भोपाल: बारिश की परवाह किए बिना मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बदली प्रोटोकॉल की परंपरा, बुलेट पर सवार होकर तिरंगा यात्रा में हुए शामिल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में 'हर घर तिरंगा' अभियान का आगाज अपने अनोखे अंदाज में किया। भारी बारिश के बावजूद वे बुलेट चलाकर यात्रा में शामिल हुए और रास्ते में बच्चों के साथ संवाद करते नजर आए।

भोपाल में तिरंगे के साथ मुख्यमंत्री का विशेष जुड़ाव

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐसा नजारा पेश किया, जिसने न केवल आम नागरिकों का दिल जीत लिया, बल्कि युवाओं में राष्ट्रभक्ति का संचार भी किया। 'हर घर तिरंगा' अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी निवास पर ध्वजारोहण किया। इसके बाद वे पूरी तरह से एक अलग अंदाज में दिखे। वे सुरक्षा प्रोटोकॉल को पीछे छोड़ते हुए खुद बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर तिरंगा यात्रा के लिए निकल पड़े। उनकी मंजिल टीटी नगर स्टेडियम थी, जहां राष्ट्रगान के साथ आधिकारिक कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया जाना था। इस पूरी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का सरल और आम जनता से जुड़ा हुआ व्यवहार लोगों के बीच मुख्य चर्चा का विषय बना रहा।

बुलेट की सवारी और बारिश का संकल्प

तिरंगा यात्रा के दौरान जब बारिश ने जोर पकड़ लिया, तब भी मुख्यमंत्री के कदमों में कोई कमी नहीं आई। बारिश की बूंदों के बीच जब वे बुलेट चला रहे थे, तो वहां का दृश्य बेहद उत्साहजनक था। मुख्यमंत्री के लिए यह कार्यक्रम महज एक सरकारी औपचारिकता नहीं थी, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने का एक माध्यम था। बारिश के बावजूद उन्होंने युवाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना जारी रखा। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना अपने वाहन को बीच रास्ते में रोका और बच्चों से बातचीत की। उन्होंने कई बच्चों को अपने हाथों से तिरंगा भेंट किया। उनका यह सहज और मिलनसार व्यक्तित्व देखकर वहां मौजूद लोग काफी प्रभावित हुए। तिरंगे का लहराना और बारिश का माहौल, ये दोनों दृश्य इस यात्रा को यादगार बनाने के लिए काफी थे।

बच्चों के साथ यादगार बातचीत

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बच्चों के साथ संवाद इस पूरी यात्रा का सबसे भावुक क्षण रहा। जब उन्होंने बच्चों से कहा कि बारिश में वे भीग जाएंगे और उन्हें परेशानी हो सकती है, तो बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ जवाब दिया कि उन्हें बारिश में भीगने में बहुत आनंद आ रहा है। बच्चों के इस निर्भीक और जोशीले अंदाज को देखकर मुख्यमंत्री खुद को रोक नहीं पाए और उनके साथ पैदल चलने का फैसला किया। मुख्यमंत्री का युवाओं और बच्चों के साथ इस तरह घुलना-मिलना सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने साबित कर दिया कि नेतृत्व का अर्थ केवल मंच से भाषण देना नहीं है, बल्कि जनमानस के बीच जाकर उनके साथ खड़े होना है।

हर घर तिरंगा अभियान को बनाया जन-आंदोलन

टीटी नगर स्टेडियम पहुंचने से पहले, मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को इस अभियान के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि 'हर घर तिरंगा' अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप देना जरूरी है। उनके अनुसार, तिरंगा केवल एक कपड़ा या ध्वज नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की एकता, गौरव, अखंडता और करोड़ों हिंदुस्तानियों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण के कार्यों में अधिक सक्रियता से भाग लेने की अपील की। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब आज का युवा अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखेगा, तभी मध्य प्रदेश और पूरा भारत विकास की नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा।

युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश

भोपाल की सड़कों पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह अनूठा प्रदर्शन युवाओं को एक बड़ा संदेश दे गया। यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति किसी भी तरह के औपचारिक आयोजनों या मौसम की मोहताज नहीं होती है। यदि मन में राष्ट्र के लिए समर्पण का भाव हो, तो भारी बारिश भी रास्ते की बाधा नहीं बनती। उन्होंने अपने व्यवहार से यह दिखाया कि कैसे प्रोटोकॉल को दरकिनार कर एक नेता जनता के बीच पहुंचकर उनका हौसला बढ़ा सकता है। मुख्यमंत्री की यह तिरंगा यात्रा स्पष्ट करती है कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान है और इसी के प्रति समर्पण आज के नए भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।

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