इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक अत्यंत विचलित करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के बड़ा मलहरा सिविल अस्पताल की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एक महिला के शव को सम्मान के साथ अस्पताल से ले जाने के बजाय उसे कचरा ढोने वाली गाड़ी में ले जाया गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शव वाहन की कमी बनी बड़ी समस्या
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़ा मलहरा के सिविल अस्पताल में शव को ले जाने के लिए उचित वाहन की व्यवस्था नहीं थी। मृतक महिला की पहचान रुखसाना के रूप में हुई है, जो बबले अहिरवार की पत्नी थी। थाना प्रभारी रीता सिंह ने बताया कि उन्हें सूरजपुरा रोड पर शव मिला था। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल प्रशासन से शव वाहन की गुहार लगाई थी, लेकिन उन्हें न तो शव वाहन मुहैया कराया गया और न ही कोई एंबुलेंस दी गई। विवश होकर परिजनों को सरकारी कचरा ढोने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली का सहारा लेना पड़ा, जिस पर स्पष्ट रूप से नगर परिषद बड़ामलहरा अंकित था। यह स्थिति दर्शाती है कि मृतक के प्रति प्रशासन का रवैया कितना संवेदनहीन रहा है।
प्रशासन के दावों की खुली पोल
यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में शव वाहन के लिए ड्राइवर को वेतन भी दिया जा रहा है और वाहन की सुविधा भी स्वीकृत है, इसके बावजूद परिजनों को दर-दर भटकना पड़ा। परिजनों ने इस घटना को मृत शरीर का अपमान बताया है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी है, जिससे जिले की प्रशासनिक साख को बड़ा धक्का लगा है।
अधिकारियों ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी CMHO राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने मामले में दखल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना को लेकर संबंधित ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी BMO से फोन पर बात की गई है। CMHO ने बताया कि बीएमओ ने सफाई देते हुए इसे नगर निगम का वाहन बताया है। फिलहाल, CMHO ने बड़ा मलहरा BMO से इस संबंध में लिखित जवाब तलब किया है।
अधिकारियों का दावा है कि प्रशासन की ओर से जिला मुख्यालय पर दो शव वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। ऐसे में बड़ा मलहरा सिविल अस्पताल के स्तर पर कचरा ढोने वाले वाहन का इस्तेमाल क्यों किया गया और परिजनों को समय रहते सुविधा क्यों नहीं मिली, यह जांच का विषय है। स्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे जनता में काफी रोष है।
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