विदेशी अंशदान कानून में बदलाव की तैयारी
केंद्र सरकार आगामी सप्ताह में लोकसभा के भीतर विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 यानी FCRA Amendment Bill 2026 को लाने की तैयारी में है। जैसे ही इस प्रस्तावित कानून की चर्चा तेज हुई है, देश के विभिन्न चर्च और ईसाई संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। इन संगठनों का दावा है कि यह नया कानून सीधे तौर पर उनके संस्थानों को निशाना बनाता है और उनके संवैधानिक अधिकारों पर कुठाराघात कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, सरकार का पक्ष बिल्कुल साफ है। सरकार का तर्क है कि इस बिल का मुख्य ध्येय राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है और विदेशी फंडिंग के मामलों में पूरी पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
ईसाई संगठनों की प्रमुख चिंताएं क्या हैं
ईसाई संगठनों के भीतर सबसे बड़ा डर इस बिल में शामिल उस नए प्रावधान को लेकर है, जिसके तहत सरकार को एक 'डिज़िग्नेटेड अथॉरिटी' यानी नामित प्राधिकरण नियुक्त करने का पूरा अधिकार दिया गया है। अगर किसी एनजीओ या संस्थान का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है, या संस्थान खुद लाइसेंस सरेंडर कर देता है, अथवा समय पर नवीनीकरण नहीं करा पाता है, तो यह नामित प्राधिकरण उस संस्थान के पूरे प्रबंधन और विदेशी धन से निर्मित संपत्तियों का नियंत्रण अपने अधिकार में ले लेगा। भारत में बड़ी संख्या में ईसाई संस्थाएं स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक केंद्र और अनाथालय चला रही हैं। इन संगठनों का कहना है कि उनकी तमाम जन-कल्याणकारी सेवाएं विदेशी सहायता पर टिकी हैं। उनका मानना है कि यदि यह बिल लागू हुआ तो जमीनी स्तर पर चल रहे इन सामाजिक कार्यों पर गहरा असर पड़ेगा और लोगों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं बाधित हो सकती हैं।
संपत्ति के स्वामित्व को लेकर बढ़ा तनाव
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने भी इस मसले पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन ने चिंता जताई है कि प्रस्तावित कानून के दायरे में वे संपत्तियां भी आ सकती हैं, जिन्हें दशकों से विदेशी और घरेलू फंड के मिश्रण से तैयार किया गया है। कानून इन संपत्तियों को सरकार द्वारा अधिग्रहित करने, उनका स्थान बदलने या उन्हें बेचने का अधिकार दे सकता है। केरल लैटिन कैथोलिक एसोसिएशन (KLCA) ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण बिल को लाने से पहले संबंधित हितधारकों के साथ कोई पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उनका कहना है कि इससे देश भर में वर्षों से शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से काम कर रही संस्थाओं के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है।
गृह मंत्रालय के साथ हुई चर्चा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मांग की कि इस बिल को या तो पूरी तरह वापस लिया जाए या फिर इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास समीक्षा के लिए भेजा जाए। गृह मंत्री ने प्रतिनिधियों की बातों को सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और सरकार के अन्य वरिष्ठ सहयोगियों से भी इस पर मंथन किया जाएगा। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है। सरकार के अनुसार, यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक कानून है ताकि विदेशी फंड के दुरुपयोग को रोका जा सके। सरकार का यह भी कहना है कि जो धार्मिक या सामाजिक संस्थाएं पूरी ईमानदारी से नियमों का पालन करती हैं, उन्हें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंज
इस बिल को लेकर अमेरिका के कुछ सांसदों ने भी अपनी नाराजगी जताई है। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने इस प्रस्तावित कानून पर चिंता जाहिर की है और दावा किया है कि इससे भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। उनका यह भी आरोप है कि यह बिल सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं पर नियंत्रण का असीमित अधिकार देता है, जिसे उन्होंने ईसाई समुदाय के खिलाफ एक कदम बताया है।
बिल की बारीकियाँ और सरकारी आंकड़े
प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल 2026 में प्रावधान है कि अगर पंजीकरण खत्म हो जाए, रद्द कर दिया जाए या नवीनीकरण न हो, तो नामित प्राधिकरण उन संपत्तियों का प्रबंधन करेगा। बिल में यह राहत भी दी गई है कि यदि कोई संपत्ति पूजा स्थल के रूप में उपयोग में है, तो उसका धार्मिक स्वरूप अक्षुण्ण रखना उस नामित प्राधिकरण की कानूनी जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही, कानून के उल्लंघन पर सजा के प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है, जहां अधिकतम जेल की सजा को 5 साल से घटाकर 1 साल करने का प्रस्ताव रखा गया है। FCRA पोर्टल के नवीनतम आंकड़ों पर गौर करें तो 15 जुलाई 2026 तक देश में 14,449 सक्रिय FCRA प्रमाणपत्र मौजूद हैं, जबकि 22,498 प्रमाणपत्र रद्द किए जा चुके हैं और 15,212 प्रमाणपत्र नवीनीकरण के अभाव में समाप्त हो चुके हैं।
https://www.indiatv.in/india/national/fcra-amendment-bill-2026-sparks-controversy-as-christian-groups-oppose-proposed-foreign-funding-rules-2026-08-06-1235769