पाकिस्तान में बच्चों के खिलाफ अपराधों का भयावह सच
पाकिस्तान में बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट से पता चला है कि वहां बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में चिंताजनक रूप से बढ़ोतरी हुई है। यह रिपोर्ट 'साहिल' नामक संस्था द्वारा जारी की गई है, जो बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम करती है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के पहले 6 महीनों के भीतर ही देश में बच्चों के उत्पीड़न और अपराध के कुल 1 हजार 914 मामले दर्ज किए गए हैं।
यौन शोषण और अपहरण की घटनाओं में वृद्धि
इस दुखद रिपोर्ट में अपराधों का विस्तृत विवरण दिया गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल की पहली छमाही में बच्चों के यौन शोषण के ही 1 हजार 15 मामले सामने आए हैं, जो रिपोर्ट किए गए कुल अपराधों में सबसे बड़ी संख्या है। इसके अलावा बच्चों के अपहरण के 558 केस, बच्चों के लापता होने के 101 केस और बाल विवाह के 35 मामले पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान 49 नवजात शिशु लावारिस अवस्था में पाए गए हैं।
आंकड़ों का दायरा
यह शोध रिपोर्ट पाकिस्तान के चार मुख्य प्रांतों के साथ-साथ इस्लामाबाद, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रकाशित होने वाले विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों की खबरों का विश्लेषण करके तैयार की गई है। यह दर्शाता है कि यह संकट पूरे देश में व्यापक रूप से फैला हुआ है।
पीड़ित बच्चों की आयु और वर्ग
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों में 58 फीसदी लड़कियां शामिल हैं। उम्र के हिसाब से देखें तो 11 से 15 साल की उम्र के बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित रहे हैं। इस आयु वर्ग में कुल 598 बच्चे शिकार हुए हैं। वहीं 16 से 18 साल की उम्र के 356 बच्चे और 6 से 10 साल की उम्र के 329 बच्चे इन अपराधों का शिकार बने हैं। इसके अतिरिक्त 95 बच्चे तो केवल 5 साल या उससे भी कम आयु के हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, 487 मामलों में पीड़ितों की सटीक आयु का पता नहीं चल पाया है।
अपराधियों का पीड़ितों से संबंध
जांच में यह भी सामने आया कि अधिकतर मामलों में अपराधी कोई अनजान व्यक्ति नहीं बल्कि पीड़ितों का परिचित ही था। कुल मामलों के 43 फीसदी में अपराधियों की पहचान पीड़ित के जानकार के रूप में हुई है, जबकि 34 प्रतिशत मामलों में अनजान लोग शामिल थे। शोषण के 45 फीसदी मामले पीड़ित के अपने घरों के भीतर हुए हैं, जबकि 18 प्रतिशत घटनाएं संदिग्धों के घरों में अंजाम दी गईं। 3 फीसदी अपराध खुले खेतों में हुए हैं, जबकि 21 प्रतिशत घटनाओं के स्थान की जानकारी स्पष्ट नहीं है।
पंजाब प्रांत बना केंद्र
क्षेत्रीय आंकड़ों के मुताबिक, 57 फीसदी अपराध शहरी इलाकों में हुए हैं, जबकि 43 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कुल अपराधों के 80 फीसदी मामले अकेले पंजाब प्रांत में दर्ज हुए हैं। इसके बाद 15 फीसदी मामलों के साथ सिंध का स्थान आता है, और शेष 5 प्रतिशत घटनाएं अन्य क्षेत्रों से रिपोर्ट की गई हैं। यह रिपोर्ट पाकिस्तान की गिरती कानून-व्यवस्था और बच्चों की दयनीय स्थिति को उजागर करती है, विशेषकर तब जब देश में हिंसा और अस्थिरता की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
https://www.indiatv.in/world/asia/pakistan-child-abuse-cases-rise-2026-sahil-report-dawn-abuse-kidnapping-2026-08-07-1236007