संसद का मानसून सत्र भारी हंगामे और तीखे राजनीतिक टकराव के बीच बुधवार, 13 अगस्त को समाप्त हो गया। दोनों सदनों में विपक्षी दलों के भारी विरोध और शोर-शराबे के कारण कार्यवाही को समय से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। लोकसभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इसके कुछ ही देर बाद राज्यसभा में भी लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
विपक्षी दलों का विरोध और विभिन्न मुद्दे
सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी दलों ने संसद के भीतर और बाहर कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्ष की मुख्य मांगों में निम्नलिखित मुद्दे शामिल थे:
- जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग।
- अयोध्या राम मंदिर दान विवाद के मामले पर विस्तृत चर्चा कराने की अपील।
- 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के संबंध में गृह मंत्री अमित शाह से संसद में वक्तव्य देने की मांग।
इन सभी मुद्दों पर विपक्ष लगातार चर्चा की मांग कर रहा था, जिसके चलते सदन की सामान्य कार्यवाही में बार-बार बाधा आई।
विधेयकों का पारित होना और संसदीय कामकाज
तमाम व्यवधानों और हंगामे के बावजूद सरकार ने अपने विधायी कामकाज को आगे बढ़ाया। इस सत्र के दौरान संसद ने कुल 19 विधेयक पारित किए। हालांकि, इनमें से कई विधेयकों को बिना किसी बहस के बेहद जल्दबाजी में मंजूरी दी गई।
- सत्र में पारित कुल विधेयकों की संख्या 19 रही।
- इनमें से 7 विधेयक महज 36 मिनट के भीतर बिना किसी सार्थक बहस या चर्चा के पारित कर दिए गए।
संसद के इस सत्र में विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के कारण नीतिगत मामलों पर व्यापक चर्चा नहीं हो सकी और भारी शोर-शराबे के बीच ही विधेयकों को ध्वनि मत से पारित कराया गया।
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