इतिहास की गवाह यह इमारत
बिहार के जहानाबाद जिले का इतिहास काफी पुराना है। हालांकि जिले के रूप में इसका गठन हुए अभी 40 साल ही बीते हैं, लेकिन इस क्षेत्र का अतीत बेहद समृद्ध रहा है। वाणावर पहाड़ी की प्राचीन गुफाएं इस बात का पुख्ता प्रमाण देती हैं कि यह भूमि सदियों से महत्वपूर्ण रही है। इन्हीं ऐतिहासिक निशानियों में से एक है जहानाबाद शहर में स्थित अजीज मेमोरियल हॉल। यह इमारत न केवल अपनी वास्तुकला के लिए जानी जाती है, बल्कि इसका सफर भी काफी दिलचस्प रहा है।
साल 1927 में हुई थी स्थापना
अजीज मेमोरियल हॉल का निर्माण कार्य वर्ष 1927 में पूरा हुआ था। स्थानीय लोगों की मानें तो आजादी से पूर्व के भारत में इस हॉल का मुख्य मकसद शहर में होने वाली छोटी-मोटी बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करना था। उस दौर में शहर की कई महत्वपूर्ण बैठकें इसी हॉल की दीवारों के भीतर संपन्न हुई थीं। हालांकि, जैसे-जैसे देश ने आजादी की ओर कदम बढ़ाया, इस इमारत की उपयोगिता और स्वरूप में भी बदलाव आने लगे।
स्वतंत्रता के बाद बदला स्वरूप
जब भारत आजाद हुआ, तो पूरे देश के साथ-साथ जहानाबाद के प्रशासनिक ढांचे में भी बड़े बदलाव किए गए। उस समय जहानाबाद, गया जिले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था और यह अनुमंडल के स्तर पर कार्य करता था। उस दौरान यह इमारत अनुमंडल पदाधिकारी का कार्यालय बनी। कुछ समय बाद, यहां डीएसपी कार्यालय की स्थापना हुई। इसके बाद, 1 अगस्त 1986 का वह ऐतिहासिक दिन आया जब जहानाबाद को पूर्ण जिले का दर्जा मिला। इसके बाद यह इमारत एसपी कार्यालय में तब्दील हो गई, जहां से जिले के पुलिस कप्तान कानून-व्यवस्था की कमान संभाला करते थे।
प्रशासनिक विकास और खाली होती इमारत
जैसे-जैसे समय बीतता गया और बिहार में विकास कार्यों ने गति पकड़ी, सरकारी दफ्तरों के लिए नई और आधुनिक इमारतों का निर्माण होने लगा। प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए एसपी ऑफिस को नई जगह शिफ्ट कर दिया गया। तब से यह ऐतिहासिक इमारत पूरी तरह खाली हो गई है। वर्तमान में इसकी देखरेख और भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पुस्तकालय बनाने की मांग
स्थानीय निवासी इसे जिले की एक अमूल्य धरोहर मानते हैं। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक इमारत का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाना चाहिए। लोगों की मांग है कि इस जगह पर एक आधुनिक पुस्तकालय की स्थापना की जाए। इससे न केवल जहानाबाद की यह ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रहेगी, बल्कि जिले के युवाओं और छात्रों को पढ़ने के लिए एक बेहतर स्थान भी मिल सकेगा।
वास्तुकला का शानदार नमूना
अजीज मेमोरियल हॉल की बनावट आज भी लोगों को आकर्षित करती है। करीब 99 साल पहले तैयार की गई इस बिल्डिंग के आर्किटेक्चर को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय भी बेहतरीन इंजीनियरिंग का कार्य किया जाता था। आज भी इसकी दीवारें और छतें काफी मजबूत और जीवंत दिखाई देती हैं। खिड़कियों का डिजाइन और पूरी इमारत की बनावट इसकी सुंदरता को और भी बढ़ा देती है, जो उस जमाने के बेहतरीन कारीगरी का जीता-जागता उदाहरण है।
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