डोनाल्ड ट्रंप ने 150 साल पुराने कानून पर चलाई कैंची, जन्मसिद्ध नागरिकता और बर्थ टूरिज्म पर सख्त नियम

अमेरिका में जन्म से नागरिकता पाने के अधिकार को सीमित करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने दो नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किए हैं, जो बर्थ टूरिज्म और गैर-नागरिकों के बच्चों के लिए नियम कड़े करते हैं।

संवैधानिक टकराव और ट्रंप की नई रणनीति

अमेरिका में जन्म से नागरिकता यानी बर्थ राइट सिटीजनशिप को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी घमासान शुरू हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से मिले हालिया झटके के बावजूद इस मुद्दे पर हार नहीं मानी है। अब उन्होंने दो नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर कर इस नीति को परोक्ष रूप से सीमित करने का प्रयास किया है। ओवल ऑफिस से गुरुवार को अपनी घोषणा में डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम उठाया है। यह घटनाक्रम जून महीने में उस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ठीक बाद आया है, जिसमें जन्मसिद्ध नागरिकता को खत्म करने के ट्रंप के पूर्ववर्ती प्रयासों को अदालत ने खारिज कर दिया था।

नए आदेशों के मुख्य बिंदु

ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी किए गए इन दो नए आदेशों का असर भविष्य में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता पर पड़ सकता है। इन आदेशों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • पहला एग्जीक्यूटिव ऑर्डर: इसके माध्यम से उन गैर-नागरिकों की श्रेणी को अधिक कड़ा किया गया है, जिनके बच्चे अमेरिकी धरती पर पैदा होने के बावजूद स्वतः नागरिकता के पात्र नहीं होंगे। इसमें उन अभिभावकों को लक्षित किया गया है जो किसी विदेशी सरकार के प्रति निष्ठा रखते हैं, किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े हैं या फिर जिन्होंने नागरिकता प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया है।
  • दूसरा एग्जीक्यूटिव ऑर्डर: यह आदेश सीधे तौर पर 'बर्थ टूरिज्म' के चलन को रोकने के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत उन गर्भवती महिलाओं पर नकेल कसी जाएगी जो केवल इस इरादे से अमेरिका की यात्रा करती हैं कि उनके बच्चे को जन्म के साथ ही अमेरिकी पासपोर्ट मिल जाए। ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिकी सिस्टम का गलत फायदा उठाना मानता है।

क्यों भड़के हैं डोनाल्ड ट्रंप?

व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी स्टीफन मिलर ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि बड़ी संख्या में लोग पर्यटक के रूप में वीजा लेकर अमेरिका आते हैं, लेकिन उनका असली उद्देश्य केवल बच्चे को जन्म देकर उसे अमेरिकी नागरिक बनाना होता है। ट्रंप सरकार का मानना है कि ऐसे बच्चे आगे चलकर अमेरिकी नागरिक के रूप में उन सभी सुविधाओं और अधिकारों का दावा करते हैं जिनके वे असल में हकदार नहीं हैं।

आंकड़ों का विरोधाभास

इस नीति को लागू करने के लिए ट्रंप सरकार ने बड़े दावों का सहारा लिया है, लेकिन आंकड़ों की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस तरह के ‘सैकड़ों हजार’ बच्चे अमेरिका में पैदा हो चुके हैं। हालांकि, माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट जैसे स्वतंत्र शोध संस्थानों के आंकड़े इसके उलट तस्वीर पेश करते हैं। संस्थान के मुताबिक, इस प्रकार के मामलों की सालाना संख्या करीब 22,000 से 26,000 के बीच ही रहती है। वहीं साल 2024 के आंकड़ों पर गौर करें तो केवल 9,600 ऐसे जन्म दर्ज किए गए थे जिनमें मां का पता अमेरिका के बाहर था। विशेषज्ञों और शिक्षाविदों, जैसे कि कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गेब्रियल चिन, ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए इसे 'बाल्टी में एक बूंद' के समान बताया है।

कानूनी भविष्य और चुनौतियां

अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन पिछले करीब 150 वर्षों से यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि अमेरिकी सरजमीं पर जन्मा हर बच्चा स्वतः नागरिक होगा। ट्रंप की कोशिश इसी बुनियादी अधिकार को एक नई कानूनी व्याख्या के जरिए सीमित करने की है। कानूनी जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति के पास विदेशियों के अमेरिका आने पर रोक लगाने का अधिकार हो सकता है, लेकिन यदि कोई बच्चा अमेरिका में जन्म ले लेता है, तो उसकी नागरिकता छीनना संवैधानिक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य है। यह तय माना जा रहा है कि ट्रंप के इन नए आदेशों को अदालत में चुनौती दी जाएगी। एक बार फिर यह मामला अमेरिका की अदालतों की दहलीज पर खड़ा है, जो अमेरिकी आव्रजन और नागरिकता कानून के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।

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