राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने राज्य के प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे में बदलाव लाने की दिशा में कई बड़े फैसले किए हैं। जयपुर में आयोजित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य में किसी सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर न केवल उसके पुत्र या पुत्री को, बल्कि उसकी पुत्रवधू को भी अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिल सकेगी। सरकार ने पुत्रवधू को भी इस नौकरी के लिए पूरी तरह से पात्र घोषित कर दिया है।
आगामी विधानसभा सत्र से पहले आयोजित की गई इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में कई अन्य बड़े नीतिगत फैसलों पर भी सहमति बनी है। इसमें सबसे प्रमुख समान नागरिक संहिता यानी UCC के मसौदे को मंजूरी देना है। इसके अलावा, बैठक में सरकारी राजपत्रित अधिकारियों के दो साल के भीतर त्यागपत्र देने पर किसी भी प्रकार की वसूली न करने और सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश (छुट्टियों) का लाभ देने के नियमों को भी मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट की बैठक समाप्त होने के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और राज्य मंत्री केके विश्नोई ने मीडिया को फैसलों की विस्तृत जानकारी दी। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता विधेयक को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है और इसे आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखा जाएगा। यह कानून पूरे प्रदेश में 'एक राज्य, एक कानून' की अवधारणा को साकार करेगा, हालांकि इसे जनजातीय समाज (ST) के पारंपरिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए उनके ऊपर लागू नहीं करने का फैसला लिया गया है।
UCC कानून में बहुविवाह पर रोक और कड़े नियम
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किए गए UCC विधेयक में सामाजिक सुधारों को लेकर कई कड़े प्रावधान किए गए हैं। इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में बहुविवाह प्रथा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। इसके अलावा, पति-पत्नी के बीच विवाह विच्छेद यानी तलाक केवल न्यायालय के माध्यम से ही कानूनी रूप से मान्य होगा। इस विधेयक के कानूनी रूप लेते ही विवाह से लेकर संपत्ति के उत्तराधिकार तक के कई पुराने नियम पूरी तरह बदल जाएंगे।
कैबिनेट द्वारा अनुमोदित UCC विधेयक के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
- समान नागरिक कानून: राज्य के सभी नागरिकों और धर्मों के लिए एक समान नागरिक नियमावली लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- आदिवासियों को छूट: अनुसूचित जनजाति (ST) क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक प्रथाओं पर यह कानून लागू नहीं होगा।
- विवाह की स्वतंत्रता: सभी धर्मों के लोग अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार विवाह करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।
- अनिवार्य पंजीकरण: हर शादी का विवाह के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
- जुर्माने का प्रावधान: तय समय सीमा में विवाह पंजीकरण न कराने पर शुरुआत में 10,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यदि विभाग द्वारा जारी नोटिस की अनदेखी की जाती है, तो यह जुर्माना बढ़कर 25,000 रुपये तक हो सकता है।
- आयु सीमा: विवाह के लिए पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
- धोखाधड़ी पर कार्रवाई: यदि विवाह में किसी तरह का धोखा, जबरन सहमति या नपुंसकता जैसे आधार पाए जाते हैं, तो विवाह को शून्य या निरस्त करने की न्यायिक प्रक्रिया तय की गई है।
- संपत्ति में बराबर का हक: माता-पिता की संपत्ति में बेटे और बेटी दोनों को समान रूप से अधिकार मिलेगा।
- उत्तराधिकार के नियम: उत्तराधिकार के मामले में पहली श्रेणी के उत्तराधिकारियों की सूची में पिता को भी शामिल किया गया है।
- अजन्मे बच्चे का अधिकार: यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय बच्चा मां के गर्भ में है और बाद में वह जीवित जन्म लेता है, तो उसे भी संपत्ति में पूरा उत्तराधिकार मिलेगा।
- वारिस न होने पर नीति: यदि किसी मृत व्यक्ति का कोई भी कानूनी उत्तराधिकारी नहीं बचता है, तो उसकी पूरी संपत्ति राज्य सरकार के अधीन चली जाएगी, लेकिन संपत्ति से जुड़ी देनदारियों को चुकाने का दायित्व भी राज्य सरकार का ही होगा।
- प्रमाण पत्र की अनिवार्यता: सरकारी या अर्धसरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को अपने वैवाहिक दर्जे में बदलाव दर्ज कराने के लिए अधिकृत विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
- अपील का अधिकार: मैरिज रजिस्ट्रार के किसी भी फैसले के खिलाफ पीड़ित पक्ष 30 दिनों के भीतर अपील दायर कर सकेगा। इस अपील का निस्तारण अपीलीय प्राधिकारी को अधिकतम 60 दिनों के भीतर करना होगा।
वृक्ष संरक्षण विधेयक: पर्यावरण सुरक्षा के लिए कठोर कदम
कैबिनेट की बैठक में पर्यावरण को बचाने और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'राजस्थान ट्री प्रोटेक्शन बिल' (वृक्ष संरक्षण विधेयक) को भी मंजूरी दी गई है। इसे भी आगामी विधानसभा सत्र के दौरान सदन में पेश किया जाएगा। इस कानून के तहत बिना अनुमति के पेड़ काटने पर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान किया गया है।
इस विधेयक के माध्यम से राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले राज्य वृक्ष खेजड़ी और राज्य पुष्प रोहिड़ा सहित कुल 29 विशिष्ट प्रजातियों के पेड़ों को विशेष रूप से संरक्षित श्रेणी में रखा गया है। इन पेड़ों को काटना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। हालांकि, यदि कोई विशेष या आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो पेड़ काटने के लिए विशेष दिशा-निर्देशों के तहत अलग से अनुमति लेने का प्रावधान भी इस विधेयक में जोड़ा गया है।
कर्मचारियों और महिलाओं के हित में अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
भजनलाल कैबिनेट ने सरकारी सेवा में काम करने वाले कर्मचारियों को राहत देते हुए कई अन्य संवेदनशील निर्णय भी लिए हैं। अब यदि कोई राजपत्रित अधिकारी सरकारी सेवा में आने के बाद 2 वर्षों के भीतर अपने पद से इस्तीफा देता है, तो सरकार की ओर से उसके प्रशिक्षण या अन्य मदों पर हुए खर्च की कोई वसूली नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, मातृत्व के सुख से जुड़ी तकनीकों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सरोगेसी पद्धति की मदद से मां बनने वाली महिला कर्मचारियों के लिए भी विशेष अवकाश (छुट्टियों) के नियमों को मंजूरी दी है, जिससे उन्हें भी सामान्य माताओं की तरह शिशु की देखभाल के लिए आवश्यक छुट्टियां मिल सकेंगी।
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