संसद सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा दांव, एनडीए का कुनबा बढ़ाने की कवायद तेज

संसद के आगामी सत्र में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लक्ष्य के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए सहयोगियों के साथ संवाद तेज कर दिया है। इसी कड़ी में हाल ही में प्रधानमंत्री ने नए सहयोगी सांसदों के साथ बैठक की और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी का सहयोगियों के साथ संवाद

संसद के आने वाले सत्र और कई महत्वपूर्ण विधेयकों को कानून की शक्ल देने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए गठबंधन को और मजबूत बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने एनडीए में हाल ही में शामिल हुए 45 सांसदों को अपने आवास पर नाश्ते पर आमंत्रित किया। इस बैठक में एनसीपीआई, शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अठावले गुट, राष्ट्रीय लोकमोर्चा, एआईएडीएमके और यूपीपीएल के सांसद शामिल हुए। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा एनसीपीआई के उन 20 सांसदों की रही, जो तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनडीए के साथ आए हैं।

एनसीपीआई के मुस्लिम सांसदों की मौजूदगी

इस महत्वपूर्ण बैठक में एनसीपीआई के 20 सांसदों में शामिल तीन मुस्लिम सांसद खलील-उर-रहमान, अबु ताहेर खान और यूसुफ पठान की उपस्थिति ने सबका ध्यान खींचा। इससे पहले वे एनडीए की मंगल मिलन बैठक का हिस्सा नहीं बने थे, जिसके चलते उनके एनडीए में सहज न होने की चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि, इस बार वे प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। बैठक के बाद यूसुफ पठान ने स्पष्ट किया कि एनसीपीआई का सदस्य होने के नाते वे देशहित से जुड़े हर विधेयक का समर्थन करेंगे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने में हो रही देरी और पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने संबंधी शिकायतों को केंद्र के समक्ष रखा। सरकार की ओर से उन्हें कानून के दायरे में रहते हुए इन समस्याओं पर उचित विचार करने का आश्वासन दिया गया है।

संसद में बहुमत का गणित और चुनौतियां

सरकार की इस कवायद को संसद के भीतर संख्या बल को अभेद्य बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि पिछली बार जब महिला आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया गया था, तब सरकार दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में पीछे रह गई थी। उस वक्त बिल के समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए लगभग 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। अब एनडीए को तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के 6 सांसदों का समर्थन मिलने से सरकार के पक्ष में 324 सांसदों का आंकड़ा पहुंच चुका है। यदि डीएमके के 22 और वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसदों का साथ मिल जाता है, तो यह संख्या 350 तक पहुंच सकती है।

एकनाथ शिंदे और प्रधानमंत्री की बैठक

इस राजनीतिक सरगर्मी के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली पहुंचे। पहले उनकी पार्टी के सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की, जिसके बाद शिंदे ने खुद प्रधानमंत्री के साथ अलग से बैठक की। शिंदे ने बताया कि बातचीत का मुख्य केंद्र महाराष्ट्र का विकास, संसद में पेश होने वाले आगामी विधेयक और शिवसेना सांसदों की भूमिका रही। उन्होंने महिला आरक्षण बिल को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे सर्वसम्मति से पारित होना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने परिसीमन बिल का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान में कई लोकसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 25 से 30 लाख तक पहुंच गई है, जिससे सांसदों के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी काम करना कठिन होता जा रहा है।

सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात से अटकलें

इन बैठकों के बीच शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। यद्यपि आधिकारिक तौर पर इसे पंजाब की कानून-व्यवस्था पर चर्चा बताया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन की पुनरावृत्ति की संभावना के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर दोनों दल फिर से साथ आते हैं, तो अकाली दल एनडीए में वापसी कर सकता है, परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकता है और भविष्य के पंजाब विधानसभा चुनावों में भी साथ दिख सकते हैं।

परिसीमन और आरक्षण के लिए तैयारी

प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की भेंट पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कटाक्ष किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सवाल किया कि क्या भाजपा और अकाली दल फिर से हाथ मिलाने की तैयारी में हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार चरणबद्ध तरीके से अपने सहयोगियों का दायरा बढ़ा रही है ताकि भविष्य में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े संवैधानिक विधेयकों के लिए आवश्यक समर्थन जुटाया जा सके। नए संसद भवन के निर्माण के दौरान भी लोकसभा की क्षमता को सीटों की संभावित वृद्धि के अनुरूप रखा गया है। स्पष्ट है कि सरकार सही अवसर की प्रतीक्षा कर रही है ताकि इन अहम विधेयकों को धरातल पर उतारा जा सके।

https://www.indiatv.in/india/politics/pm-modi-strengthens-nda-outreach-ahead-of-delimitation-bill-eyes-wider-support-for-key-constitutional-reforms-2026-08-07-1235995