रांची में छात्र आंदोलन के दौरान हंगामा
झारखंड की राजधानी रांची से इस समय एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा को लेकर जारी छात्र आंदोलन के दौरान उस समय अफरा तफरी मच गई, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर किसी ने स्याही फेंक दी। अब तक यह आंदोलन किसी भी प्रकार की दलीय राजनीति से दूर था, लेकिन एक वामपंथी नेता के वहां पहुंचते ही छात्रों का एक बड़ा वर्ग आक्रोशित हो गया।
घटना का विवरण
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब प्रदर्शन स्थल पर नेहा बोरा पहुंचीं, तो वहां मौजूद भीड़ ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। आंदोलन कर रहे छात्रों का मानना है कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा से जुड़े मामले पूरी तरह से छात्रों के भविष्य से संबंधित हैं और इसमें किसी भी राजनीतिक दल या संगठन का हस्तक्षेप उन्हें स्वीकार नहीं है। अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान अज्ञात लोगों ने नेहा बोरा पर स्याही उछाल दी। इस घटना के बाद वहां कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया।
कौन हैं नेहा बोरा?
नेहा बोरा का नाम पिछले कुछ समय में देश के प्रमुख छात्र नेताओं की सूची में शामिल हुआ है। वह AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में पीएचडी की रिसर्च स्कॉलर भी हैं। वह लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार, शिक्षा के निजीकरण और छात्रों के अधिकारों के लिए मुखर रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई थीं नेहा बोरा
नेहा बोरा को राष्ट्रीय पहचान तब मिली जब उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक और अन्य छात्र संबंधित मुद्दों को लेकर एक लंबा संघर्ष किया था। उस दौरान उन्होंने लगातार 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। खराब स्वास्थ्य के बावजूद अपने आंदोलन पर अडिग रहने के कारण वह छात्र राजनीति का एक बड़ा चेहरा बनकर उभरीं। उनके द्वारा दिए गए भाषण और वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुए थे, जिससे उन्हें काफी लोकप्रियता मिली।
आंदोलन में वामपंथी विचारधारा की एंट्री पर सवाल
AISA संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन का छात्र विंग है। यही कारण है कि जब नेहा बोरा जेपीएससी और जेएसएससी आंदोलन में पहुंचीं, तो वहां मौजूद छात्रों ने इसे एक राजनीतिक रंग देने की कोशिश माना। रांची के छात्रों का यह स्पष्ट मत रहा है कि वे इस लड़ाई को किसी राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर नहीं देखना चाहते। फिलहाल, इस घटना ने झारखंड के परीक्षा विवाद और आंदोलन को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया है। स्थानीय प्रशासन अब इस मामले पर पैनी नजर रखे हुए है ताकि आंदोलन के नाम पर शांति व्यवस्था भंग न हो।
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