सावन के महीने में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद और भगवान शिव को भोग

सावन का पवित्र महीना छत्तीसगढ़ की समृद्ध खाद्य संस्कृति को उजागर करता है। इस लेख में जानिए कि कैसे आप देहरौली, अइरसा और दूध फरा जैसे पारंपरिक पकवान बनाकर महादेव को प्रसन्न कर सकते हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजो सकते हैं।

सावन और छत्तीसगढ़ की खाद्य परंपरा

सावन का महीना न केवल भगवान शिव की आराधना और भक्ति का समय है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक कला को घर-घर तक पहुंचाने का भी एक खास अवसर है। इस दौरान छत्तीसगढ़ी घरों में जो व्यंजन बनते हैं, वे केवल स्वाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आस्था, संस्कृति और परंपरा के प्रतीक माने जाते हैं। सावन के व्रत और पूजा-पाठ के दौरान कई श्रद्धालु इन विशेष पकवानों को भगवान शिव को भोग के रूप में अर्पित करते हैं और बाद में इसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं।

देहरौली रोटी का खास स्वाद

छत्तीसगढ़ की रसोई में देहरौली रोटी का स्थान बहुत ऊंचा है। सावन और अन्य प्रमुख त्योहारों पर इसे विशेष रूप से बनाया जाता है। इसे तैयार करने की विधि काफी अनूठी है। इसके लिए पुराने चावल की कनकी या दरदरे पिसे हुए चावल के आटे का उपयोग किया जाता है, जिसे खट्टे दही के साथ मिलाकर गूंथा जाता है। सबसे पहले इसकी मोटी रोटियां सेंकी जाती हैं, और उसके बाद उन्हें गुड़ की चाशनी में अच्छी तरह पकाया जाता है। इस प्रक्रिया से यह रोटी मीठी और अत्यंत स्वादिष्ट बन जाती है।

अइरसा और उसकी मिठास

अइरसा, जिसे कई जगहों पर अरसा भी कहा जाता है, छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाइयों में से एक है। चावल के आटे और शुद्ध गुड़ के मेल से बनने वाली यह मिठाई राज्य की हर खुशी और उत्सव का हिस्सा है। चाहे तीजा हो, गणेश चतुर्थी हो, दीपावली हो या सावन का पावन महीना, हर मौके पर अइरसा बड़े चाव से बनाए जाते हैं। इसके ऊपर सफेद तिल लगाने से न केवल इसकी सुंदरता बढ़ती है, बल्कि इसका स्वाद भी दोगुना हो जाता है।

बच्चों की पसंद: छत्तीसगढ़िया बिस्किट रोटी

आज के दौर में जब बाजार में जंक फूड की भरमार है, बिस्किट रोटी बच्चों के लिए एक बेहतरीन घरेलू विकल्प साबित होती है। यह घर पर तैयार किया जाने वाला एक पौष्टिक स्नैक है। इसे बनाने के लिए सूजी, गेहूं का आटा, मैदा, कसा हुआ नारियल, विभिन्न प्रकार के ड्राईफ्रूट्स, शक्कर और दूध का उपयोग किया जाता है। सामग्री को मिलाकर एक सख्त आटा गूंथा जाता है, फिर इसे बिस्किट के छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सुनहरा होने तक तला जाता है। यह बाजार के चिप्स या बिस्किट से कहीं अधिक स्वास्थ्यवर्धक है।

सोहारी: सावन का प्रमुख व्यंजन

सोहारी छत्तीसगढ़ की एक ऐसी पारंपरिक पूरी है जो गेहूं के आटे से तैयार की जाती है। यह पूरी की तरह फूली हुई और कुरकुरी होती है। सावन के महीने में किसी भी विशेष पूजा या भगवान शिव को भोग लगाने के लिए सोहारी का बहुत महत्व है। घर पर मेहमानों के आने पर भी इसे बड़े सम्मान के साथ परोसा जाता है। सोहारी का आनंद आप सब्जी, ताजी दही या फिर किसी मीठी डिश के साथ ले सकते हैं, जो खाने की मेज की शोभा बढ़ा देता है।

दूध फरा: पौष्टिकता और स्वाद का मेल

यदि आप सावन के दौरान कुछ हल्का, मीठा और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बनाना चाहते हैं, तो दूध फरा एक शानदार विकल्प है। यह पकवान मुख्य रूप से चावल के आटे से तैयार किए गए छोटे-छोटे फरों से बनता है। इन फरों को इलायची की सोंधी खुशबू वाले उबलते हुए दूध में धीरे-धीरे पकाया जाता है। दूध फरा न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि यह पोषण से भी भरपूर होता है। इसे प्रसाद के रूप में बनाना शुभ माना जाता है।

आस्था और संस्कृति का संगम

सावन के इन विशेष छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को घर पर बनाकर जब हम भगवान शंकर को भोग लगाते हैं, तो घर में सकारात्मकता और पवित्रता का संचार होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव सात्विक भाव से अर्पित किए गए प्रसाद से बहुत प्रसन्न होते हैं और पूरे परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

यदि आप भी इस सावन पारंपरिक स्वाद के जरिए अपनी संस्कृति को जीवंत रखना चाहते हैं, तो देहरौली रोटी, अइरसा, बिस्किट रोटी, सोहारी और दूध फरा जरूर बनाएं। ये व्यंजन न केवल आपके स्वाद का आनंद दोगुना करेंगे, बल्कि नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की अपनी समृद्ध और गौरवशाली खाद्य परंपरा से जोड़ने का एक माध्यम भी बनेंगे।

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