शंकराचार्य मंदिर में विशेष अनुष्ठान
जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में बुधवार का दिन आध्यात्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहा। शहर के प्रमुख और ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पवित्र 'अमरनाथ छड़ी मुबारक' की पूजा की गई। इस पावन अवसर पर महंत दीपेंद्र गिरी मुख्य रूप से उपस्थित थे। उनके साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधु-संतों ने भी भाग लिया और विधि-विधान के साथ अनुष्ठान संपन्न किया। इस पूजा के साथ ही अमरनाथ यात्रा के अंतिम चरणों की औपचारिक शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन
इस पवित्र छड़ी मुबारक की यात्रा से जुड़ी परंपराएं सदियों पुरानी हैं। श्रीनगर के दशनामी अखाड़े स्थित शिव मंदिर में पहले पूजा की गई, जिसके बाद इसे शंकराचार्य मंदिर ले जाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी और पूरा वातावरण 'हर-हर महादेव' तथा 'बम-बम भोले' के नारों से गुंजायमान हो उठा। पौराणिक मान्यताओं और सदियों से चली आ रही रीत के अनुसार, अमरनाथ गुफा की ओर प्रस्थान करने से पहले छड़ी मुबारक का शंकराचार्य मंदिर में पूजन अनिवार्य है। इसके बाद, परंपरा के अगले क्रम में गुरुवार को शारिका देवी मंदिर में अनुष्ठान किया जाएगा।
क्या है छड़ी मुबारक का महत्व
अमरनाथ यात्रा में छड़ी मुबारक का स्थान सर्वोपरि है। ऐसा माना जाता है कि पारंपरिक रूप से यात्रा की शुरुआत इसी छड़ी की शुरुआती पूजा के साथ होती है। यह पवित्र छड़ी कश्मीर घाटी के कई प्रमुख मंदिरों से होकर गुजरती है और हर स्थान पर इसकी विधिवत पूजा की जाती है। इस यात्रा का समापन अमरनाथ गुफा में अंतिम समारोह के साथ होता है, जिसके बाद पहलगाम में लिद्दर नदी के तट पर अंतिम अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
यात्रा का आगामी कार्यक्रम और समापन
निश्चित कार्यक्रम के अनुसार, 22 अगस्त को छड़ी मुबारक श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से रवाना होकर पहलगाम की ओर बढ़ेगी। यात्रा का विस्तृत शेड्यूल इस प्रकार है:
- 22 और 23 अगस्त: पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।
- 24 अगस्त: यात्रा चंदनवाड़ी पहुंचेगी।
- 25 अगस्त: यात्रा शेषनाग के पड़ाव पर पहुंचेगी।
- 26 और 27 अगस्त: पंचतरणी में विश्राम किया जाएगा।
- 28 अगस्त: छड़ी मुबारक पवित्र गुफा पहुंचेगी, जहां अंतिम पूजा के साथ इस साल की अमरनाथ यात्रा का समापन होगा।
यात्रा संपन्न होने के बाद पवित्र छड़ी को वापस दशनामी अखाड़े लाया जाएगा, जहां इसे आगामी वर्ष की यात्रा तक सुरक्षित रखा जाता है।
खराब मौसम का असर
इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा की बात करें, तो 3 जुलाई को शुरू हुई यह 57 दिन लंबी यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। अब तक 4.67 लाख से अधिक तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि, मौसम के मिजाज ने यात्रा की गति को प्रभावित किया है। बीते 8 अगस्त से खराब मौसम के चलते यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है। भारी बारिश के कारण बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों के कुछ हिस्सों में रास्ते क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनकी मरम्मत और रखरखाव का कार्य जारी है। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए फिलहाल यात्रियों को आगे नहीं जाने दिया जा रहा है, लेकिन छड़ी मुबारक की निर्धारित यात्रा परंपरा के अनुरूप ही जारी रहेगी और 22 अगस्त को यह पवित्र गुफा की ओर प्रस्थान करेगी।
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