रानी चुआ और स्वर्णरेखा का पौराणिक संबंध
झारखंड की राजधानी रांची के नगरी इलाके में स्थित रानी चुआ नामक कुआं आस्था का एक बड़ा केंद्र है। यह केवल एक सामान्य कुआं नहीं है, बल्कि इसे विशाल स्वर्णरेखा नदी की जन्मभूमि माना जाता है। स्थानीय लोक मान्यताओं और पुजारी देवेंद्र के अनुसार, महाभारत काल के दौरान जब पांडव अपने अज्ञातवास में थे, तब वे इस गांव में रुके थे। कहा जाता है कि माता द्रौपदी को दैनिक कार्यों के लिए जल की आवश्यकता थी, जिसे पूरा करने के लिए अर्जुन ने अपनी धनुर्विद्या का उपयोग किया और जमीन पर बाण चलाकर जल की धारा को बाहर निकाला। माता द्रौपदी ने इसी स्थान पर अनुष्ठान और विशेष पूजा की थी, जिसके चलते इस पवित्र स्थल का नाम रानी चुआ पड़ा।
स्वर्णरेखा का नाम और कुएं की महिमा
इस नदी को स्वर्णरेखा कहे जाने के पीछे भी एक पुरानी मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन समय में इस नदी के रेत से सोना मिलता था, जिसके कारण इसका नाम स्वर्णरेखा पड़ा। एक छोटे से कुएं से एक विशाल नदी का प्रवाह शुरू होना अपने आप में एक चमत्कारिक घटना है। स्थानीय निवासी इस कुएं को नदी का जन्मदाता मानते हैं और इसकी गहरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। यहां का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है, जिसका उपयोग लोग अपने घरों के मांगलिक कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों और खेतों की सिंचाई के लिए भी करते हैं।
सावन में कांवड़ियों की अटूट आस्था
सावन के महीने में रानी चुआ की रौनक देखते ही बनती है। हर सोमवार को यहां कांवड़ियों का सैलाब उमड़ता है। जो भक्त दूर होने के कारण सुल्तानगंज जाने में असमर्थ होते हैं, वे इसी कुएं से जल भरकर अपनी कांवड़ यात्रा का संकल्प लेते हैं। यहां से पहाड़ी बाबा मंदिर की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस दूरी को पैदल तय करते हैं और मंदिर पहुंचकर भगवान शिव को यह जल अर्पित करते हैं। पुजारी देवेंद्र का मानना है कि जो भी श्रद्धालु सच्ची निष्ठा के साथ इस कुएं का जल भगवान शिव पर चढ़ाता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।
दुर्गम रास्ते के बावजूद अटूट विश्वास
रानी चुआ तक पहुंचना भक्तों के लिए कोई सरल कार्य नहीं है। इस पवित्र स्थान तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को करीब चार खेतों को पार करना पड़ता है। सावन का समय धान की रोपाई का सीजन होता है, जिससे पूरे रास्ते में कीचड़ और फिसलन भरी मिट्टी होती है। इसके बावजूद, भक्तों का उत्साह तनिक भी कम नहीं होता। वे नंगे पांव और कीचड़ से लथपथ होकर भी पूरी खुशी के साथ वहां तक पहुंचते हैं। जल भरने के बाद, पहाड़ी बाबा के जयकारों के साथ उनकी पदयात्रा का सफर शुरू होता है, जो उनकी अटूट आस्था का प्रमाण है। हर साल सावन में हजारों की संख्या में भक्त इस रहस्यमयी कुएं पर जल लेने के लिए आते हैं, जिससे यह स्थान झारखंड के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में से एक बना हुआ है।
https://hindi.news18.com/photogallery/jharkhand/ranchi-arjuna-created-the-water-stream-by-shooting-an-arrow-rani-chua-is-a-focal-point-of-devotees-faith-local18-10726642.html