हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री मणिमहेश की पावन यात्रा वर्ष 2026 में बेहद खास और सुव्यवस्थित होने जा रही है। इस साल की मणिमहेश यात्रा की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। यात्रा को सुरक्षित, सुगम और यात्रियों के लिए आरामदायक बनाने के उद्देश्य से चंबा जिला प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय दिखाई दे रहा है। तैयारियों की जमीनी हकीकत परखने के लिए चंबा के उपायुक्त यानी डीसी मुकेश रेपसवाल खुद मैदान में उतरे। उन्होंने भरमौर प्रशासन और संबंधित विभागों के आला अधिकारियों के साथ हरसर से धनछो होते हुए माता गौरीकुंड तक के पूरे मार्ग का पैदल निरीक्षण किया। इस दौरान वे लगभग 13 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर पवित्र झील तक पहुंचे।
खुद डीसी ने किया मार्ग का निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
डीसी मुकेश रेपसवाल ने अपनी टीम के साथ पैदल यात्रा मार्ग का बारीकी से मुआयना किया। पिछले साल भारी बारिश और भूस्खलन के कारण हरसर से धनछो के बीच का पैदल मार्ग काफी क्षतिग्रस्त हो गया था। प्रशासन इस मार्ग को ठीक करने और यात्रियों के लिए एक सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता तैयार करने के काम में युद्धस्तर पर जुटा हुआ है। अपने इस निरीक्षण दौरे के दौरान डीसी ने पैदल मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों, पीने के पानी की उपलब्धता, बिजली की सुचारू आपूर्ति, मोबाइल संचार व्यवस्था और आपातकालीन राहत एवं बचाव कार्यों का बारीकी से आकलन किया।
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ जगहों पर रास्ता अब भी काफी संकरा है और वहां ढलान बहुत अधिक है। बारिश के मौसम में मिट्टी के कारण ऐसी जगहों पर फिसलन होने का गंभीर खतरा रहता है। इन संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे वैकल्पिक मार्ग का काम लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। डीसी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बचे हुए कनेक्टिविटी के काम को तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाए ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
हेलीकॉप्टर सेवा का किराया और ऑपरेटरों का चयन
जो श्रद्धालु पैदल चढ़ाई करने में असमर्थ हैं, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा एक महत्वपूर्ण विकल्प होती है। इस बार प्रशासन ने भरमौर से गौरीकुंड तक हेलीकॉप्टर शटल सेवा के किराए और ऑपरेटरों की चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है। हेली टैक्सी सेवाओं के संचालन के लिए निविदा (टेंडर) प्रक्रिया आयोजित की गई थी, जिसमें कुल 4 बड़े हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने हिस्सा लिया। तकनीकी जांच में सभी कंपनियां योग्य पाई गईं, जिसके बाद उनकी वित्तीय बोलियां खोली गईं।
इस टेंडर प्रक्रिया में सबसे कम बोली (L-1) एम/एस थम्बी एविएशन द्वारा लगाई गई। कंपनी ने एक तरफ का किराया 3,828 रुपये प्रति यात्री (अतिरिक्त शुल्क के साथ) तय करने का प्रस्ताव दिया। इसी दर के आधार पर थम्बी एविएशन को इस सेवा के लिए चुना गया है। इसके अलावा, यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए और उड़ानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने एम/एस राजस एयरोस्पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को भी इसी दर (3,828 रुपये प्रति यात्री प्लस अतिरिक्त शुल्क) और समान नियमों व शर्तों पर हेली टैक्सी चलाने की अनुमति दी है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए गए कड़े कदम, इन चीजों पर रहेगा बैन
मणिमहेश यात्रा के मार्ग पर पर्यावरण की सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए इस बार कड़े कदम उठाए गए हैं। भरमौर में वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) रजनीश महाजन की अध्यक्षता में वन विभाग की एक अहम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में यात्रा मार्ग को प्लास्टिक और कचरे से मुक्त रखने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं:
- यात्रा मार्ग पर 5 रुपये वाले नमकीन और चिप्स के पैकेट बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
- 10 रुपये वाली कोल्ड ड्रिंक की बोतलों की बिक्री भी पूरी तरह वर्जित होगी।
- सिंगल यूज प्लास्टिक या प्रतिबंधित पॉलिथीन का उपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- गुटखा, खैनी, तंबाकू उत्पाद और शराब के सेवन व बिक्री पर भी पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा।
इन नियमों का उद्देश्य हिमालय की संवेदनशील वादियों को प्रदूषण से बचाना और कचरे के प्रबंधन को दुरुस्त करना है।
रजिस्ट्रेशन और मेडिकल फिटनेस के नियम हुए सख्त
मणिमहेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य और पंजीकरण संबंधी नियमों को कड़ा कर दिया है। यात्रा पर जाने के इच्छुक हर श्रद्धालु के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा:
- मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र: सभी श्रद्धालुओं के लिए यात्रा पर निकलने से पहले एक अधिकृत या पंजीकृत चिकित्सक (डॉक्टर) से अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराना आवश्यक है। चिकित्सक द्वारा "फिट" घोषित किए जाने के बाद ही यात्रा की अनुमति मिलेगी। यात्रियों को अपने इस मेडिकल सर्टिफिकेट की मूल प्रति (ओरिजिनल) या डाउनलोड की गई कॉपी यात्रा के दौरान हमेशा अपने साथ रखनी होगी। इसका प्रारूप (फॉर्मेट) आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।
- पंजीकरण की तारीख और फीस: मणिमहेश यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 05 अगस्त को सुबह 10:00 बजे से हो जाएगी। शुरुआती चरण में 25, 26 और 27 अगस्त के लिए रजिस्ट्रेशन खुलेगा। इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क मात्र 50 रुपये तय किया गया है।
- प्रतिदिन यात्रियों की सीमा: सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए प्रशासन ने तय किया है कि हर दिन केवल 5,000 पंजीकृत श्रद्धालुओं को ही यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी। बिना वैध पंजीकरण के किसी भी यात्री को आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। श्रद्धालुओं को अपनी बुकिंग पर्ची का प्रिंट आउट साथ रखना अनिवार्य है।
कैसे पहुंचें मणिमहेश और क्या है इसका धार्मिक महत्व?
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हंडसर नामक स्थान से मणिमहेश की मुख्य यात्रा शुरू होती है। चंबा से हंडसर तक श्रद्धालु सरकारी बसों या निजी वाहनों के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके बाद हंडसर से पवित्र मणिमहेश झील तक पहुंचने के लिए लगभग 13 किलोमीटर की बेहद कठिन और खड़ी चढ़ाई पूरी करनी पड़ती है।
समुद्र तल से लगभग 13 हजार फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित पवित्र मणिमहेश झील को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। इसे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पांच प्रमुख कैलाशों में से एक माना जाता है। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने और इस पवित्र झील में डुबकी लगाने के लिए यहां पहुंचते हैं।
इस वर्ष मणिमहेश यात्रा का विधिवत आरंभ 25 अगस्त 2026 से होने जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस बार श्रद्धालुओं को पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित, सुगम और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। सभी तरह की आधिकारिक और नवीनतम सूचनाओं के लिए श्रद्धालु केवल सरकारी वेबसाइट पर ही भरोसा करें।
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