दिल्ली की नौकरी छोड़ गांव में शुरू किया पशुपालन, 40 जानवरों के साथ सुनील कुमार की बदल गई किस्मत

बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले सुनील कुमार ने दिल्ली की सीमित वेतन वाली नौकरी को अलविदा कहकर अपने गांव में पशुपालन का व्यवसाय शुरू किया है। आज वे 40 गाय और भैंसों के साथ सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं।

दिल्ली की चकाचौंध से गांव की ओर

बिहार के सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड में स्थित परछइयां गांव के निवासी सुनील कुमार आज उन लोगों के लिए एक मिसाल बन गए हैं जो शहर की भीड़भाड़ में अपनी पहचान खो रहे हैं। सुनील ने कभी दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम किया था, लेकिन वहां का अनुभव उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा।

क्यों छोड़ा दिल्ली का काम

दिल्ली जैसे महानगर में दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद भी सुनील को महीने में केवल 12 से 13 हजार रुपये ही मिलते थे। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी और महंगी जीवनशैली के बीच इतनी कम आमदनी में गुजारा करना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसी घुटन और कम कमाई से परेशान होकर उन्होंने अंततः नौकरी को अलविदा कहने और अपने गांव वापस लौटने का साहसिक निर्णय लिया।

गांव में मिला सफलता का मंत्र

गांव आने के बाद सुनील ने हार नहीं मानी और खुद का काम करने का संकल्प लिया। उन्होंने पशुपालन को अपना जरिया बनाया। आज उनके पास कुल 40 गाय और भैंसें हैं, जिनकी वे पूरी मेहनत से देखभाल करते हैं। डेयरी के काम ने न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि आज वे गांव में सम्मान के साथ एक बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। उनका यह सफर साबित करता है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो सफलता के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करना जरूरी नहीं है।

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