अमित शाह की चुनौती और राहुल गांधी का बदलता रुख, संसद में क्यों बढ़ा सियासी घमासान

संसद में हंगामे के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को चर्चा के लिए खुला निमंत्रण दिया है, लेकिन राहुल गांधी की नई शर्तों ने एक बार फिर गतिरोध पैदा कर दिया है। विपक्ष के नेता अपनी रणनीति बदलने और संसद में नई मांगें रखने को लेकर चौतरफा घिरते नजर आ रहे हैं।

संसद में चर्चा की चुनौती और विपक्ष का नया दांव

संसद का कामकाज पिछले 20 दिनों से बाधित है और इस दौरान देश ने लगातार हंगामे का दौर देखा है। इंडिया गठबंधन के नेता, जिन्हें इंडी वाले भी कहा जा रहा है, लगातार जंतर मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग कर रहे थे। स्थिति तब दिलचस्प हो गई जब आज अमित शाह ने सदन के पटल पर विपक्ष को चर्चा के लिए सीधे तौर पर आमंत्रित कर दिया। उन्होंने संदेश भिजवाया कि विपक्ष चर्चा के लिए आगे आए और वे हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन, उम्मीद के उलट राहुल गांधी ने एक बार फिर चर्चा की मेज पर नई शर्तें रख दी हैं और गोल पोस्ट बदलने का काम किया है।

विपक्ष का यह रवैया अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। राहुल गांधी चाहते हैं कि सदन का संचालन उनकी शर्तों पर हो। उनकी मांग है कि अमित शाह सदन में आकर केवल वही बातें कहें जो वे पूछना चाहते हैं। एक तरह से राहुल गांधी यह चाहते हैं कि गृह मंत्री उनके ऑर्डर पर सदन में आएं और किसी भी शब्द के हेर-फेर के बिना केवल उनके द्वारा निर्धारित प्रश्नों का ही उत्तर दें। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन का मुख्य उद्देश्य अब जवाब सुनना नहीं बल्कि संसद में गतिरोध बनाए रखना है।

मोदी-शाह को घेरने की कोशिश में राहुल की अपनी उलझन

पिछले कुछ दिनों में राहुल गांधी और उनके सहयोगी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ी। चाहे वह छात्रों से जुड़े मुद्दे हों या फिर संसद का सत्र, हर जगह वे बैक टू बैक एक्सपोज हो रहे हैं। पहले छात्रों के मुद्दे पर उनकी राजनीति की पोल खुली और अब संसद को ठप रखने की रणनीति पर भी वे जनता के सवालों के घेरे में हैं। अमित शाह ने जब आज उन्हें चर्चा के लिए समय दिया और चुनौती दी कि वे जवाब सुनने आएं, तो राहुल गांधी ने उलटे यह सवाल खड़ा कर दिया कि अमित शाह टाइम तय करने वाले कौन होते हैं।

यह विरोधाभास साफ नजर आता है कि जब तक अमित शाह जवाब नहीं दे रहे थे, तब तक विपक्ष उनके पीछे पड़ा था। अब जब वे जवाब देने के लिए तैयार हैं और समय भी तय कर चुके हैं, तो विपक्ष को यह भी आपत्ति है कि अमित शाह ने एजेंडा क्यों तय किया। राहुल गांधी ने यहां तक कह दिया कि उन्हें अमित शाह का व्याख्यान सुनने में कोई रुचि नहीं है। यह रुख यह साबित करता है कि विपक्ष या तो पूरी तरह से भ्रमित है या फिर उसका मकसद सिर्फ शोर मचाना और चर्चा से भागना है। उन्हें डर है कि यदि चर्चा हुई और जवाब मिला, तो उसके तर्क विपक्षी खेमे पर ही भारी पड़ सकते हैं।

नई शर्तें और संसद की मर्यादा का सवाल

संसदीय परंपराओं में चर्चा का तरीका स्पष्ट है। विपक्ष अपनी बात सदन में रखता है और सरकार उस पर आधिकारिक जवाब देती है। लेकिन पिछले 20 दिनों से संसद का जो स्वरूप दिख रहा है, उसमें केवल नारेबाजी और हंगामा ही मुख्य है। जब गृह मंत्री ने आज कहा कि विपक्ष दोपहर 2 बजे तक स्पीकर को लिखित में चर्चा का आग्रह दे दे और 3 बजे से चर्चा शुरू की जा सकती है, तो विपक्ष ने इसे खारिज कर दिया। राहुल गांधी की जिद है कि सदन उनके तय किए हुए तरीके से चले, ना एक शब्द कम और ना एक शब्द ज्यादा।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि सदन किसी व्यक्ति की शर्तों पर नहीं, बल्कि नियमों और कार्यप्रणाली से चलता है। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि विपक्ष को स्पीकर के सामने अपने मुद्दे लिखित में रखने चाहिए ताकि सरकार हर विषय पर बात कर सके। राहुल गांधी की घबराहट के पीछे का एक बड़ा कारण यह हो सकता है कि उन्हें डर है कि यदि गृह मंत्री सदन में तथ्यों के साथ जवाब देंगे, तो विपक्ष के पास काउंटर सवाल करने के लिए ठोस आधार नहीं बचेगा।

