इतिहास रचेगा बस्तर का सुदूर इलाका
छत्तीसगढ़ में आगामी स्वतंत्रता दिवस पर एक विशेष पहल की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के कुल 92 गांवों में इस साल पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। लंबे समय तक हिंसा और तनाव के साये में रहे इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय ध्वज का लहराना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इसमें बीजापुर जिले के 33, सुकमा जिले के 50 और नारायणपुर जिले के 9 गांवों को शामिल किया गया है, जहां 15 अगस्त 2026 को उत्साह के साथ तिरंगा फहराया जाएगा।
शहीदों के नाम पर स्कूलों और चौराहों का नामकरण
सरकार की इस नई योजना के तहत केवल तिरंगा फहराना ही मुख्य उद्देश्य नहीं है, बल्कि देश के वीर सपूतों को याद करने के लिए उन्हें स्थायी सम्मान भी दिया जाएगा। बस्तर संभाग में 500 से अधिक स्कूलों, महत्वपूर्ण चौराहों और सामुदायिक भवनों का नामकरण अमर शहीदों के नाम पर किया जाएगा। इस पहल के पीछे का मुख्य लक्ष्य यह है कि नई पीढ़ी को देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले बहादुर जवानों के बलिदान और उनके शौर्य की गाथाओं से अवगत कराया जा सके।
हर घर तिरंगा और तिरंगा यात्रा की तैयारी
राज्य के उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान इस अभियान की विस्तृत रूपरेखा पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश भर में 'हर घर तिरंगा' अभियान और 'तिरंगा यात्रा' को व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान का मकसद नागरिकों के मन में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक दृढ़ करना है। यह अभियान न केवल स्वतंत्रता दिवस के जश्न को यादगार बनाएगा, बल्कि बस्तर के विकास और मुख्यधारा से जुड़ने की कहानी को भी बयां करेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इन आयोजनों के माध्यम से देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
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