राज्य में कट्टरपंथ के खिलाफ सख्त कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कट्टरपंथी विचारधारा और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राज्य के गृह विभाग ने 6 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी करते हुए कुल 114 ऐसे प्रकाशनों, पत्रिकाओं और अन्य साहित्य पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है, जो सीधे तौर पर आतंकवादी संगठनों से जुड़े हुए हैं। सरकार ने आदेश दिया है कि इन सभी सामग्रियों की भौतिक और डिजिटल प्रतियां अब राज्य सरकार के कब्जे में होंगी और इन्हें जब्त कर लिया गया है।
ATS की जांच में उजागर हुआ खतरनाक नेटवर्क
इस कार्रवाई के पीछे महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड यानी ATS की विस्तृत जांच और खुफिया एजेंसियों से मिली सटीक जानकारी का बड़ा हाथ है। साइबर निगरानी के दौरान यह पाया गया कि कुछ कट्टरपंथी समूह लगातार डिजिटल और भौतिक माध्यमों से ऐसा साहित्य फैला रहे हैं जो युवाओं को भटकाने का काम करता है। सरकार के अनुसार, यह सामग्री न केवल हिंसक उग्रवाद का महिमामंडन करती है, बल्कि युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और आतंकवादी संगठनों में भर्ती करने का एक बड़ा माध्यम बन गई है। यह देश की सुरक्षा, अखंडता, संप्रभुता और सार्वजनिक शांति के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।
कानूनी दायरे में जब्ती की प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS, 2023 की धारा 98(1) के तहत राज्य सरकार ने यह अधिसूचना जारी की है। इस नए आदेश के बाद इन 114 प्रकाशनों का प्रिंट निकालना, इन्हें कहीं फैलाना, बेचना, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करना या अपने पास भौतिक और डिजिटल रूप में संग्रहित करके रखना पूरी तरह से गैरकानूनी हो गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सभी वस्तुएं अब जब्ती के दायरे में आती हैं।
आतंकी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला साहित्य
जिन प्रकाशनों पर पाबंदी लगाई गई है, उनमें 'Voice of Khurasan Magazine', 'The Revolutionary Resurgence', 'Kashmir Kifah Resilience & Courage', 'The Soul of Resistance' और 'Nawai Gazwa-e-Hind' जैसे नाम शामिल हैं। ये दस्तावेज अलग-अलग प्रतिबंधित आतंकवादी समूहों द्वारा जारी किए जाते थे, जिनका मुख्य उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना और आतंक को बढ़ावा देना था।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस कार्रवाई को वक्त की जरूरत बताया है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डार्क नेट के जरिए ऐसी किताबें और प्रकाशन सामने आ रहे थे, जिनमें बम बनाने की विधि, हिंसा भड़काने के तरीके और हमले की योजनाएं तक शामिल थीं। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी सामग्री को बैन करने के लिए स्पष्ट कानूनों का अभाव था, लेकिन अब नए कानून के तहत हम ऐसी गतिविधियों को पूरी तरह रोकने में सक्षम हैं। यह राज्य की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक बहुत ही सकारात्मक कदम है।
अधिसूचना और उल्लंघन पर कार्रवाई
आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले लेखों, ऑडियो, वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों पर रोक लगाने के लिए अधिसूचना क्रमांक SUT &0526/CR-276/SPL&4 जारी की गई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों से सहयोग की अपील
महाराष्ट्र ATS ने राज्य के नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध दस्तावेज या डिजिटल सामग्री को अपने पास न रखें और न ही इसे आगे साझा करें। यदि किसी को ऐसी सामग्री के बारे में जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत जांच एजेंसियों को सूचित करें। ATS ने यह भरोसा भी दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस बड़ी कार्रवाई से पहले जुलाई महीने में भी महाराष्ट्र के कई हिस्सों में ATS ने छापेमारी की थी, जिसमें करीब 150 से ज्यादा संदिग्ध लोग रडार पर थे। इन लोगों के संबंध पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से होने की आशंका जताई गई थी।
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