झारखंड का मुद्दा और राहुल गांधी की चुप्पी

संसद के भीतर मोदी-शाह को घेरने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी बाहर झारखंड के मुद्दे पर बुरी तरह फंसे हुए दिखाई दे रहे हैं। झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना के बाद से ही इंडिया गठबंधन के नेता जवाबदेही से बचते दिख रहे हैं। राहुल गांधी जो खुद को Gen Z का नेता पेश करने की कोशिश कर रहे थे, अब उनकी यह छवि झारखंड के घटनाक्रम के बाद धूमिल होती नजर आ रही है। झारखंड में उनकी गठबंधन की सरकार है, फिर भी छात्रों पर हुए अत्याचार पर राहुल गांधी की चुप्पी उनके छात्र प्रेम को कठघरे में खड़ा करती है।

बीजेपी की ओर से भी यह सवाल लगातार उठाया जा रहा है कि राहुल गांधी हेमंत सोरेन से इस्तीफा क्यों नहीं मांगते। यदि वे छात्रों के इतने ही बड़े हितैषी हैं, तो झारखंड सरकार को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश क्यों नहीं देते। यही कारण है कि अब संसद में चर्चा की बात आते ही वे अपना ध्यान भटकाने के लिए नए-नए मुद्दे उछाल रहे हैं।

संसदीय कार्यमंत्री और भाजपा का रुख

संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने भी स्थिति साफ की है कि सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से कहा है कि वे हंगामा बंद करें और संसद की कार्यवाही चलने दें। यहाँ तक कि कल सत्र का आखिरी दिन होने के बावजूद सरकार समय बढ़ाने को भी तैयार है, बशर्ते विपक्ष चर्चा में शामिल हो। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष के भागने के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि विपक्ष गृह मंत्री के तर्कों का सामना करने से डरता है। जब अमित शाह तथ्यों के साथ सदन में बोलते हैं, तो विपक्ष के पास बोलने के लिए कुछ नहीं बचता।

विपक्ष का रवैया बार-बार अपना गोल पोस्ट बदलने का रहा है। पहले वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, फिर उन्होंने जंतर मंतर का मुद्दा उठाया और अब वे अपनी शर्तों पर जवाब की मांग कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी जैसे दल फिर से किसी नए मुद्दे को बीच में लाकर चर्चा को पटरी से उतारने का प्रयास कर रहे हैं। यह सब यह दर्शाता है कि इंडिया गठबंधन का लक्ष्य चर्चा करना नहीं, बल्कि संसद को बाधित रखकर राजनीतिक लाभ उठाने का है।

निष्कर्ष और भविष्य की राजनीति

राहुल गांधी का यह कहना कि वे झारखंड के मामले पर चुप नहीं हैं और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात कही है, धरातल पर प्रभाव नहीं डाल पा रहा है। जनता यह देख रही है कि जिस मजबूती के साथ वे संसद में गृह मंत्री का जवाब मांग रहे थे, उसी स्तर का विरोध वे अपनी सरकारों के फैसलों के खिलाफ नहीं दिखा रहे हैं। अंततः, संसद लोकतंत्र का मंदिर है और यहाँ चर्चा का कोई विकल्प नहीं है। अमित शाह ने खुला चैलेंज देकर गेंद विपक्ष के पाले में डाल दी है, लेकिन राहुल गांधी की हठधर्मिता ने इस लोकतंत्र के मंच को एक बार फिर गतिरोध के भंवर में फंसा दिया है। देश अब यह देख रहा है कि चर्चा की मेज पर कौन अपनी बात मजबूती से रख पाता है और कौन सिर्फ हंगामे की राजनीति में उलझा रहता है।

प्रमुख बिंदु

  • अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष को किसी भी विषय पर चर्चा और जवाब देने का खुला प्रस्ताव दिया।
  • राहुल गांधी ने चर्चा के लिए अपनी नई शर्तें लागू करने की कोशिश की, जिससे संसद का कामकाज फिर रुक गया।
  • किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार सत्र की अवधि बढ़ाने को तैयार है यदि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार हो।
  • झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर विपक्ष की चुप्पी को लेकर भाजपा ने राहुल गांधी को घेरा है।
  • विपक्ष द्वारा लगातार अपना एजेंडा बदलने और चर्चा से भागने की रणनीति की आलोचना की जा रही है।

https://hindi.news18.com/news/nation/pm-modi-and-amit-shah-open-challenge-in-parliament-monsoon-session-exposed-congress-rahul-gandhi-on-neet-student-protest-sushant-sinha-desh-ki-pathshala-10743953.html