शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे से पहले चीन में बढ़ी धड़कनें, ट्रंप प्रशासन की तैयारियों पर खड़े हुए बड़े सवाल

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी अमेरिका यात्रा से पहले बीजिंग में चिंता का माहौल है। तैयारियों के लिए छह हफ्ते से भी कम समय बचा है, लेकिन अभी तक वॉशिंगटन में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस महत्वपूर्ण आयोजन की कमान किस विभाग के हाथ में है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बहुप्रतीक्षित अमेरिका यात्रा को लेकर कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण शिखर वार्ता से ठीक पहले चीनी खेमे में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। दुनिया के दो सबसे बड़े शक्तिशाली देशों के बीच होने वाली इस मुलाकात में अब छह हफ्ते से भी कम समय बचा है, लेकिन तैयारियों को लेकर बीजिंग में असंतोष और चिंता का माहौल है। चीनी अधिकारियों को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि वॉशिंगटन में इस ऐतिहासिक यात्रा की कमान आखिरकार संभाल कौन रहा है।

तैयारियों के मोर्चे पर वॉशिंगटन में कूटनीतिक असमंजस

हांगकांग के प्रमुख समाचार पत्र 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी प्रशासन इस समय बेहद असमंजस की स्थिति में है। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में नजर आ रही कथित अव्यवस्था है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी अधिकारियों को इस बात का डर सता रहा है कि अमेरिकी कूटनीतिक तंत्र में अभी तक यह तय नहीं हो सका है कि शी जिनपिंग के स्वागत और उनके दौरों की रूपरेखा तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी किस विभाग या अधिकारी के पास है।

दिलचस्प बात यह है कि चीन के लिए यह अनुभव नया नहीं है। चीनी अधिकारियों को कुछ महीने पहले की वह स्थिति याद आ रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा की तैयारियां चल रही थीं। उस दौरान भी अमेरिकी पक्ष की ओर से की गई अनियोजित और अव्यवस्थित प्लानिंग ने बीजिंग को काफी परेशान किया था। अब कूटनीति के मंच पर वही इतिहास खुद को दोहराता हुआ नजर आ रहा है, लेकिन इस बार फर्क सिर्फ इतना है कि मेजबानी की जिम्मेदारी अमेरिका की है और मेहमान के तौर पर चीनी राष्ट्रपति वहां पहुंचने वाले हैं।

छह हफ्ते का बेहद कम समय और अधूरी तैयारियां

किसी भी राष्ट्र प्रमुख की आधिकारिक यात्रा में सुरक्षा, कूटनीतिक प्रोटोकॉल और बैठकों के एजेंडे को लेकर महीनों पहले से काम शुरू हो जाता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग साल 2015 के बाद पहली बार अमेरिका की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। इतने लंबे अंतराल के बाद हो रही इस यात्रा को देखते हुए कूटनीतिक स्तर पर बेहद बारीकी से तैयारियां पूरी होनी चाहिए थीं।

लेकिन सूत्रों के अनुसार, अभी तक किसी भी अमेरिकी एजेंसी या विभाग ने इस आयोजन की स्पष्ट कमान अपने हाथों में नहीं ली है। दोनों देशों के अधिकारी बेहद सामान्य स्तर पर बातचीत और शुरुआती कूटनीतिक औपचारिकताओं में तो जुटे हुए हैं, लेकिन शीर्ष स्तर पर नेतृत्व की कमी साफ तौर पर खल रही है। इतने बड़े स्तर की शिखर बैठक के लिए सुरक्षा इंतजामों और रहने-ठहरने की व्यवस्थाओं के साथ-साथ बातचीत के एजेंडे को पहले से ही अंतिम रूप दिया जाना जरूरी होता है, जिसमें लगातार हो रही देरी चीन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की निष्क्रियता और विभागों में खींचतान

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात अमेरिकी विदेश मंत्रालय यानी स्टेट डिपार्टमेंट की भूमिका को लेकर सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक की तैयारियों में अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट उतना सक्रिय या गंभीर नजर नहीं आया है, जितनी उम्मीद एक विदेश मंत्रालय से की जाती है।

इससे पहले जब डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग के दौरे पर आए थे, तब अमेरिकी तैयारियों की मुख्य कमान अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट (वित्त विभाग) और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि) के हाथों में देखी गई थी। इस बार भी अमेरिका के भीतर इसी तरह की स्थिति बनती दिख रही है, जहां विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी साफ महसूस हो रही है। इस प्रशासनिक बिखराव के कारण चीनी अधिकारियों को बातचीत आगे बढ़ाने के लिए सही संपर्क सूत्र नहीं मिल पा रहे हैं।

क्या बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो जाएगी शिखर वार्ता?

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा को लेकर चीन की चिंता सिर्फ मेहमाननवाजी या सुरक्षा प्रोटोकॉल तक ही सीमित नहीं है। बीजिंग की सबसे बड़ी परेशानी इस बात को लेकर है कि इस शिखर वार्ता का अंतिम परिणाम क्या निकलेगा। सामान्य तौर पर जब दो महाशक्तियों के राष्ट्र प्रमुख आपस में मिलते हैं, तो कई अहम समझौतों, रणनीतिक साझेदारियों और व्यापारिक घोषणाओं पर पहले से सहमति बना ली जाती है, जिन्हें अंतिम समय पर सार्वजनिक किया जाता है।

लेकिन इस बार दोनों देशों के बीच किन प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनेगी या क्या साझा बयान जारी किए जाएंगे, इसे लेकर अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। चीनी रणनीतिकारों को डर है कि कहीं इतनी बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक यात्रा सिर्फ एक रस्मी मुलाकात बनकर न रह जाए। यदि ट्रंप और शी जिनपिंग की इस मुलाकात से कोई ठोस कूटनीतिक या व्यापारिक लाभ नहीं निकलता है, तो इसे चीन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जाएगा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या दुनिया की नजरों में बेहद अहम मानी जा रही यह समिट आखिरकार खाली हाथ ही समाप्त हो जाएगी?

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