विदेशों में बढ़ रही मखाने की चमक
बिहार के दरभंगा समेत अन्य क्षेत्रों से निकलने वाला मखाना अब वैश्विक बाजारों में अपनी धाक जमा रहा है। हाल ही में भारत से 7 मीट्रिक टन मखाना समुद्री मार्ग के जरिए कनाडा भेजा गया है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि मखाने की मांग अब भारत की सीमाओं को पार कर चुकी है। अमेरिका, कनाडा, दुबई और मलेशिया जैसे देशों में भारतीय मखाने को विशेष रूप से पसंद किया जा रहा है। इस बढ़ते अंतरराष्ट्रीय निर्यात के कारण स्थानीय किसान अब बड़े पैमाने पर मखाने की खेती करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत
पूर्णिया के आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर नंदकुमार मंडल के मुताबिक, मखाना पोषण का एक बेहतरीन खजाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मखाने के अंदर स्वास्थ्य के लिए जरूरी छह प्रमुख घटक मौजूद होते हैं, जिनमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, मिनरल्स, विटामिन और पानी शामिल हैं। इसके अलावा मखाने में एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे महत्वपूर्ण खनिज भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं
डॉक्टर मंडल ने मखाने को स्वास्थ्य के लिए एक रामबाण औषधि बताया है। उन्होंने कहा कि मखाने में उपलब्ध कैल्शियम और प्रोटीन शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने का काम करते हैं। इसके नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफा होता है। मखाने को जलीय फल की श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि इसका उत्पादन जल निकायों में होता है। हालांकि, जलीय कृषि होने के कारण इसके उत्पादन की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो सकती है और किसानों को इसमें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिल रहे बेहतर दाम किसानों को इस फसल की ओर आकर्षित कर रहे हैं। आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर मखाने की मांग और अधिक बढ़ने की प्रबल संभावना है, जो भारतीय किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी।
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