बलूचिस्तान में F-16 से नरसंहार: मासूमों की मौत पर अमेरिका की चुप्पी क्यों, ट्रंप प्रशासन से उठी सवाल

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सेना द्वारा अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमानों से किए गए हमलों में करीब 30 नागरिक मारे गए हैं। बलूच नेताओं ने अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद रोकने और इस हमले की जांच की मांग की है।

बलूचिस्तान में खूनी खेल और पाकिस्तानी सेना की क्रूरता

पाकिस्तान के आंतरिक हालात फिलहाल बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, जहाँ देश का विखंडन अब कोई असंभव कल्पना नहीं रह गया है। सरकार के नियंत्रण से स्थितियां बाहर निकलती दिख रही हैं, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तानी सेना अपनी दमनकारी नीतियों पर उतारू है। हाल ही में बलूचिस्तान के सोराब क्षेत्र के गदार-गोंधन इलाके में पाकिस्तानी वायुसेना ने भीषण हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में कम से कम 30 बलूच नागरिकों की दुखद मौत हो गई है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान संगठन का दावा है कि मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल थे, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस हमले से जुड़ी जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनकी तुलना गाजा की भयावह स्थितियों से की जा रही है, जिसने दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को झकझोर कर रख दिया है।

स्वतंत्रता दिवस के दिन बरपाया कहर

आरोप है कि यह हमला बलूचिस्तान के लिए बेहद खास दिन यानी 11 अगस्त को किया गया, जिस दिन बलूच लोग अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने इसके लिए अमेरिका निर्मित F-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने खैबर-पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में अपनी ही जनता के खिलाफ इन अमेरिकी जेट्स का उपयोग किया हो, लेकिन इस बार उनके निशाने पर बलूचिस्तान की आम जनता थी। इन जेट्स के उपयोग ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक बहस छेड़ दी है कि आखिर क्यों अमेरिका के दिए हुए हथियारों का इस्तेमाल मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए किया जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सामने रखी गई मांग

इस भीषण घटना के बाद बलूच नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे तौर पर अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को निशाने पर लिया है। मीर यार बलूच ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना अमेरिका से मिली सैन्य क्षमताओं का दुरुपयोग बलूच नागरिकों को कुचलने के लिए कर रही है। बलूच नेताओं ने मांग की है कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ अपने सैन्य समझौतों और सैन्य सहायता की तुरंत समीक्षा करनी चाहिए। उनकी अपील है कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार पाकिस्तान को अमेरिकी लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल निर्दोष नागरिकों पर करने से रोके।

सैन्य सहायता पर प्रतिबंध की मांग

बलूच नेताओं की मांग सिर्फ हमले की निंदा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पाकिस्तान को दी जा रही हर प्रकार की तकनीकी और सैन्य मदद को पूरी तरह रोकने की गुहार लगाई है। मीर यार बलूच ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर सहयोग बंद करने की मांग की है:

  • अमेरिकी लड़ाकू विमानों के स्पेयर पार्ट्स और इंजन सपोर्ट।
  • सेना के रक्षा उपकरण और अपग्रेड कार्यक्रम।
  • इंजन की मरम्मत और तकनीकी रखरखाव से जुड़ी मदद।

उनका तर्क है कि इस प्रकार की सहायता ही पाकिस्तान की सैन्य शक्ति को बनाए रखती है, जिसका सीधा इस्तेमाल वह अपनी ही जनता के दमन में करता है। संगठन ने विश्व समुदाय से मांग की है कि पाकिस्तान को युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए और उस पर कड़े आर्थिक व हथियार प्रतिबंध लगाए जाएं। साथ ही, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद का केंद्र और आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला राष्ट्र घोषित करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की तलाश में बलूच नेतृत्व

रणनीति के तहत, बलूच नेतृत्व अब पाकिस्तान के खिलाफ केवल घरेलू विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहना चाहता। उन्होंने अफगानिस्तान और अन्य मित्र देशों से भी समर्थन की अपील की है। बलूच नेताओं का मानना है कि यदि अफगानिस्तान और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थान इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करें, तो वे अंतरराष्ट्रीय अदालतों में बलूचिस्तान की पीड़ा को मजबूती से रख सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के किसी भी दावे को सिरे से खारिज करती है और उसे अपने देश का अभिन्न अंग बताती है, लेकिन जमीन पर स्थिति पाकिस्तान के दावों के उलट बगावत और सैन्य उत्पीड़न के एक खतरनाक चक्र में फंसी हुई है।

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