शिक्षकों के लिए स्थानांतरण पोर्टल फिर से खुलेगा
बिहार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि शिक्षकों के लिए शुरू की गई ऐच्छिक स्थानांतरण की प्रक्रिया के तहत पोर्टल को आगामी 17 सितंबर को फिर से खोला जाएगा। इससे उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी जो पिछली बार आवेदन करने से किसी कारणवश चूक गए थे। स्थानांतरण के लिए पहले चरण में जो पोर्टल 29 जुलाई को खोला गया था, वह 5 अगस्त की रात 12 बजे तक प्रभावी था और अब आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया है। विभाग अब प्राप्त आवेदनों के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।
कुल 73,151 शिक्षकों ने किया आवेदन
शिक्षा मंत्री ने स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि विभाग को इस बार कुल 1,06,687 आवेदनों के प्राप्त होने की उम्मीद थी। हालांकि, निर्धारित समय सीमा तक कुल 73,151 शिक्षकों ने अपना स्थानांतरण आवेदन जमा किया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से ऐच्छिक स्थानांतरण की नीति है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अब इस प्रक्रिया को हर पांच साल के अंतराल पर नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। यह निर्णय राज्य में लंबे समय से विभिन्न शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग रही थी, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ने भी पहले सकारात्मक संकेत दिए थे।
31 अक्टूबर तक समस्याओं का समाधान
शिक्षा विभाग की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य 31 अक्टूबर तक शिक्षकों से संबंधित सभी प्रमुख समस्याओं को पूरी तरह से हल करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब शिक्षकों की समस्याएं दूर हो जाएंगी, तो विभाग भी उनसे पूरी निष्ठा और सहयोग की अपेक्षा करेगा ताकि राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्रों को बेहतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
शिक्षा अधिकारियों का चिंतन शिविर
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि 9 और 10 अगस्त को पूरे राज्य के शिक्षा अधिकारियों के लिए एक विशेष चिंतन शिविर आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करना, विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाना तथा सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई के स्तर को सुधारने हेतु ठोस कदम उठाना है।
स्कूलों में नो बैग डे और हाफ डे
बिहार सरकार ने शैक्षणिक माहौल में सुधार लाने के लिए स्कूलों में बदलाव किए हैं। मंत्री ने बताया कि अब शनिवार के दिन विद्यालयों में 'हाफ डे' रहेगा। इसके साथ ही शनिवार को 'नो बैग डे' के रूप में मनाया जाएगा। इस पहल के पीछे का मुख्य उद्देश्य यह है कि स्कूलों में केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर रचनात्मक और उत्सव जैसा माहौल तैयार किया जा सके, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके।
TRE-4 भर्ती और सरकारी स्कूलों का कायाकल्प
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया TRE-4 के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मिथिलेश तिवारी ने कहा कि आवश्यक अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC को भेजी जा चुकी है। अब भर्ती की अधिसूचना जारी करना और प्रक्रिया को आगे बढ़ाना पूरी तरह से BPSC के अधिकार क्षेत्र में है। उन्होंने दोहराया कि सरकार का संकल्प सरकारी विद्यालयों को निजी स्कूलों जैसी सुविधाओं और व्यवस्थाओं से लैस करना है। इसके लिए फाइन आर्ट, संगीत और अन्य महत्वपूर्ण विषयों में भी नए शिक्षकों की बहाली की जाएगी।
शिक्षक संगठनों से बातचीत की अपील
शिक्षा मंत्री ने शिक्षक संगठनों के साथ संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई शिक्षक संगठन अभी तक उनसे चर्चा के लिए नहीं आए हैं। उन्होंने विरोध का रास्ता छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि सरकार सभी पक्षों के साथ बातचीत करने के लिए तत्पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग किसी भी संगठन द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा और संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करेगा।
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