रजत शर्मा का ब्लॉग: मोहन भागवत ने आखिर क्यों की Gen Z की तारीफ और क्या है AI पर सरकार का नया कड़ा रुख?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी को लेकर अपनी सोच साझा करते हुए उन्हें अधिक देशभक्त बताया है, वहीं केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर AI और डीपफेक के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियमों को बेहद सख्त कर दिया है।

मोहन भागवत का युवाओं पर भरोसा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नई पीढ़ी के दो हजार से अधिक युवाओं के साथ एक संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने जो बातें कहीं, वे आज के दौर में काफी मायने रखती हैं। भागवत ने साफ तौर पर कहा कि आज की Gen Z पीढ़ी पुरानी पीढ़ी की तुलना में कहीं ज्यादा ईमानदार और देशभक्त है। उन्होंने युवाओं के आंदोलन करने के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि यदि समय रहते संवाद किया जाए, तो आंदोलन की स्थिति ही पैदा नहीं होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शन करना अपनी बात कहने का एक लोकतांत्रिक जरिया है।

भागवत ने जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन को विदेशी फंडिंग से प्रेरित या राष्ट्रविरोधी करार देने वाली धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जो पीढ़ी देश का भविष्य है, उस पर संदेह करना पूरी तरह गलत है। आरएएसएस प्रमुख ने यह भी स्वीकार किया कि हमारी शिक्षा प्रणाली में कुछ कमियां हैं, और इसे सुधारने के लिए सबसे पहले हमें इन वास्तविकताओं को स्वीकार करना होगा। आरक्षण के मुद्दे पर उनका रुख स्पष्ट था कि जब तक समाज में भेदभाव व्याप्त है, तब तक आरक्षण की व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि जो लोग आरक्षण का लाभ उठाकर आर्थिक और सामाजिक रूप से बेहतर स्थिति में आ चुके हैं, उन्हें खुद को इस दायरे से अलग करने का बड़ा दिल दिखाना चाहिए।

जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे संवेदनशील विषयों पर भागवत ने कहा कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि यदि उन्हें विकल्प मिले तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के Gen Z की बात पर भरोसा करेंगे। उन्होंने उन लोगों को करारा जवाब दिया जो नई पीढ़ी को विदेशी एजेंट या राष्ट्रविरोधी बताकर बदनाम करते हैं। यह देखना सुखद है कि भागवत ने किसी भी प्रकार की लाग-लपेट के बिना युवाओं का पक्ष लिया है।

AI और डीपफेक पर सरकार की सख्ती

सोशल मीडिया और तकनीकी विकास के इस दौर में AI और डीपफेक कंटेंट का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए सरकार ने अब चाबुक चलाना शुरू कर दिया है। सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। अब अगर कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर अवैध, AI जनरेटेड या डीपफेक कंटेंट पोस्ट करता है, तो शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर संबंधित प्लेटफॉर्म को उसे हटाना अनिवार्य होगा। यदि मामला अश्लीलता या बाल शोषण से जुड़ा है, तो यह समय सीमा घटाकर केवल 2 घंटे कर दी गई है।

सरकार के नए नियमों के तहत अब जेनरेटेड कंटेंट के लिए क्लियर लेबलिंग और ट्रेसेबल मेटाडेटा को अनिवार्य बना दिया गया है। पहले की व्यवस्था में सोशल मीडिया कंपनियों को गैरकानूनी कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था, लेकिन अब इस मियाद को काफी कम कर दिया गया है। शिकायतों के निपटारे (Grievance Redressal) के लिए भी समय सीमा को बेहद सीमित कर दिया गया है। कंपनियों को अब डीपफेक और फर्जी AI कंटेंट की पहचान करने के लिए उन्नत और ऑटोमेटेड टेक्नोलॉजी का उपयोग करना होगा। यदि कोई कंपनी इन कड़े नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

डीपफेक से उपजी चुनौतियां

डीपफेक और फर्जी AI कंटेंट का मुद्दा अब आम आदमी की सुरक्षा से जुड़ा है। खुद लेखक (रजत शर्मा) भी इसका शिकार रह चुके हैं। अक्सर AI का सहारा लेकर दवाइयों के प्रचार या फर्जी निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों को ठगने का काम किया जाता है। कई बार बुजुर्गों को भ्रमित किया जाता है और बच्चों को गलत सूचनाओं के जरिए गुमराह करने की कोशिश की जाती है। अक्सर ऐसा होता था कि जब तक कंटेंट को हटाया जाता, वह हजारों लोगों तक पहुंच चुका होता था और अपना नुकसान कर चुका होता था। अब 3 घंटे की समय सीमा अनिवार्य करना एक स्वागत योग्य कदम है, जिससे गलत सूचनाओं के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। सरकार का यह ऐतिहासिक निर्णय डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

https://www.indiatv.in/india/national/rajat-sharma-blog-why-mohan-bhagwat-praised-gen-z-2026-08-07-1235959