मानसून में टमाटर की खेती से बंपर मुनाफा
बरसात का मौसम कई फसलों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सही जानकारी और तकनीक के साथ किसान टमाटर की खेती से जबरदस्त मुनाफा कमा सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. बलदेव अग्रवाल ने बताया कि इस सीजन में टमाटर की फसल न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकती है, बल्कि यदि सही प्रबंधन किया जाए तो यह किसानों के लिए आय का एक बड़ा जरिया बन सकती है। हालांकि, इस दौरान कीट और बीमारियों का खतरा अधिक रहता है, जिससे बचाव के लिए पौधों की शुरुआती अवस्था यानी नर्सरी प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है।
बीजों का चयन है सबसे महत्वपूर्ण
टमाटर की खेती की शुरुआत हमेशा अच्छी किस्म के बीजों के चयन से होती है। डॉ. अग्रवाल के अनुसार, छत्तीसगढ़ की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए साहो किस्म सबसे अधिक प्रचलित और भरोसेमंद मानी जाती है। इस किस्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें उत्पादन अधिक मिलता है और दूसरी किस्मों की तुलना में इसमें कीट और बीमारियों का असर भी कम दिखाई देता है। इसके अलावा किसान भाई अपनी जरूरत के अनुसार लक्ष्मी 5005 और अविनाश-2 जैसी उन्नत किस्मों का भी चुनाव कर सकते हैं। बाजार में कई प्रतिष्ठित कंपनियों के अच्छे बीज उपलब्ध हैं, जो बेहतर पैदावार देने में सक्षम हैं।
नर्सरी तैयार करने के लिए सही स्थान का चयन
अच्छी फसल की पहली नींव उसकी नर्सरी में ही पड़ती है। नर्सरी के लिए ऐसी जमीन का चुनाव करें जो थोड़ी ऊंचाई पर हो ताकि वहां पानी जमा न हो। जलभराव की स्थिति में जड़ें गलने का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि नर्सरी वाली जगह पर लगातार घनी छाया न हो और वहां सूरज की रोशनी ठीक से पहुंचती हो। नर्सरी के लिए एक मीटर चौड़ी क्यारियां (बेड) बनाना सबसे आदर्श माना जाता है, जिसकी लंबाई आप अपनी आवश्यकता के अनुसार तय कर सकते हैं।
बीज बोने की आधुनिक तकनीक
आजकल उन्नत किस्मों के बीज काफी महंगे होते हैं, इसलिए उन्हें बर्बाद होने से बचाना जरूरी है। क्यारियां तैयार करने के बाद उनमें कतारबद्ध तरीके से एक-एक बीज की बुवाई करें। बीज बोने के बाद उन्हें सूखी रेत की एक पतली परत से ढंकना चाहिए। इसके बाद ड्रेंचिंग के माध्यम से सिंचाई करें और ऊपर से पुआल डालकर मल्चिंग करें। ध्यान रखें कि जैसे ही बीज अंकुरित होकर बाहर निकलने लगें, पुआल को तुरंत हटा दें ताकि पौधों का विकास बाधित न हो।
डैंपिंग ऑफ बीमारी से बचाव
नर्सरी में सबसे बड़ी समस्या डैंपिंग ऑफ (पौधों का गलना) की आती है। यह एक ऐसी बीमारी है जो रात भर में स्वस्थ दिखने वाले पौधे को सुबह तक पूरी तरह जमीन पर गिराकर नष्ट कर सकती है। इस बीमारी के लक्षण दिखने का इंतजार न करें, बल्कि शुरुआती दिनों से ही एहतियात बरतें। डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, पौधों की सुरक्षा के लिए शुरुआत में बायोस्टिन की ड्रेंचिंग करें और समय-समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करना अत्यंत आवश्यक है। उचित देखरेख के साथ 20 से 22 दिन के भीतर नर्सरी रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।
स्टेकिंग से बढ़ाएं गुणवत्ता
जब पौधे मुख्य खेत में रोपे जाते हैं, तो उन्हें सहारा देना बहुत जरूरी होता है। टमाटर की खेती में स्टेकिंग एक अनिवार्य प्रक्रिया है। जैसे-जैसे पौधों पर फल आने लगते हैं, टमाटर के वजन के कारण उनके जमीन पर गिरकर सड़ने की संभावना बढ़ जाती है। बांस की लकड़ियों, डंडियों, तार या रस्सियों की मदद से पौधों को खड़ा रखने से फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है। स्टेकिंग करने से न केवल पौधे सुरक्षित रहते हैं, बल्कि देखरेख और फलों की तुड़ाई में भी काफी आसानी हो जाती है।
उत्पादन और प्रबंधन
रोपाई के लगभग तीन महीने के बाद टमाटर में फल लगने शुरू हो जाते हैं। डॉ. अग्रवाल के अनुसार, एक एकड़ जमीन से टमाटर का उत्पादन 25 क्विंटल से लेकर 25 टन तक हो सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह से किसान द्वारा अपनाई गई किस्म, मिट्टी की उर्वरता, मौसम, सिंचाई की सुविधा और पोषक तत्वों के प्रबंधन पर निर्भर करता है। अतः बरसात के दौरान बीज चयन से लेकर स्टेकिंग और रोग नियंत्रण तक के हर चरण में सावधानी बरतकर किसान अपनी फसल को सुरक्षित और अधिक उत्पादक बना सकते हैं।
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