अमिताभ दास का सावन में खान-पान और चर्चा
हिंदू धर्म में सावन का महीना अत्यंत पवित्र और धार्मिक महत्व वाला माना जाता है। इस दौरान भक्त भगवान शिव की उपासना करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार कड़े नियमों का पालन करते हैं। कई श्रद्धालु इस महीने में प्याज और लहसुन तक का त्याग कर देते हैं और पूर्णतः शाकाहारी भोजन करते हैं। हालांकि, बिहार के पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ दास इन मान्यताओं से इत्तेफाक नहीं रखते। वह सावन के दौरान भी मांसाहार के सेवन को लेकर खुलकर अपनी बात रखते हैं, जो अक्सर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाता है।
कौन हैं अमिताभ दास?
अमिताभ दास बिहार कैडर के एक चर्चित पूर्व पुलिस अधिकारी रहे हैं। अपनी सेवा के कार्यकाल के दौरान भी वह अपने बेबाक अंदाज और कड़े तेवरों के लिए जाने जाते थे। पुलिस विभाग में रहते हुए भी वह कई बार विवादों के केंद्र में रहे। लंबे समय तक प्रशासनिक निलंबन झेलने के बाद अगस्त 2018 में उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति यानी कंपलसरी रिटायरमेंट दे दी गई थी। नौकरी से बाहर होने के बाद भी उनका चर्चाओं में बने रहने का सिलसिला थमा नहीं है। वह आज भी सार्वजनिक मुद्दों पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राय मजबूती से रखते हैं।
नास्तिकता और विचारधारा
अमिताभ दास ने कई मीडिया साक्षात्कारों में यह स्पष्ट किया है कि वह 'घोर नास्तिक' हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि वह ईश्वर या धार्मिक आस्था के बजाय तर्क, विज्ञान और अपनी निजी सोच को सर्वोपरि रखते हैं। उनके अनुसार, धार्मिक परंपराएं पूरी तरह से व्यक्तिगत विश्वास का मामला हैं और उन पर किसी भी तरह की बंदिशें नहीं होनी चाहिए। वह अक्सर उल्लेख करते हैं कि वह बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी जैसे विचारकों को अपना आदर्श मानते हैं। उनकी नास्तिकता केवल विचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने दैनिक जीवन और खान-पान के फैसलों में भी इसे झलकाते हैं।
क्यों मचा है सावन में चिकन खाने पर बवाल?
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए देश भर में मांस-मदिरा का सेवन न करने की परंपरा रही है। ऐसे माहौल में जब कोई सार्वजनिक पद पर रहे व्यक्ति सावन में चिकन खाने जैसी बात का समर्थन करता है, तो लोग स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रिया देते हैं। अमिताभ दास का तर्क है कि क्योंकि वह किसी भी धार्मिक मान्यता या भगवान की सत्ता में विश्वास नहीं रखते, इसलिए उनके लिए सावन के महीने में खान-पान पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उनका यह नजरिया एक तरफ जहां उनके समर्थकों को उनकी सच्चाई के रूप में दिखता है, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के बीच बहस को जन्म देता है। सोशल मीडिया पर उनके ये विचार अक्सर वायरल होते हैं और तीखी प्रतिक्रियाएं आमंत्रित करते हैं।
https://hindi.news18.com/news/bihar/patna-former-ips-officer-amitabh-das-eats-chicken-during-sawan-somwar-local18-10735747.html