कीव पर रात में ताबड़तोड़ मिसाइल हमला
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, 7 और 8 अगस्त की रात रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को निशाना बनाकर भीषण हवाई हमले किए। रूसी सेना ने इस हमले में 6 इस्कंदर-M बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग किया। हमले की शुरुआत रात के लगभग पौने एक बजे हुई, जिसके बाद महज 15 मिनट के अंतराल में पांच और मिसाइलें दागी गईं। इन हमलों से कीव के कई रिहायशी इलाकों में भारी तबाही हुई। ब्रोवरी क्षेत्र में एक बच्चे समेत उसके दादा-दादी की मौत की दुखद खबर सामने आई है। विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि शहर के कई हिस्सों में आग लग गई और कई इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं। राहत और बचाव दल अभी भी मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। एक मिसाइल उस फैक्ट्री के करीब गिरी जहाँ कर्मचारी बंकरों में अपनी जान बचाने के लिए छिपे हुए थे।
हमले के बीच कर्मचारियों ने ऐसे बचाई जान
कीव के एक वेयरहाउस में कार्यरत कर्मचारी मिखाइल हुकोव ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि जैसे ही एयर रेड सायरन बजा, उन्हें बैलिस्टिक मिसाइल हमले के गंभीर खतरे का एहसास हो गया था। उन्होंने तुरंत अपने सहयोगियों के ग्रुप में संदेश भेजा और सभी को तत्काल सुरक्षित आश्रय स्थलों में जाने का निर्देश दिया। हुकोव के अनुसार, कुछ कर्मचारी अपने व्यक्तिगत सामान और बैग लेने के लिए वापस जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें दृढ़ता से रोक दिया गया। जैसे ही वे सुरक्षित बंकर में पहुंचे, भीषण धमाके हुए जो वेयरहाउस के बिल्कुल नजदीक थे।
एक धमाके में ट्रक जल गया, भागकर बची जान
ट्रक चालक इवान ब्रागा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह अपनी कैब के अंदर ही थे, तभी एक जोरदार विस्फोट हुआ। आग की लपटों ने पल भर में उनके ट्रक को अपनी चपेट में ले लिया। पास खड़े अन्य वाहनों में भी भीषण आग लग गई। ब्रागा के पास अपने जरूरी दस्तावेज या सामान निकालने तक का वक्त नहीं था। वे सिर्फ अपने पास रखे कपड़ों का एक बैग लेकर जान बचाकर बाहर निकलने में कामयाब रहे। आग की तीव्र गर्मी के कारण उन्हें अपनी पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर जलन के निशान मिले हैं।
रूस ने हमले में S-400 का भी इस्तेमाल किया?
सामरिक जानकारों के अनुसार, इस हमले में रूस ने केवल बैलिस्टिक मिसाइलों का ही नहीं, बल्कि S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से दागी जाने वाली मिसाइलों का भी प्रयोग किया। सामान्यतः S-400 का उपयोग रक्षात्मक कार्यों के लिए होता है, लेकिन इसका आक्रामक इस्तेमाल रूस की बदली रणनीति को दर्शाता है। इसके अलावा, गेरान सीरीज के ड्रोन्स ने भी हमले में प्रमुख भूमिका निभाई। आंकड़ों के मुताबिक, रूस ने इस दौरान कुल 151 ड्रोन, 6 इस्कंदर-M बैलिस्टिक मिसाइलें और S-400 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन ने 135 ड्रोन्स को नष्ट करने का दावा किया, हालांकि रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में यूक्रेनी एयर डिफेंस को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
क्या यूक्रेन की मिसाइल रोकने की क्षमता घटी?
जुलाई के आंकड़े इस चिंता को और बढ़ाते हैं। पिछले महीने रूस ने यूक्रेन पर 195 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से यूक्रेनी सेना केवल 29 को ही मार गिराने में सफल रही, जिसका अर्थ है कि इंटरसेप्शन रेट मात्र 14 फीसदी रहा। इसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या यूक्रेन के पास मौजूद पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की संख्या अब नाकाफी है। हालांकि, ऐसी भी चर्चाएं हैं कि यूक्रेन ने कुछ रक्षा प्रणालियों को विशेष रूप से राष्ट्रपति महल की सुरक्षा के लिए आरक्षित रखा है।
8 यूक्रेनी प्रांतों में हमलों का दावा
रूस के हमलों का असर राजधानी तक सीमित नहीं रहा। 7-8 अगस्त की रात यूक्रेन के आठ विभिन्न प्रांतों में तबाही की सूचना मिली:
- जापोरिज्जिया: 3 लोगों की मौत और 4 घायल।
- खारकीव: 2 लोगों की मृत्यु और 7 घायल।
- सुमी: 19 लोग घायल हुए।
- डोनेस्क: 1 व्यक्ति की मौत और 15 घायल।
- खेरसान: 2 लोगों की जान गई और 26 घायल।
- ओडेसा: एक फुटबॉल स्टेडियम पूरी तरह क्षतिग्रस्त।
- नेप्रोपेट्रोवस्क: ड्रोन हमले में 1 व्यक्ति घायल।
खारकीव में सड़कों के ऊपर लगी 'मच्छरदानी'
खारकीव में हालात इतने विकट हैं कि लोगों ने सुरक्षा के लिए अनूठे उपाय अपना लिए हैं। सड़कों के ऊपर एंटी-ड्रोन नेट लगाए गए हैं जो देखने में मच्छरदानी जैसे लगते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य रूसी ड्रोन्स को वाहनों और राहगीरों तक पहुँचने से रोकना है। इरिना नामक एक स्थानीय निवासी ने बताया कि लोग इन तमाम मुश्किलों के बीच भी सामान्य जीवन जीने का संघर्ष कर रहे हैं और शांति का इंतजार कर रहे हैं।
आखिर इतनी खतरनाक क्यों है इस्कंदर-M मिसाइल?
