बलूचिस्तान में स्वतंत्रता की गूंज
पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान एक ऐसा नासूर बन चुका है जिसे मिटाने की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। पाकिस्तानी सेना और वहां की हुकूमत की दमनकारी नीतियों के बावजूद इस संसाधन संपन्न क्षेत्र में आजादी की मांग हर दिन तेज होती जा रही है। बलूचिस्तान अब केवल विरोध तक सीमित नहीं है बल्कि उसने खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करते हुए अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया है। पूरे इलाके में जीवे आजाद बलूचिस्तान का नारा गूंज रहा है।
11 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व
बलूचिस्तान की लगभग 6 करोड़ की आबादी ने 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाया है। हालांकि पाकिस्तान इस क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है, लेकिन यहां के निवासियों ने इसे अपना वतन घोषित कर रखा है और वर्षों से पाकिस्तानी अत्याचार के विरुद्ध संघर्षरत हैं। लोगों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। इस विशेष दिवस पर बलूचिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रध्वज फहराए गए और राष्ट्रगान का गायन किया गया, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवपूर्ण बना रहा।
विविधतापूर्ण एकता का संदेश
इस स्वतंत्रता दिवस पर बलूचिस्तान में रहने वाले बलोच, पश्तून, हिंदू, सिख और ईसाई समेत सभी धर्मों के लोगों को एकजुटता के साथ बधाई दी गई। पाकिस्तानी हुकूमत ने इस जश्न को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं ठप कर दी थीं, लेकिन इसका वहां की जनता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा। बलोच नागरिकों ने शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के प्रशासनिक नियंत्रण को दरकिनार कर अपना राष्ट्रध्वज गौरव के साथ लहराया। जारी किए गए संदेशों में साफ कहा गया है कि बलूचिस्तान अब केवल प्रतीकात्मक उत्सव नहीं मना रहा, बल्कि विश्व समुदाय से अपनी राजनीतिक, राजनयिक, कानूनी और नैतिक स्वतंत्रता की आधिकारिक मान्यता की मांग कर रहा है।
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का दावा
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने विश्व मंच पर यह स्पष्ट अपील की है कि अब उन्हें पाकिस्तान का प्रांत न समझा जाए और न ही अंतरराष्ट्रीय पटल पर उन्हें पाकिस्तान के अधीन लिखा जाए। बलूचिस्तान की घोषणा है कि वे अपनी विदेश नीति, रक्षा प्रणाली, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के स्वामी स्वयं हैं। बलूचिस्तान की ओर से जल्द ही अपना पासपोर्ट, मुद्रा, स्वतंत्र मीडिया हाउस और अंतरराष्ट्रीय दूतावासों को क्रियाशील करने की योजना साझा की गई है। उनका लक्ष्य एक ऐसे नेतृत्व को संगठित करना है जो कब्जा करने वाली विदेशी ताकतों को परास्त कर सके।
आजादी के इतिहास की गहराई
11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने के पीछे ऐतिहासिक कारण है। वर्ष 1947 में जब ब्रिटिश भारत से जा रहे थे, तब 11 अगस्त 1947 को ही बलूचिस्तान ने अपनी आजादी की घोषणा की थी। उस समय मोहम्मद अली जिन्ना ने भी इसे स्वीकार किया था, लेकिन बाद में कूटनीतिक छल का प्रयोग करते हुए इस क्षेत्र को पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। बलूचिस्तान के लोगों ने इस विलय को कभी मन से स्वीकार नहीं किया। उनका दावा है कि बलूचिस्तान का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है, जिसमें सिकंदर, मुगल और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष की गाथाएं दर्ज हैं।
सैनिक शक्ति और लोकतंत्रीय व्यवस्था
बलूचिस्तान ने अपना संविधान भी तैयार कर लिया है, जो एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की नींव रखता है। बलूचिस्तान का कहना है कि उनके पास पाकिस्तान की तुलना में कहीं अधिक मजबूत सैन्य क्षमता है। मौजूदा सैन्य आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र की विशालता को देखते हुए पांच लाख सैनिकों की एक प्रशिक्षित सेना तैयार करने की योजना है। पाकिस्तान के पास हजारों टैंक और लड़ाकू विमान होने के बावजूद, बलूचिस्तान की लड़ाकू क्षमता और मानसिक দৃঢ়ता को अधिक बेहतर बताया जा रहा है।
पाबंदी के बीच जश्न की मिसाल
पाकिस्तानी सेना ने जश्न को कुचलने के लिए कलात, क्वेटा और खुजदार सहित कई इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी थी। पुलिस स्टेशनों और सैन्य छावनियों के चारों ओर गहरी खाइयां खोदी गईं और आसमान में वायुसेना के विमान, ड्रोन और हेलीकॉप्टर गश्त लगाते रहे। तोपों और बंदूकों के साये में भी बलूचिस्तान के लोग आजादी का जश्न मनाते रहे। इंटरनेट बंद होने के कारण कम ही वीडियो और तस्वीरें बाहर आ सकीं, लेकिन जो भी प्रमाण सामने आए, वे पाकिस्तानी प्रशासन की विफलता को दर्शाने के लिए पर्याप्त हैं। अब बलूचिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोप, आसियान और अन्य वैश्विक मंचों से अपनी चुप्पी तोड़ने और बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की पुरजोर अपील की है।
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