कुदरत के आगे बेबस हुआ ड्रैगन
प्रकृति जब अपना विकराल रूप दिखाती है, तो दुनिया की बड़ी-बड़ी तकनीकें और वैज्ञानिक प्रगति भी उसके सामने घुटने टेकती नजर आती है। वर्तमान में चीन एक ऐसे ही भीषण प्राकृतिक संकट का सामना कर रहा है। 'डॉल्फिन' नाम के टाइफून ने चीन के उस शहर को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसे आधुनिक विज्ञान और तकनीक का वैश्विक केंद्र माना जाता है। पूर्वी चीन में इस तूफान ने जिस तरह की तबाही मचाई है, उसने साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं किसी भी उन्नत ढांचे को ध्वस्त कर सकती हैं।
शंघाई में 150 साल की सबसे भयावह बारिश
इस आपदा का सबसे घातक असर शंघाई शहर पर पड़ा है। यहां की बारिश के आंकड़े ने बीते 150 सालों का पुराना इतिहास पलट दिया है। शहर में हुई मूसलाधार बारिश ने सड़कों को नदियों में तब्दील कर दिया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि शंघाई अब वेनिस की तरह दिखाई देने लगा है, जहाँ घरों के बाहर पानी का सैलाब बह रहा है। मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, शहर में 24 घंटे की अवधि में इतनी बारिश दर्ज की गई, जो पिछले डेढ़ दशक में अभूतपूर्व है। कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में एक दिन में 220 मिलीमीटर बारिश का दावा किया गया है, जो शंघाई के मौसम इतिहास के सबसे बारिश वाले दिनों में दर्ज हो गई है।
तूफान का सफर और वर्तमान स्थिति
यह विनाशकारी तूफान 'डॉल्फिन' 9 अगस्त को झेजियांग प्रांत के युहुआन के करीब तट से टकराया था। उस समय हवा की रफ्तार 42 मीटर प्रति सेकंड यानी करीब 151 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। हालांकि, अब यह तूफान थोड़ा कमजोर पड़कर एक उष्णकटिबंधीय तूफान के रूप में तब्दील हो चुका है, लेकिन इसका असर अभी समाप्त नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि झेजियांग, जियांग्सू और शंघाई जैसे प्रांतों में बुधवार तक लगातार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से घरों के भीतर रहने और सभी आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सख्त अपील की है।
शहरी नियोजन और बाढ़ का संकट
शंघाई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में इस स्तर की बारिश सामान्य नहीं मानी जाती है। यहां कंक्रीट के बड़े जंगल और सड़कों की अधिकता के कारण पानी जमीन में सोख नहीं पाता, जिससे जल निकासी की गंभीर समस्या पैदा होती है। सड़कों और नदियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण शहरी बाढ़ का खतरा और अधिक बढ़ गया है। भविष्य के लिए भी मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में प्रभावित इलाकों में 200 से 400 मिलीमीटर तक और बारिश हो सकती है, जो स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।
बचाव अभियान और व्यापक विस्थापन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। केवल शंघाई से रविवार शाम तक लगभग 2 लाख 15 हजार 600 लोगों को उन इलाकों से निकाला गया जो बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील थे। शुरुआत में यह अनुमान 30 हजार के आसपास था, लेकिन खतरे को बढ़ता देख निकासी के दायरे को बढ़ा दिया गया। परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। शहर के दोनों प्रमुख हवाई अड्डों से 1300 से अधिक उड़ानों को रद्द करना पड़ा है, बंदरगाहों को बंद कर दिया गया है और रेलवे स्टेशनों पर पानी भरने के कारण रेल यातायात भी बुरी तरह प्रभावित है।
पूर्वी चीन में बड़े पैमाने पर राहत कार्य
इस आपदा के कारण पूरे पूर्वी चीन में 10 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। अकेले झेजियांग प्रांत में 9 लाख से ज्यादा लोगों को विस्थापित किया गया है और उनकी मदद के लिए 1500 से अधिक आपातकालीन राहत शिविर खोले गए हैं। फुजियान में भी करीब 99 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए हैं। अधिकारियों ने लेवल 1 की चेतावनी जारी की थी और जलाशयों, पहाड़ी नालों और निर्माण स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी है। उल्लेखनीय है कि चीन से पहले यह तूफान जापान के ओकिनावा क्षेत्र से भी गुजरा था, जहां हजारों इमारतों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे।
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