गाजा में इजरायली सैन्य अभियान पर बढ़ता वैश्विक दबाव
गाजा में चल रहे भीषण युद्ध के बीच इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकंजा कसता जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात समेत कुल 8 मुस्लिम देशों ने एक साझा बयान जारी करते हुए इजरायल द्वारा किए जा रहे सैन्य हमलों पर गहरा रोष व्यक्त किया है। इन देशों का स्पष्ट मानना है कि इजरायल की मौजूदा सैन्य गतिविधियां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित उस शांति योजना के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य इस लंबे समय से चले आ रहे गाजा संघर्ष का स्थायी समाधान निकालना है। यह संयुक्त बयान संयुक्त अरब अमीरात, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों द्वारा सामूहिक रूप से जारी किया गया है।
शांति योजना को कमजोर करने का आरोप
इन 8 देशों ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि इजरायल का अनवरत सैन्य अभियान उन अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कोशिशों को विफल करने का काम कर रहा है, जो गाजा शांति योजना के आगामी चरणों को लागू करने के लिए की जा रही हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि फिलिस्तीनी गुटों द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के रोडमैप को स्वीकार कर लेने के बावजूद इजरायल की आक्रामक नीतियां इसे पटरी से उतार रही हैं। बयानों के अनुसार, इजरायल की यह कार्रवाई न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि इससे महीनों की मेहनत से तैयार की गई कूटनीतिक रूपरेखा भी नष्ट हो सकती है। इसके अलावा, सैन्य अभियान के जारी रहने से क्षेत्र में हिंसा का एक नया और खतरनाक दौर शुरू होने की आशंका बनी हुई है, जो पहले से ही मानवीय त्रासदी झेल रहे गाजा के हालातों को और अधिक भयावह बना देगा।
नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर संकट
आठों देशों ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया है कि गाजा में इजरायली सेना द्वारा अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। विशेष रूप से महिलाओं और मासूम बच्चों की बढ़ती मौतों पर उन्होंने अपनी गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त की है। इन देशों ने कड़े शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत मेडिकल स्टाफ, स्वास्थ्य केंद्रों और राहत कार्यों में जुटे कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। बयान में मांग की गई है कि गाजा के प्रत्येक क्षेत्र में बिना किसी रोक-टोक के जीवन रक्षक दवाएं, चिकित्सीय सहायता और राहत सामग्री का पहुंचना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम में उन्होंने केवल गाजा ही नहीं, बल्कि वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम में उत्पन्न अस्थिरता का भी विशेष उल्लेख किया है।
दो-राष्ट्र समाधान और डोनाल्ड ट्रंप की योजना पर अनिश्चितता
संयुक्त बयान में इन विदेश मंत्रियों ने 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' यानी दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपना दृढ़ समर्थन दोहराया। उन्होंने स्पष्ट रूप से फिलिस्तीनी क्षेत्रों के विलय और स्थानीय निवासियों के जबरन विस्थापन की कड़ी निंदा की। वर्तमान में डोनाल्ड ट्रंप की युद्धविराम योजना को लेकर गहरा संशय बना हुआ है। इस योजना की मूल शर्तों में हमास द्वारा हथियार डालना और इसके बदले में इजरायल द्वारा गाजा से सेना को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाना शामिल था, लेकिन अब इस पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।
इजरायल का रुख और बेंजामिन नेतन्याहू का बयान
इस पूरे मामले पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने कड़े तेवर बरकरार रखे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक हमास पूरी तरह निशस्त्र नहीं हो जाता, इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भेजे गए शांति मसौदे को लेकर नेतन्याहू ने कहा,
ट्रंप प्रशासन ने हमें एक ड्राफ्ट भेजा था। हमने उससे सहमति नहीं जताई क्योंकि वह हमारा मसौदा नहीं था। हमने अपनी टिप्पणियां भेज दी हैं। हम अपने हितों पर मजबूती और समझदारी से कायम हैं।
उन्होंने अंत में यह स्पष्ट किया कि इजरायली रक्षा बल अपने देश और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने और हर जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
https://www.indiatv.in/world/asia/8-muslim-nations-including-pakistan-and-uae-warn-israel-gaza-offensive-could-derail-trump-peace-plan-2026-08-06-1235787