चीन और पाकिस्तान के बीच भारत की बड़ी तैयारी
भारत सरकार लद्दाख में अपने रणनीतिक एयरफील्ड्स को और अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में काम कर रही है। चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के पास स्थित थॉइस एयरफील्ड को अब नागरिक उड़ानों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया ने तेजी पकड़ ली है। लद्दाख के इस बेहद दुर्गम और संवेदनशील इलाके में अब वायुसेना के लड़ाकू विमानों और सैन्य परिवहन विमानों के साथ-साथ आम यात्रियों के विमान भी उड़ान भरेंगे। इस योजना को भारत की रक्षा नीति और क्षेत्रीय संपर्क के एक बड़े हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। थॉइस की भौगोलिक स्थिति इसे न केवल एक सैन्य केंद्र बनाती है बल्कि भविष्य में यह पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का नया हब बन सकता है।
थॉइस एयरफील्ड की बदलती तस्वीर
लंबे समय से भारतीय वायुसेना के सैन्य ऑपरेशंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट का मुख्य आधार रहा थॉइस एयरफील्ड अब नई भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह एयरफील्ड नुब्रा घाटी के बिल्कुल करीब स्थित है, जो इसे चीन सीमा के सबसे करीब मौजूद एयरबेस में से एक बनाता है। हाल ही में लद्दाख में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रोजेक्ट को लेकर ब्लूप्रिंट पर विस्तृत चर्चा की गई है। इस बैठक में इस बात पर मंथन किया गया कि किस तरह सैन्य एयरफील्ड की मर्यादा और सुरक्षा को बनाए रखते हुए वहां नागरिक बुनियादी ढांचा खड़ा किया जा सकता है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एएआई को इस पूरे काम का खाका खींचने और निर्माण संबंधी अनुमान तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है।
प्रशासनिक और तकनीकी मंथन
लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में नागरिक उड्डयन सचिव निधि मलिक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान एयरफील्ड के लेआउट, रनवे के साझा इस्तेमाल, यात्रियों के लिए अस्थायी टर्मिनल की व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर विस्तार से बात हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नागरिक विमानों का संचालन शुरू होने के बावजूद एयरफील्ड की सैन्य महत्ता पर कोई आंच नहीं आएगी। एएआई अब जल्द ही निविदा यानी टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी ताकि जरूरी निर्माण कार्य समय पर पूरे किए जा सकें। संबंधित विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं ताकि कार्य में किसी भी तरह की देरी न हो।
नुब्रा घाटी के लिए नया सफर
इस योजना से सबसे अधिक लाभ नुब्रा घाटी के निवासियों को होगा। वर्तमान में यह इलाका पूरी तरह से सड़क मार्ग पर निर्भर है, जो सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण महीनों तक बंद हो सकता है। लद्दाख की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई को देखते हुए थॉइस से हवाई उड़ान शुरू करना एक जीवनरेखा साबित हो सकता है। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि यात्री विमानों का संचालन शुरू होता है, तो नुब्रा में होटल और टैक्सी कारोबार में भारी वृद्धि होगी। सरकार इसे क्षेत्रीय संपर्क योजना यानी उड़ान के अंतर्गत जोड़ने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है, जिससे किफायती हवाई यात्रा का सपना सच हो सकेगा।
सामरिक दृष्टिकोण से महत्व
थॉइस एयरफील्ड की उपयोगिता केवल यात्रियों तक ही सीमित नहीं है। भारत और चीन के बीच एलएसी पर बढ़े तनाव के मद्देनजर, लद्दाख में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना एक बड़ी प्राथमिकता है। थॉइस पहले से ही भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक नेटवर्क का हिस्सा है। यहां नागरिक सुविधाएं विकसित होने से आपातकालीन स्थिति में भी त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता में इजाफा होगा। सैन्य और नागरिक गतिविधियों के इस अनूठे मेल से सीमावर्ती इलाकों में भारतीय उपस्थिति और अधिक दृढ़ होगी, जिसे ड्रैगन के लिए किसी बड़े संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।
जमीन और निर्माण से जुड़ी चुनौतियां
थॉइस में नागरिक ऑपरेशन शुरू करना कोई आसान काम नहीं रहा है। बीते कई वर्षों से इसे लेकर चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन जमीन के आवंटन और रक्षा मंजूरियों के कारण यह मामला अटकता रहा। नवंबर 2022 में लद्दाख प्रशासन ने खुलासा किया था कि थॉइस में नागरिक उड़ान के लिए 28 कनाल जमीन चिह्नित की गई थी। हालांकि समय के साथ एएआई की जरूरतें बदली हैं, जिसके बाद अब 1.5 एकड़ अतिरिक्त जमीन और कुछ रिपोर्टों के अनुसार सिविल एन्क्लेव के लिए 5 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है। सैन्य सुरक्षा और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट के कड़े नियमों के बीच सिविल एयरलाइंस को जगह देना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सुरक्षा का अभेद्य घेरा
किसी भी सैन्य एयरफील्ड पर नागरिक ऑपरेशंस के दौरान सुरक्षा सबसे संवेदनशील मुद्दा होता है। थॉइस की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यात्रियों की स्क्रीनिंग, टर्मिनल का अलगाव और रनवे की सुरक्षा को लेकर रक्षा मंत्रालय और वायुसेना की कड़ी शर्तें लागू होंगी। सैन्य अभियानों को प्राथमिकता देते हुए किस प्रकार नागरिक उड़ानों के लिए स्लॉट मैनेज किए जाएंगे, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी। ताजा बैठक में निर्माण कार्यों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिए जाने से स्पष्ट है कि अब यह योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरने को तैयार है।
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि अभी तक पहली व्यावसायिक उड़ान की सटीक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन जिस गति से काम आगे बढ़ रहा है, उससे उम्मीदें जग गई हैं। नुब्रा घाटी के लोगों के लिए यह सुविधा एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत हो सकती है। थॉइस एयरफील्ड से उड़ने वाले ये विमान न केवल यात्रियों को ले जाएंगे, बल्कि ये लद्दाख की सुरक्षा और विकास के बीच एक नया सेतु भी साबित होंगे। सीमा पर पाकिस्तान और चीन की दोहरी चुनौतियों के बीच, भारत का यह कदम अपनी सामरिक पहुंच को और अधिक विस्तार देने की नीति को दर्शाता है।
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