सीसीटीवी सुरक्षा और निजता का पेचीदा सवाल
आज के दौर में सीसीटीवी कैमरा न केवल एक सुरक्षा उपकरण है, बल्कि यह सुरक्षा का एक अहम हिस्सा बन चुका है। अपने घर या कार्यस्थल की सुरक्षा के लिए कैमरे लगाना आजकल हर किसी की प्राथमिकता है। हालांकि, जब बात किराये के घरों या फ्लैटों की आती है, तो स्थिति थोड़ी जटिल हो जाती है। विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में, जहां किराये पर घर लेना और देना एक सामान्य प्रक्रिया है, वहां मकान मालिक और किरायेदार के बीच सीसीटीवी कैमरों को लेकर कई विवाद सामने आते रहते हैं। क्या मकान मालिक के पास यह अधिकार है कि वह बिना किरायेदार की सहमति के उसके फ्लैट के सामने या प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी लगवा दे? आइए इस पूरे मामले को भारतीय कानून और अदालती फैसलों की रोशनी में समझते हैं।
मकान मालिक का अधिकार और उसकी सीमाएं
यह सच है कि मकान मालिक को अपनी संपत्ति की सुरक्षा करने का पूरा अधिकार है। वह अपनी प्रॉपर्टी को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठा सकता है, जिसमें सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल शामिल है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है। यदि मकान मालिक कॉमन कॉरिडोर, बालकनी या ऐसी किसी जगह पर कैमरा लगवाता है जो किरायेदार की निजता में सीधा दखल देती है, तो यह कानूनी विवाद का कारण बन सकता है। मकान मालिक को यह साबित करना होगा कि कैमरा लगाने का उद्देश्य केवल सुरक्षा है और यह किसी की निजी जिंदगी में तांक-झांक करने के इरादे से नहीं लगाया गया है। यदि कैमरे का फोकस सीधे किरायेदार के मुख्य दरवाजे के अंदर या उनके व्यक्तिगत दायरे में है, तो यह गंभीर आपत्ति का विषय बन जाता है।
निजता का अधिकार और सुप्रीम कोर्ट का रुख
भारत में निजता के अधिकार को लेकर कानून काफी स्पष्ट है। वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट किया था कि निजता का अधिकार एक व्यक्ति के जीवन जीने के मौलिक अधिकारों में से एक है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा माना गया है। इसके अलावा, कलकत्ता हाईकोर्ट का भी एक फैसला इस संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण है। एक मामले में मकान मालिक ने कुल 15 सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे, जिनमें से 5 कैमरे विशेष रूप से किरायेदार के घर की निगरानी के लिए थे। इस मामले में अदालत ने किरायेदार के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि कुछ कैमरों की स्थिति सीधे तौर पर किरायेदार की प्राइवेसी का उल्लंघन कर रही है, भले ही मकान मालिक ने इसके लिए अनुमति लेने का दावा किया हो।
किरायेदार के कानूनी अधिकार
किरायेदार के पास भी कानून के तहत कई अधिकार सुरक्षित हैं। 'ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882' की धारा 108सी किरायेदार को यह अधिकार देती है कि वह मकान मालिक की संपत्ति पर शांति और सुकून के साथ रह सके। मकान मालिक किरायेदार की इस शांति में बाधा नहीं डाल सकता। वहीं, अगर कोई व्यक्ति किसी की सहमति के बिना उनकी निजी जगह की फोटो खींचता है या वीडियो बनाता है, तो 'आईटी एक्ट 2000' की धारा 66 ई के तहत यह एक दंडनीय अपराध है। इस धारा के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल या 2 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसलिए, मकान मालिक को यह नहीं सोचना चाहिए कि संपत्ति का मालिक होने के नाते उन्हें कहीं भी निगरानी करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
विवादों से कैसे बचें
अगर आपके मकान मालिक ने बिना आपकी अनुमति के सीसीटीवी कैमरा लगाया है, तो सबसे पहले उनसे विनम्रतापूर्वक बात करें। उन्हें अपनी प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं के बारे में बताएं। यदि वे आपकी बात नहीं मानते हैं, तो आप रेंट एग्रीमेंट की शर्तों की समीक्षा कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर स्थानीय कानूनी सलाह ले सकते हैं। सुरक्षा और प्राइवेसी के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। मकान मालिक और किरायेदार दोनों को यह समझना चाहिए कि सीसीटीवी का उद्देश्य अपराध को रोकना होना चाहिए, न कि एक-दूसरे पर नजर रखना। कानून स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है और किसी की भी निगरानी बिना किसी ठोस सुरक्षा आधार के नहीं की जानी चाहिए।
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