धार्मिक नगरी उज्जैन में महाकाल का विशेष प्रसाद
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन न केवल अपने महाकालेश्वर मंदिर के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है, बल्कि यहां की अनूठी परंपराएं भी भक्तों को आकर्षित करती हैं। भक्त जब बाबा महाकाल के दर्शन करने आते हैं, तो वे लड्डू, चना और चिरौंजी के साथ-साथ एक और खास चीज का स्वाद लेना नहीं भूलते। वह है यहां की प्रसिद्ध भांग। इसे यहां केवल एक नशीले पदार्थ के रूप में नहीं, बल्कि बाबा महाकाल के प्रसाद के रूप में देखा और ग्रहण किया जाता है। दूध, मेवों और दर्जनों मसालों के अनोखे मेल से तैयार होने वाली यह ठंडाई अपनी खुशबू और स्वाद की वजह से देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पहचान बना चुकी है।
75 साल पुरानी दुकान और भांग का बढ़ता क्रेज
उज्जैन के गोपाल मंदिर के समीप एक दुकान है, जो पिछले 75 वर्षों से अपनी सेवा दे रही है। यह दुकान महाकाल के भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यहां रोजाना लगभग 10 से 15 किलो भांग की खपत होती है। शिवरात्रि, होली और विशेष रूप से सावन के पवित्र महीने के दौरान यहां भांग प्रेमियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। दुकान के मालिक रमेश शर्मा बताते हैं कि सावन के दौरान यहां भांग की मांग सामान्य दिनों की तुलना में 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। भक्त न केवल खुद इसका सेवन करते हैं, बल्कि इसे अपने रिश्तेदारों और परिजनों के लिए पैक करवाकर दूर-दूर तक ले जाते हैं।
विभिन्न प्रकार के व्यंजन और मसालों का जादू
इस दुकान पर मिलने वाली ठंडाई साधारण नहीं होती। इसे कई प्रकार के गुप्त मसालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसके अलावा, यहां भांग के अन्य कई रूप भी उपलब्ध हैं। फलों के रस, दूध, दही, रबड़ी और छाछ के साथ मिलाकर तैयार की गई भांग की ठंडाई हर किसी को भाती है। इसके अलावा, यहाँ ग्राहकों को भांग से बनी गोली, गुलकंद और भांग की पुड़िया जैसे कई व्यंजन भी मिलते हैं। श्री महाकाल भांग घोटा के नाम से मशहूर यह दुकान अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती है।
औषधीय गुणों के पीछे की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव स्वयं भांग का उपयोग औषधि के रूप में करते थे। दुकान के मालिक रमेश शर्मा का कहना है कि यदि भांग का सेवन सही मात्रा में और पारंपरिक तरीके से किया जाए, तो यह शरीर के लिए फायदेमंद हो सकती है। उनके अनुसार, यह पाचन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करती है और शरीर को कई तरह की बीमारियों से दूर रखने में सहायक है।
सावधानी है जरूरी
हालांकि, रमेश शर्मा चेतावनी देते हैं कि भांग का सेवन सावधानी के साथ करना चाहिए। यदि इसे नशे की मंशा से या बहुत अधिक मात्रा में ग्रहण किया जाए, तो यह सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। जो लोग पहली बार इसका सेवन कर रहे हैं, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। औषधीय लाभ तभी मिलता है जब इसे प्रसाद की मर्यादा और संयमित मात्रा में लिया जाए। सीमित मात्रा में और पारंपरिक विधि से तैयार की गई यह भांग महाकाल की नगरी उज्जैन की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जिसे भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ स्वीकार करते हैं।
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