मटन के स्वाद को टक्कर देती है मिथिला की पारंपरिक 'नेरहा' सब्जी, बारिश में है इसका लाजवाब आनंद

मिथिलांचल में पके हुए कटहल के गूदे से बनने वाली 'नेरहा' की सब्जी स्वाद में मटन को मात देती है। जानें कि कैसे बेकार समझकर फेंके जाने वाले इस हिस्से से तैयार होती है यह चटपटी और सेहतमंद डिश।

क्या आपने कभी मिथिला की खास नेरहा सब्जी का स्वाद चखा है?

अगर आप खाने के शौकीन हैं और मिथिलांचल के पारंपरिक जायकों को पसंद करते हैं, तो बारिश के इस सुहावने मौसम में आपको एक बार नेरहा की सब्जी का स्वाद जरूर लेना चाहिए। अक्सर लोग पके हुए कटहल के अंदर के हिस्से को अनुपयोगी मानकर फेंक देते हैं, लेकिन मिथिला के लोग इसी हिस्से का इस्तेमाल करके एक ऐसी सब्जी तैयार करते हैं जो स्वाद में मटन को भी कड़ी टक्कर देती है। खान-पान की कला में मिथिलांचल का देसी अंदाज हमेशा से ही दुनियाभर में अपनी अनूठी पहचान बनाए हुए है।

क्या होता है नेरहा और कैसे होता है चयन?

इन दिनों बाजार में पका हुआ कटहल आसानी से उपलब्ध है। पके कटहल के अंदर से कोया (फल) निकालने के बाद जो बीच का सख्त डंठल या रेशेदार हिस्सा बचता है, उसे स्थानीय भाषा में नेरहा कहा जाता है। स्थानीय गृहिणी पूनम के अनुसार, नेरहा की सब्जी बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है, लेकिन इसमें कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि स्वाद बेहतर बना रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेरहा हमेशा बिल्कुल ताजा होना चाहिए। यदि यह दो या तीन दिन पुराना हो जाता है, तो इसमें मिठास आ जाती है, जिससे इसका तीखा और चटपटा स्वाद पूरी तरह खत्म हो जाता है और यह अपना असली मजा खो देता है।

बनाने की आसान विधि

सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले नेरहा को अच्छी तरह से साफ करके काटना होता है। कटहल के इस हिस्से को पानी से कई बार धोया जाता है ताकि उसका प्राकृतिक मीठापन पूरी तरह से निकल जाए। सफाई के बाद इसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लिए जाते हैं।

  • सबसे पहले एक कढ़ाई में सरसों का तेल गरम करें।
  • इसमें जीरा, तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाएं।
  • तैयार नेरहा के टुकड़ों को कढ़ाई में डालकर अच्छी तरह से सुनहरा होने तक फ्राई करें।
  • स्वाद को और अधिक बढ़ाने के लिए इसमें आलू और बारीक कटा हुआ प्याज मिलाएं।
  • मसालों के लिए आप सिलबट्टे पर पिसे हुए मसालों का उपयोग कर सकते हैं। धनिया, मिर्च, हल्दी और गरम मसाला डालकर मिश्रण को धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनें।
  • जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर ग्रेवी तैयार करें और इसे तब तक पकाएं जब तक यह पूरी तरह से नरम न हो जाए।

परिवेश और स्वाद का अनुभव

पूरी तरह से पक जाने के बाद, यह सब्जी देखने में भी मटन जैसी लगती है और खाने में तो इसका तीखा और चटपटा स्वाद लाजवाब होता है। आप इसे गरमागरम रोटियों या चावल के साथ परोस सकते हैं। मिथिलांचल के लोग इसे भुने हुए चूड़े के साथ खाना काफी पसंद करते हैं। यह पारंपरिक सब्जी न केवल आपकी जीभ का स्वाद बदलती है, बल्कि पोषण के लिहाज से भी शरीर के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। बारिश के मौसम में इस अनोखे व्यंजन का आनंद लेना एक अलग ही अनुभव है जिसे आप भी अपने घर पर आसानी से आजमा सकते हैं।

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