काजू कतली पर चांदी की जगह एल्युमिनियम का वर्क लगाना कानूनी है या अपराध? गुजरात के भानुभाई ने 31 साल तक लड़ी अदालती जंग

काजू कतली पर चांदी के बजाय एल्युमिनियम का वर्क चढ़ाने की वैधता को लेकर गुजरात के मिठाई दुकानदार भानुभाई ने 31 वर्षों तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है, जिसके बाद इस पर फैसला आया है।

काजू कतली की चमक और मुनाफे का खेल

भारतीय त्योहारों और शुभ अवसरों पर मिठाई बांटने की परंपरा सदियों पुरानी है, और इस फेहरिस्त में काजू कतली का नाम सबसे ऊपर आता है। इस लोकप्रिय मिठाई के ऊपर लगी चांदी की पतली परत, जिसे 'वर्क' कहा जाता है, इसकी खूबसूरती और स्वाद में चार चांद लगा देती है। आम तौर पर ग्राहक यही मानकर इसे खरीदते हैं कि मिठाई पर लगा हुआ वर्क असली चांदी का है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाली हर काजू कतली पर लगी यह परत चांदी की ही होती है? मुनाफा कमाने की होड़ में कई मिठाई दुकानदार ग्राहकों की सेहत और भरोसे के साथ खिलवाड़ करते हुए चांदी की जगह सस्ते एल्युमिनियम वर्क का इस्तेमाल करने लगते हैं।

क्या एल्युमिनियम वर्क का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है?

मिठाई प्रेमियों और उपभोक्ताओं के बीच हमेशा से यह एक बड़ा सवाल रहा है कि क्या काजू कतली जैसी महंगी मिठाइयों पर चांदी के बजाय एल्युमिनियम की परत चढ़ाना कानूनन सही है या फिर यह पूरी तरह से गैरकानूनी है? इस उलझन को हमेशा के लिए सुलझाने और कानून की नजर में इसका सच सामने लाने के लिए एक मिठाई दुकानदार को दशकों लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

भानुभाई की 31 साल लंबी कानूनी लड़ाई

इस पूरे मामले को कानूनी चौखट तक ले जाने वाले शख्स हैं गुजरात के एक मिठाई विक्रेता भानुभाई। भानुभाई ने मिठाई पर एल्युमिनियम वर्क के इस्तेमाल की वैधता को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। यह मामला कोई मामूली कानूनी विवाद नहीं था, बल्कि यह देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों में से एक बन गया। भानुभाई ने इस मुद्दे पर कानून का रुख साफ कराने के लिए पूरे 31 साल तक एक लंबी और थका देने वाली कानूनी जंग लड़ी। इस लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर अदालत का फैसला आ गया है, जो इस उद्योग से जुड़े लोगों और ग्राहकों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

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