हाथियों के अनोखे दोस्त बने पुजारी, एक पुकार पर जंगल से निकल आते हैं गजराज, अब असम वन विभाग ने उठाए सख्त कदम

असम के होजाई जिले में एक पुजारी और जंगली हाथियों के बीच बनी अटूट दोस्ती इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है, लेकिन इस मामले में वन विभाग की दखल ने नई बहस छेड़ दी है।

असम के जंगलों से सामने आया अनोखा दृश्य

असम के होजाई जिले के थेपेलागुड़ी में इन दिनों एक ऐसा वाकया देखने को मिल रहा है, जिस पर आसानी से यकीन करना नामुमकिन सा लगता है। घने जंगल के किनारे स्थित एक आश्रम के पास का दृश्य किसी जादुई कहानी जैसा है। वहां के स्थानीय निवासी और राहगीर अक्सर यह देखकर दंग रह जाते हैं कि जब एक विशेष पुजारी अपनी आवाज से हाथियों को पुकारते हैं, तो जंगल की गहराई से विशालकाय हाथी धीरे-धीरे बाहर निकल आते हैं।

पुजारी और गजराज का गहरा नाता

यह पूरा मामला काल भैरव डांगोरिया बाबा के आश्रम से जुड़ा है। यहां रहने वाले पुजारी गौरांग दास का जंगली हाथियों के साथ यह अनोखा रिश्ता अचानक नहीं बना है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले छह साल से यह क्रम जारी है। गौरांग दास की पहली मुलाकात इन हाथियों से आश्रम में रहने के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे समय बीतने के साथ यह संवाद बढ़ता गया और अब आश्रम में हाथियों का आना-जाना एक आम बात हो गई है। लाल कपड़े पहने पुजारी जब जंगल की ओर मुखातिब होकर पुकारते हैं, तो झाड़ियों के पीछे छिपे हाथी बिना किसी डर या हिचकिचाहट के उनके करीब चले आते हैं।

बिना जंजीर और बिना बंधन के दोस्ती

इन हाथियों की सबसे खास बात यह है कि ये पूरी तरह से मुक्त हैं। उन्हें किसी बाड़े में नहीं रखा गया है और न ही उन पर कोई जंजीर है। पुजारी के हाथों से केले खाने के बाद ये गजराज शांति से वापस जंगल की ओर लौट जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इनके वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि कैसे ये जानवर पुजारी के प्रति विश्वास और स्नेह दिखाते हैं। बताया जाता है कि ये हाथी दिन ही नहीं, बल्कि रात के समय भी आश्रम के पास देखे जाते हैं। कई बार ये पवित्र अग्नि के करीब तक पहुंच जाते हैं, जो इंसानों और वन्यजीवों के बीच भरोसे की एक अद्भुत मिसाल पेश करता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता और खतरे

हालांकि, यह दृश्य जितना सुखद और आकर्षक लग रहा है, वन्यजीव विशेषज्ञों ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी भी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगली जानवरों को इंसानी आबादी के करीब बुलाना और उन्हें नियमित रूप से भोजन खिलाना उनके स्वाभाविक व्यवहार में बदलाव ला सकता है। यदि हाथी यह सीख जाते हैं कि उन्हें एक निश्चित स्थान पर आसानी से भोजन मिल सकता है, तो वे बार-बार वहां आएंगे। इससे उनके इंसानी इलाकों की ओर आकर्षित होने का खतरा बढ़ जाता है, जो भविष्य में मानव-हाथी संघर्ष के रूप में एक बड़ी चुनौती बन सकता है। असम जैसे राज्य में, जहां पहले से ही मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं चिंता का विषय रही हैं, वहां इस तरह का व्यवहार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।

वन विभाग की चेतावनी और कानूनी कार्यवाही

अब इस पूरे मामले पर असम वन विभाग ने अपनी पैनी नजर गड़ा दी है। कपिली वैली रेंज कार्यालय की ओर से स्पष्ट रूप से आदेश जारी किया गया है कि जंगली हाथियों को इस तरह भोजन खिलाना गैर-कानूनी है। विभाग ने इस संबंध में नोटिस जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश का उल्लंघन होता है, तो संबंधित व्यक्ति पर 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर तारीफ बटोरने वाला यह अनोखा रिश्ता अब एक गंभीर कानूनी और वन्यजीव संरक्षण के सवाल के घेरे में आ गया है। फिलहाल, क्षेत्र के लोग और वन्यजीव प्रेमी इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि इस अद्भुत मित्रता का अंत किस तरह होता है और क्या पुजारी अपनी इस आदत को बदलेंगे।

https://hindi.news18.com/photogallery/nation/this-priest-fed-wild-elephants-by-hand-now-faces-a-forest-department-notice-in-assam-see-photos-local18-10743815.html