पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं: अमेरिका ने सैन्य और ISI के सीक्रेट बजट का मांगा पूरा हिसाब

अमेरिका ने राजकोषीय पारदर्शिता रिपोर्ट 2026 जारी कर पाकिस्तान से उसके सैन्य और खुफिया एजेंसी ISI के खर्चों की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा है। वाशिंगटन ने स्पष्ट कर दिया है कि आर्थिक सहायता के बदले में अब पारदर्शिता जरूरी है।

पाकिस्तान के सीक्रेट बजट पर अमेरिका का कड़ा रुख

पाकिस्तान के लिए अपनी आर्थिक बदहाली से बाहर निकलना और मुश्किल होता जा रहा है। मदद की उम्मीद में अमेरिका के दरवाजे पर दस्तक देने वाले पाकिस्तान को अब एक बड़ा झटका मिला है। अमेरिका ने पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया है कि यदि उसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग चाहिए, तो उसे अपने वित्तीय लेनदेन और खास तौर पर सैन्य खर्चों का पूरा हिसाब देना होगा। अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल ही में जारी अपनी राजकोषीय पारदर्शिता रिपोर्ट 2026 में पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा है कि देश में वित्तीय मामलों को लेकर पारदर्शिता की भारी कमी है, जिसे तुरंत दुरुस्त करने की आवश्यकता है।

सैन्य और खुफिया एजेंसियों पर बढ़ता दबाव

अमेरिकी रिपोर्ट में विशेष रूप से पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी ISI के बजट पर सवाल उठाए गए हैं। वाशिंगटन का मानना है कि इन संस्थाओं पर खर्च होने वाली भारी-भरकम राशि के लिए कोई उचित संसदीय या नागरिक निगरानी का तंत्र मौजूद नहीं है। अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार को अपने सैन्य और खुफिया बजट को सार्वजनिक करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी धन का उपयोग सही दिशा में हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की वर्तमान व्यवस्था में इन संवेदनशील खर्चों को बेहद गोपनीय रखा जाता है, जो वित्तीय जवाबदेही के अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है।

बजट प्रस्ताव और कर्ज का ब्यौरा देने में कोताही

अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी समीक्षा में पाया है कि पाकिस्तान सरकार ने अपना कार्यकारी बजट प्रस्ताव भी समय पर पेश नहीं किया। इसके अलावा, सरकारी कर्ज को लेकर भी पाकिस्तान की नीतियां पारदर्शी नहीं हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि विशेष रूप से बड़ी सरकारी कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज का ब्यौरा आम जनता से छिपाया जा रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि साल के अंत में प्रकाशित होने वाली वित्तीय रिपोर्ट और पास किए गए बजट के दस्तावेज आम नागरिकों के लिए उपलब्ध रहते हैं, जिनसे सरकार की कुल कमाई और खर्च के मुख्य स्रोतों का पता चलता है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त होने वाली आय भी शामिल है।

अमेरिका की सख्ती का कारण

अमेरिका हर उस देश की बारीकी से जांच करता है जिसे वह आर्थिक मदद मुहैया कराता है। इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी करदाताओं के पैसे की सुरक्षा करना है। पाकिस्तान को अब यह बताना होगा कि उसे मिलने वाली सहायता और सरकारी खजाने का पैसा कहां और कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है। यह संदेश साफ है कि बिना पूरी पारदर्शिता के भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय मदद प्राप्त करना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं होगा।

पाकिस्तान का रक्षा बजट और आर्थिक स्थिति

जून 2026 में पेश किए गए ताजा बजट आंकड़ों पर नजर डालें, तो पाकिस्तान सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 3 ट्रिलियन रुपये यानी करीब 3.01 ट्रिलियन रुपये का आवंटन किया है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुकाबले 17.6 प्रतिशत से 17.7 प्रतिशत तक अधिक है। पाकिस्तान का कुल संघीय बजट 18.77 ट्रिलियन से 18.8 ट्रिलियन रुपये के बीच है। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान अपने कुल बजट का लगभग 16 फीसदी हिस्सा सेना पर खर्च कर रहा है। इसके साथ ही, आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में अमेरिका ने पाकिस्तान को लगभग 67 से 78 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद दी थी। जुलाई 2026 में पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की मुद्रा स्थिरता सुविधा की मांग की थी, लेकिन अमेरिकी सरकार ने अभी तक इस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

https://hindi.news18.com/world/pakistan-us-slams-pakistan-over-secret-budget-asks-details-on-military-and-isi-expenditure-10741321.html