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा यह गांव लगभग 600 साल पुरानी धार्मिक मान्यताओं का गवाह है। यहाँ निमोद की पहाड़ियों पर स्थित हिंगलाज माता मंदिर स्थानीय निवासियों के साथ ही दूरदराज के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।
कुश्ती की सदियों पुरानी परंपरा
धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा खादरा गांव अपनी 250 साल पुरानी कुश्ती परंपरा के लिए भी मशहूर है। गांव में शीतलाष्टमी के अवसर पर एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें पारंपरिक कुश्ती दंगल मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है। यह आयोजन गांव की विशिष्ट पहचान बन चुका है और संस्कृति के संरक्षण का एक बड़ा माध्यम है।
पहलवानों के लिए आकर्षण का केंद्र
इस दंगल का महत्व सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। यहाँ होने वाली कुश्ती में भाग लेने के लिए राजस्थान के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे कि हरियाणा और पंजाब से भी नामी पहलवान आते हैं। धर्म, लोक संस्कृति और खेल के इस अद्भुत संगम ने खादरा गांव को एक विशिष्ट और गौरवशाली स्थान बना दिया है, जो आज की पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़कर रखता है।
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