पलामू में खेती का बदलता स्वरूप
पलामू जिले में इस बार बरसात के मौसम में एल नीनो का प्रतिकूल प्रभाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। बारिश की कमी के कारण किसानों के सामने खेती को लेकर एक गंभीर संकट पैदा हो गया है। विशेष रूप से टांड़ वाली जमीनों पर धान की रोपाई करना मुश्किल हो गया है, जिसके चलते कई खेत अब भी बंजर पड़े हैं। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में पलामू के किसान अब पारंपरिक कृषि पद्धति से हटकर नए और आधुनिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। वे ऐसी फसलों का चयन कर रहे हैं जिन्हें कम पानी की आवश्यकता हो और जो उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान कर सकें।
स्वीट कॉर्न बन रहा है किसानों की पहली पसंद
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि पलामू में स्वीट कॉर्न की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन आर्थिक विकल्प साबित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य मक्के की तुलना में स्वीट कॉर्न का बाजार मूल्य काफी अधिक होता है। शहरों, स्थानीय बाजारों, होटलों, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड स्टॉलों पर स्वीट कॉर्न की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे किसानों को अपना माल बेचने में कोई परेशानी नहीं होती। पलामू की भौगोलिक स्थिति इसकी खेती के लिए काफी अनुकूल है।
मुनाफे का गणित
करकटा गांव के प्रगतिशील किसान शंकर मेहता ने पारंपरिक धान और गेहूं की खेती को छोड़कर स्वीट कॉर्न को अपनाया है। उन्होंने बताया कि अपनी टांड़ वाली जमीन पर स्वीट कॉर्न लगाकर उन्होंने पिछले वर्ष बहुत अच्छा अनुभव प्राप्त किया था। कम क्षेत्रफल में खेती करने के बावजूद उन्हें न केवल बंपर उत्पादन मिला, बल्कि बाजार में इसका भाव भी काफी संतोषजनक रहा।
मुनाफे का अंतर स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि जहां साधारण मक्का बाजार में 20 से 25 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकता है, वहीं स्वीट कॉर्न का भाव 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल जाता है। इसी लाभ को देखते हुए शंकर मेहता अब अगले सीजन में 10 कट्ठा जमीन पर स्वीट कॉर्न की खेती करने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि यदि किसानों को तकनीकी जानकारी और सही बाजार मिले, तो यह फसल उनकी आय में भारी इजाफा कर सकती है।
बेहतर पैदावार के लिए उन्नत किस्में
डॉ. प्रमोद कुमार ने किसानों को सलाह दी कि वे कम उत्पादन देने वाली पुरानी किस्मों के बजाय हमेशा उन्नत प्रभेद का ही चुनाव करें। स्वीट कॉर्न की गुणवत्तापूर्ण पैदावार के लिए निम्नलिखित किस्में सबसे उत्तम मानी जाती हैं:
- शुगर-75
- माधुरी
- स्वीट ग्लोरी
- गोल्डन स्वीट
- हनी स्वीट
- प्रिया स्वीट कॉर्न
- सुपर स्वीट
यदि किसान सामान्य मक्के की खेती करना चाहते हैं, तो उनके लिए डीकेसी-9144, डीकेसी-9108, पायनियर-3396, पायनियर-1899, एनके-6240, बायोसीड-9544 और जेएमएच-1001 जैसी संकर किस्में अधिक फायदेमंद हैं। इन किस्मों की खासियत यह है कि ये विषम मौसमी स्थितियों में भी बेहतर परिणाम देती हैं और इनकी उत्पादन क्षमता भी काफी अधिक होती है।
नुकसान से बचने का सही प्रबंधन
जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण धान की रोपाई अब असंभव प्रतीत हो रही है, वहां के किसान समय रहते स्वीट कॉर्न या उन्नत मक्के को अपनाकर अपने संभावित नुकसान को मुनाफे में बदल सकते हैं। डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, कृषि में सफलता के लिए केवल बीजों का चुनाव ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए संतुलित खाद का उपयोग, समय पर सिंचाई और सही फसल प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। कम लागत और अधिक मुनाफे वाली यह तकनीक पलामू के किसानों के लिए बदलते मौसम के दौर में आय बढ़ाने का एक मजबूत और भरोसेमंद जरिया बन चुकी है।
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