हिमाचल में कुदरत का रौद्र रूप
हिमाचल प्रदेश में इस बार मॉनसून अपने साथ भारी तबाही लेकर आया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रही मूसलाधार बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं ने बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग और स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर द्वारा जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से शुरू हुए इस मॉनसून सीजन में अब तक स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कुल 157 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें से 68 लोगों ने प्राकृतिक आपदाओं के कारण दम तोड़ा है, जबकि 89 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है।
जिलेवार मौतों का विवरण
राज्य के विभिन्न जिलों में हुई मौतों के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति चिंताजनक है। आपदा और सड़क हादसों को मिलाकर जिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:
- चंबा में 24 मौतें
- कांगड़ा में 21 मौतें
- कुल्लू में 21 मौतें
- शिमला में 20 मौतें
- लाहौल-स्पीति में 18 मौतें
- सिरमौर में 16 मौतें
- सोलन में 9 मौतें
- ऊना में 9 मौतें
- मंडी में 7 मौतें
- किन्नौर में 5 मौतें
- बिलासपुर में 4 मौतें
- हमीरपुर में 3 मौतें
इन घटनाओं के अतिरिक्त प्रदेश भर में 257 लोग घायल हुए हैं, जबकि 2 व्यक्ति अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
संपत्ति और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य की संपत्ति को भी जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 22 पक्के मकान और 94 कच्चे मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं। इसके अलावा 42 पक्के और 161 मकानों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। निजी संपत्ति के नुकसान की बात करें तो 13 दुकानें, 3 लेबर शेड्स और 217 पशुशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन घटनाओं में अब तक 201 पशु-पक्षी भी काल के गाल में समा गए हैं।
886 करोड़ का आर्थिक बोझ
सरकार द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार, राज्य को अब तक 886 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। इस वित्तीय क्षति में निजी घरों, दुकानों, फैक्ट्रियों, झोपड़ियों और गोशालाओं के नुकसान के साथ-साथ बागवानी और फसलों को हुई बर्बादी भी शामिल है। इसके अलावा, सरकारी विभागों के बुनियादी ढांचे को भी भारी चोट पहुंची है। इस नुकसान के दायरे में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, बिजली बोर्ड, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग शामिल हैं।
सड़क हादसों ने बढ़ाई मुश्किल
मॉनसून के दौरान होने वाली चुनौतियों में सड़क हादसे एक बड़ी वजह बनकर उभरे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीजन में सड़क दुर्घटनाओं के कारण 89 लोगों की जान गई है। सड़क सुरक्षा के लिहाज से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चंबा 15, कुल्लू 13, शिमला 12, मंडी 11, कांगड़ा 10 और सिरमौर 8 मौतों के साथ सूची में ऊपर हैं।
संकट का बड़ा दायरा
हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून ने भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड, बिजली गिरने, डूबने और पेड़ या चट्टानों के गिरने जैसी घटनाओं के माध्यम से लोगों के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सरकार राहत और बचाव कार्य में जुटी है, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं से राज्य के सामने पुनर्निर्माण और राहत की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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