अपाचे हेलीकॉप्टर के पूरे ट्रेनिंग बेड़े को अमेरिका ने किया ग्राउंडेड, जानें क्या है भारत के लिए चिंता की बात

अमेरिका में एक घातक हादसे के बाद सेना ने सभी अपाचे हेलीकॉप्टरों की ट्रेनिंग उड़ानें रोक दी हैं। इस कदम से भारतीय वायुसेना समेत दुनिया भर के ऑपरेटरों की चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि जांच के नतीजे भविष्य के संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।

अमेरिका में क्यों थमे अपाचे हेलीकॉप्टरों के पहिए

अमेरिका में एक दुखद विमान हादसे के बाद वहां की सेना ने अपने सभी AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टरों की ट्रेनिंग उड़ानों को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। टेक्सास में हुई इस दुर्घटना में सेना के दो जवानों की जान चली गई है, जिसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर यह कड़ा फैसला लिया गया। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस दुर्घटना के पीछे के वास्तविक कारणों की पूरी तरह पुष्टि नहीं हो जाती और सुरक्षा स्थिति का स्पष्ट आकलन नहीं मिलता, तब तक इन विमानों को उड़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

हादसे का विवरण और जवानों की पहचान

यह दुर्घटना बुधवार को घटी, जब एक अपाचे हेलीकॉप्टर फोर्ट हुड से लगभग 48 किलोमीटर दूर सलाडो के पास एक खुले घास के मैदान में गिरकर क्षतिग्रस्त हो गया। सेना की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर में केवल दो सैनिक मौजूद थे और दोनों ही इस हादसे में जीवित नहीं बच सके। मृतकों की पहचान 34 वर्षीय चीफ वॉरंट ऑफिसर डियोंत्रे टी. ह्यूई और 25 वर्षीय वॉरंट ऑफिसर सेठ एल. ओल्मस्टेड के रूप में की गई है। डियोंत्रे टी. ह्यूई वर्ष 2014 में अमेरिकी सेना में शामिल हुए थे, जबकि युवा सैनिक सेठ एल. ओल्मस्टेड ने साल 2023 में ही सैन्य सेवाएं शुरू की थीं। ये दोनों जवान 1वीं कैवेलरी डिवीजन की 1वीं एयर कैवेलरी ब्रिगेड की 1वीं बटालियन, 227वीं एविएशन रेजिमेंट और ब्रावो कंपनी के हिस्सा थे। फिलहाल, अलबामा के फोर्ट रकर स्थित आर्मी कॉम्बैट रेडीनेस सेंटर की एक विशेष टीम इस हादसे की बारीकी से जांच कर रही है।

ट्रेनिंग बेड़े को ग्राउंड करने की गंभीरता

AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर अमेरिकी सैन्य शक्ति का एक प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। वर्ष 1984 में जब से इन्हें पहली बार सेवा में शामिल किया गया है, तब से ही ये हेलीकॉप्टर पिछले चार दशकों से अधिक समय से दुनिया भर में सैन्य अभियानों का अहम हिस्सा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 5,000 से भी अधिक अपाचे हेलीकॉप्टर अमेरिका और उसके मित्र देशों के बेड़ों में तैनात किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में इनकी मौजूदगी के बावजूद, एक हादसे के बाद पूरे ट्रेनिंग मिशन को ही रोक देना सेना के गंभीर रुख को दर्शाता है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस दुर्घटना के पीछे किसी तकनीकी खराबी का हाथ है या मानवीय चूक का कारण बनी है।

फोर्ट हुड का इतिहास और सुरक्षा चुनौतियां

फोर्ट हुड का इलाका पहले भी सैन्य प्रशिक्षण के दौरान होने वाली त्रासदियों का केंद्र रहा है। वर्ष 2015 में भी यहां एक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें चार सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी। इसके अलावा, 2016 में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और उफनती धाराओं में एक सैन्य वाहन बह गया था, जिसमें फोर्ट हुड के नौ सैनिकों की दुखद मृत्यु हो गई थी। इस नए हादसे ने एक बार फिर फोर्ट हुड में सैन्य सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारत के लिए इस जांच के क्या हैं मायने

यह मामला भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना भी AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टरों का संचालन करती है। भारत को पहला अपाचे हेलीकॉप्टर 2019 में प्राप्त हुआ था। यदि अमेरिकी सेना की जांच में हेलीकॉप्टर की डिजाइन, हार्डवेयर या किसी विशेष तकनीकी हिस्से में खामी पाई जाती है, तो इसका सीधा असर भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य ऑपरेटरों जैसे यूके, इजरायल, जापान, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया पर भी पड़ेगा। दुनिया भर की सेनाएं अब अमेरिकी जांच के नतीजों का इंतजार कर रही हैं ताकि वे अपने बेड़े की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठा सकें। यदि कोई तकनीकी कमी पाई जाती है, तो उसे दुरुस्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर बदलाव करने पड़ सकते हैं, जो इन हेलीकॉप्टरों की भविष्य की उड़ान योग्यता के लिए अनिवार्य होगा।

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