उत्तराखंड के गोलू देवता: जहां अर्जी लिखकर मिलता है न्याय और घंटियां बजाकर पूरी होती है मुराद

कुमाऊं क्षेत्र में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने वाले गोलू देवता के दरबार में भक्त अपनी फरियाद कागज पर लिखकर लाते हैं और मन्नत पूरी होने पर घंटियां अर्पित करते हैं।

न्याय के अनूठे देवता की महिमा

उत्तराखंड की लोक परंपराओं में गोलू देवता का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और पूजनीय है। कुमाऊं अंचल के लोग इन्हें न्याय के साक्षात देवता मानते हैं और ऐसी गहरी आस्था है कि उनके दरबार में लगाई गई कोई भी सच्ची पुकार कभी खाली नहीं जाती। यही कारण है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से भक्त अपनी समस्याओं और न्याय की आस लेकर उनके मंदिरों तक लंबी यात्रा तय करके पहुंचते हैं।

कागज पर लिखी जाती है फरियाद

इन मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता यहां आने वाली भक्तों की अर्जी है। लोग अपनी परेशानियां, दुख और न्याय से जुड़ी बातें सादे कागज या स्टांप पेपर पर लिखकर देवता के चरणों में अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि गोलू देवता उन अर्जियों को पढ़ते हैं और न्याय सुनिश्चित करते हैं।

मंदिरों में लगी हजारों घंटियां

जब भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, तो वे आभार व्यक्त करने के लिए मंदिर में घंटियां चढ़ाते हैं। इसी वजह से इन मंदिरों में हजारों की संख्या में घंटियां दिखाई देती हैं। चाहे चंपावत का ग्वाल देवता मंदिर हो, अल्मोड़ा का प्रसिद्ध चितई गोलू देवता मंदिर, गैराड़ मंदिर हो, या फिर नैनीताल और हल्द्वानी में स्थित गोलू देवता के मंदिर, हर स्थान पर आस्था का यही अनूठा स्वरूप देखने को मिलता है। इन मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास का प्रमाण है।

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