सागर में शिक्षा का संकट: उम्र की बंदिशों ने रोकी 24 हजार बच्चों की पढ़ाई

नई शिक्षा नीति के सख्त नियमों के चलते सागर जिले के हजारों छात्र स्कूल जाने से वंचित हो रहे हैं, जहां उम्र की सीमा पूरी न होने के कारण 24,000 बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

शिक्षा प्रणाली में बदलाव और छात्रों की परेशानी

शिक्षा के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति अब सागर जिले के हजारों छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि जिले के सरकारी स्कूलों से 24,000 बच्चे ड्रॉप आउट की श्रेणी में आ गए हैं। इन बच्चों में से एक बड़ा हिस्सा, जो करीब 35 प्रतिशत से भी अधिक है, केवल इसलिए स्कूल नहीं जा पा रहा है क्योंकि उनकी आयु नए निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। छात्र पढ़ाई करने के लिए इच्छुक हैं और स्कूल लौटना चाहते हैं, लेकिन नियमों की पेचीदगी उनके रास्ते में बाधा खड़ी कर रही है।

उम्र का बंधन और नौवीं कक्षा का संकट

विशेष रूप से कक्षा आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद जो छात्र नौवीं कक्षा में दाखिला लेना चाहते हैं, वे इस नीति से सबसे अधिक प्रभावित हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नौवीं कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 13 साल तय कर दी है। सागर जिले में 5,000 से अधिक ऐसे विद्यार्थी हैं जिनकी आयु अभी 13 साल पूर्ण नहीं हो पाई है। उम्र की इस शर्त के कारण इन छात्रों का स्कूल में पंजीयन संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य अनिश्चित हो गया है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए कई स्कूलों के प्राचार्यों ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। जिला शिक्षा अधिकारी अब वरिष्ठ स्तर पर माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल से संवाद कर रहे हैं ताकि इन बच्चों को प्रोविजनल स्वीकृति मिल सके और वे अपनी शिक्षा जारी रख सकें।

नई शिक्षा नीति के अनिवार्य मानक

शिक्षा नीति में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर जो नियम निर्धारित किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:

  • नर्सरी कक्षा के लिए 3 साल की आयु अनिवार्य है।
  • केजी-1 में प्रवेश हेतु 4 साल की आयु आवश्यक है।
  • केजी-2 में दाखिले के लिए 5 साल की उम्र तय है।
  • कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम 6 साल की आयु अनिवार्य की गई है।

इसी व्यवस्था के आधार पर, छात्र जब नौवीं कक्षा तक पहुँचते हैं, तो उनकी न्यूनतम आयु 13 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि, व्यवहारिक रूप से कई मामलों में छात्रों की उम्र इस मापदंड से कम या ज्यादा हो रही है, जिससे तकनीकी अड़चनें पैदा हो रही हैं और प्रवेश प्रक्रिया बाधित हो रही है।

स्कूलों से गायब होते छात्रों का आंकड़ा

जिला शिक्षा विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कक्षा आठवीं से 12वीं तक विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है। कुल 18,809 विद्यार्थी इस वर्ष कम हुए हैं। कक्षाओं के अनुसार ड्रॉप आउट का विवरण इस प्रकार है:

  • कक्षा 8वीं में 4,769 विद्यार्थी कम हुए हैं।
  • कक्षा 9वीं में 4,754 विद्यार्थी कम हुए हैं।
  • कक्षा 10वीं में 5,889 विद्यार्थी कम हुए हैं।
  • कक्षा 11वीं में 1,462 विद्यार्थी कम हुए हैं।
  • कक्षा 12वीं में 1,935 विद्यार्थी कम हुए हैं।
  • इसके अतिरिक्त, सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 में 576 और कक्षा 5वीं में 1,448 बच्चे कम दर्ज किए गए हैं।

शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया और उम्मीदें

सागर के जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने स्पष्ट किया कि यह मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि जो बच्चे आठवीं पास करते हैं, उनका एमपी बोर्ड में रजिस्ट्रेशन होता है, जिसके लिए 13 वर्ष से अधिक की आयु अनिवार्य है। उम्र कम होने के कारण नामांकन में आ रही दिक्कतों को हल करने के लिए विभाग सक्रिय है। अरविंद जैन के अनुसार, पिछले साल भी ऐसी ही समस्या सामने आई थी, जिसे स्कूल शिक्षा विभाग की कमिश्नर के माध्यम से वरिष्ठ कार्यालय में भेजकर तत्काल अप्रूवल प्राप्त किया गया था। इस बार भी शिक्षा विभाग का प्रयास है कि नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त होने से पहले इन विद्यार्थियों को राहत दी जाए ताकि उनकी पढ़ाई का नुकसान न हो और वे अपनी कक्षा में प्रवेश ले सकें।

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