देश की राजधानी दिल्ली में सरकारी परीक्षाओं की शुचिता को तार-तार करने वाले एक बड़े और बेहद हाईटेक नकल गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस ने अपनी त्वरित और मुस्तैद कार्रवाई के जरिए तीन राज्यों में फैले एक ऐसे संगठित सिंडिकेट को दबोचा है, जो मोटी रकम लेकर अभ्यर्थियों को ब्लूटूथ के जरिये परीक्षा में नकल करवाता था। इस गिरोह का मास्टरमाइंड कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि चंडीगढ़ फायर डिपार्टमेंट में तैनात एक फायरमैन है, जिसे इस काले धंधे की दुनिया में 'सोनू पेपरवाला' या 'सोनू मान' के नाम से जाना जाता था।
यह पूरा मामला दिल्ली स्थित सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी में आयोजित लोअर डिविजनल क्लर्क (LDC) भर्ती परीक्षा से जुड़ा हुआ है। परीक्षा हॉल के भीतर अभ्यर्थी अत्याधुनिक गैजेट्स छिपाकर ले गए थे और बाहर बैठी सोनू पेपरवाला की टीम उन्हें उत्तर सप्लाई कर रही थी। जब पुलिस ने कड़ियां जोड़नी शुरू कीं, तो पता चला कि यह जाल दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ तक फैला हुआ था और यह गिरोह पिछले दो सालों से सक्रिय था।
ऐसे खुली इस हाईटेक नकल रैकेट की पोल
यह मामला बीती 26 जुलाई का है, जब यूनिवर्सिटी में LDC पद के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही थी। परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद वहां तैनात निरीक्षकों की नजर आरती नाम की एक महिला अभ्यर्थी पर पड़ी। आरती परीक्षा हॉल में बैठकर बार-बार अपने कान और गर्दन को बहुत ही अजीब और असामान्य तरीके से खींच रही थी। उसकी इस हरकत पर शक होने पर जब महिला स्टाफ ने उसकी तलाशी ली, तो उसके पास से कपड़ों में छिपाकर रखा गया एक ब्लूटूथ डिवाइस बरामद हुआ। इसके जरिए बाहर बैठा एक व्यक्ति उसे लगातार प्रश्नों के उत्तर बता रहा था।
आरती के पकड़े जाने के बाद जब परीक्षा केंद्र पर कड़ाई से चेकिंग की गई, तो एक अन्य अभ्यर्थी हेमंत को भी दबोच लिया गया। हेमंत के पास से भी नैनो ईयरबड्स और सिम कार्ड स्लॉट वाला एक विशेष रूप से तैयार कस्टमाइज्ड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुआ, जिसका इस्तेमाल वह नकल करने के लिए कर रहा था।
10 लाख रुपये में तय हुआ था पास कराने का सौदा
इस घटना के बाद जनकपुरी पुलिस स्टेशन में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। हिरासत में ली गई अभ्यर्थी आरती से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो इस रैकेट के बड़े राज उजागर हुए। आरती ने बताया कि उसे यह ब्लूटूथ, नैनो ईयरबड्स और कस्टमाइज्ड मोबाइल फोन उसके दोस्त सनी ने दिए थे। सनी दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में स्टाफ के रूप में काम करता है। आरती ने खुलासा किया कि परीक्षा में पास कराने के एवज में सनी के साथ 10 लाख रुपये की बड़ी डील तय हुई थी, जिसे परीक्षा पास करने के बाद चुकाना था।
तीन राज्यों में फैला था दलालों का जाल
आरती और सनी से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने आगे की छापेमारी की और तीन और दलालों को गिरफ्तार किया, जिनके नाम रिंकू, वीरेंद्र और दीपक हैं। हरियाणा के रोहतक के रहने वाले ये दलाल उन अभ्यर्थियों को तलाशते थे जो सरकारी नौकरी पाने के लिए शॉर्टकट अपनाना चाहते थे। गिरफ्तार दलाल दीपक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह सीधे मास्टरमाइंड सोनू पेपरवाला के इशारे पर काम कर रहा था। दलाल प्रति अभ्यर्थी से करीब 8 लाख रुपये तक वसूलते थे, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा सोनू पेपरवाला को जाता था।
चरखी दादरी से दबोचा गया मास्टरमाइंड सोनू
इस गिरोह के मुख्य सरगना को पकड़ने के लिए इंस्पेक्टर दिनेश कुमार के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और सोशल मीडिया कड़ियों का विश्लेषण करते हुए सोनू कुमार उर्फ 'सोनू पेपरवाला' को ट्रैक किया। पुलिस ने हरियाणा के चरखी दादरी जिले के दादरी बाईपास रोड पर जाल बिछाकर उसे उस समय धर दबोचा, जब वह हरियाणा सरकार की एक अन्य परीक्षा का पेपर लीक कराने और उसमें नकल कराने की साजिश रच रहा था।
कस्टमाइज्ड डिवाइस जब्त, पुलिस की जांच जारी
पुलिस ने आरोपियों के पास से कई कस्टमाइज्ड मोबाइल फोन, सक्रिय सिम कार्ड, नैनो ईयरबड्स और कई अन्य सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस जब्त किए हैं। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए सभी 7 लोगों से सघन पूछताछ की जा रही है ताकि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके और यह पता लगाया जा सके कि पूर्व में इस गिरोह के जरिए कितने अभ्यर्थियों ने गलत तरीके से सरकारी नौकरियां हासिल की हैं।
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