हाफिज सईद के लिए पूर्व मंत्री का खुला समर्थन
पाकिस्तान में आतंकवाद और मुख्यधारा की राजनीति के बीच का अंतर लगातार खत्म होता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान के पूर्व मंत्री शेख राशिद अहमद का वह बयान है, जिसने दुनिया भर को हैरान कर दिया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान शेख राशिद ने खुद को प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रमुख हाफिज सईद का गुलाम बताया है। उन्होंने कैमरे के सामने बिना किसी हिचकिचाहट के इस अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी की प्रशंसा की, जबकि पूरी दुनिया जानती है कि हाफिज सईद का नाम किस तरह से खौफ और बर्बादी का पर्याय बना हुआ है।
भारत के खिलाफ जहर उगलने का पुराना इतिहास
यह पहला मौका नहीं है जब शेख राशिद ने भारत को निशाना बनाया हो। अतीत में भी वे भारत के खिलाफ परमाणु हमले की धमकी देने जैसी हरकतें कर चुके हैं। उनकी यह बेशर्मी साफ दर्शाती है कि पाकिस्तान में नफरत फैलाने वाले तत्वों को किस तरह से सियासी संरक्षण मिलता रहा है। हाफिज सईद को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा चुका है। वह 2008 के कुख्यात मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है। 26/11 की उस त्रासदी में सैकड़ों बेगुनाह लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, जिसकी कड़वी यादें आज भी भारत के लोगों के जेहन में ताजा हैं।
आतंकवाद पर पाकिस्तान का दोहरा चेहरा
पाकिस्तान अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को शांति का दूत बताने का ढोंग करता है, लेकिन उसके पूर्व मंत्रियों के ऐसे बयान उसकी असलियत को सबके सामने लाने के लिए काफी हैं। एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी की सरेआम पैरवी करना और उसे गौरव प्रदान करना यह साबित करता है कि पाकिस्तान की जमीन पर पलने वाले आतंकियों को वहां के सत्ता तंत्र का पूरा समर्थन प्राप्त है। हाफिज सईद जैसे आतंकियों के लिए सम्मान व्यक्त करना न केवल भारत के जख्मों पर नमक छिड़कना है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तरह के बयानों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
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