इस्कंदर-M एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है जिसकी मारक क्षमता 500 किलोमीटर तक है। इसकी विशेषता यह है कि यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है। मोबाइल लॉन्चर से दागे जाने के कारण इसे ट्रैक करना और जवाबी हमला करना काफी कठिन है।
काला सागर में 3 जहाजों पर हमले का दावा
समुद्री मोर्चे पर, रूस ने ओडेसा पोर्ट के निकट यूक्रेन के तीन कार्गो जहाजों को गेरान-4 ड्रोन्स से निशाना बनाने का दावा किया है। रूस का आरोप है कि इन जहाजों के जरिए NATO देशों से मिलने वाले हथियारों की तस्करी की जा रही थी। आधुनिक सेंसर और एंटी-जैमिंग तकनीक से लैस गेरान-4 की रेंज 450 से 500 किलोमीटर है।
यूक्रेन भी रूस की 'शैडो फ्लीट' पर कर रहा हमला
जवाब में, यूक्रेन ने भी अपनी समुद्री रणनीति आक्रामक रखी है। जुलाई में 'ऑपरेशन मोलोच्का' के तहत यूक्रेन ने रूस की 'शैडो फ्लीट' के खिलाफ 218 ड्रोन हमले किए हैं। इनमें से 134 हमले अजोव सागर में और 84 हमले काला सागर में अंजाम दिए गए।
ड्रोन वॉर में हो रहे हैं नए तरह के प्रयोग
रूस ने युद्धक्षेत्र में 'वुर्डलाक' नामक हेक्साकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है। यह ड्रोन 15 किलो तक का भार 30 किलोमीटर की दूरी तक ले जाने में सक्षम है। यह चार अलग-अलग नेविगेशन नेटवर्क (GPS, गैलीलियो, आदि) का उपयोग करता है, जिससे सिग्नल जाम होने का इस पर असर नहीं पड़ता।
यूक्रेनी ड्रोन ठिकानों पर FAB-500 बम से हमले का दावा
रूस ने डोनेस्क के डोब्रोपिलिया इलाके में यूक्रेनी ड्रोन ठिकानों को खुफिया जानकारी के आधार पर FAB-500 बमों से नष्ट करने का दावा किया है।
रूस ने यूक्रेनी पूर्व सैनिकों की नई ब्रिगेड बनाई?
एक चौंकाने वाली रिपोर्ट यह है कि रूस ने 'फर्स्ट यूक्रेनियन स्पेशल परपज वॉलंटियर ब्रिगेड' का गठन किया है, जिसमें युद्ध के दौरान पकड़े गए यूक्रेनी सैनिकों को शामिल किया गया है। इसमें मैक्सिम क्रिवोनोस, ओलेक्सी बेरेस्ट जैसे कई दस्तों को एकीकृत किया गया है।
जेलेंस्की पहुंचे सर्बिया, मदद की तलाश?
राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का सर्बिया दौरा काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि एयर डिफेंस की भारी कमी के कारण वे उन देशों से मदद मांग रहे हैं जो अब तक रूस के साथ संतुलन बनाए हुए थे।
अब NATO की सीमा पर बढ़ी हलचल
सबसे बड़ा वैश्विक सवाल NATO की भूमिका है। अमेरिकी रिपोर्टों में अंदेशा जताया गया है कि 2029 तक रूस NATO देशों के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। बुल्गारिया में ड्रोन गिरने की घटना और रोमानिया की सीमा पर F-35 फाइटर जेट्स की ड्रिल इस तनाव की बानगी है।
एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया हैं अगला टारगेट?
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल्टिक देश (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) रूस के लिए रणनीतिक रूप से संवेदनशील हैं। सुवालकी कॉरिडोर पर नियंत्रण के जरिए रूस इन देशों की यूरोप से कनेक्टिविटी तोड़ सकता है।
NATO से भिड़ंत हुई तो क्या होगा?
टिप्पणीकार लैरी जॉनसन का कहना है कि अप्रत्यक्ष रूप से तो NATO पहले ही इस युद्ध का हिस्सा है। यदि यह सीधा संघर्ष बनता है, तो रूस की प्रतिक्रिया बहुत व्यापक और विनाशकारी हो सकती है। हालांकि, रूस ने बार-बार कहा है कि उसकी किसी भी NATO देश पर हमला करने की कोई योजना नहीं है। वर्तमान स्थिति में तनाव चरम पर है और दुनिया इस जंग के फैलने के खतरे को लेकर चिंतित है।
https://www.indiatv.in/world/europe/is-russia-really-planning-an-attack-on-nato-explaining-the-rising-tensions-after-kyiv-missile-strikes-2026-08-08-1236155