कचरे से कंचन: पूर्वी चंपारण के पवन श्रीवास्तव ने केले के बेकार तने से बनाया धागा, अब कपड़ा उद्योग में मचाएंगे धूम

बिहार के पूर्वी चंपारण में एक किसान ने अनोखी पहल की है। बेकार फेंक दिए जाने वाले केले के तने से धागा तैयार कर वे टोपी, बैग और मैट के बाद अब वस्त्र निर्माण क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं।

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से आत्मनिर्भरता और नवाचार की एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहाँ के एक प्रगतिशील किसान ने खेती के उस हिस्से को आर्थिक समृद्धि का जरिया बना दिया है, जिसे आमतौर पर बेकार समझकर खेतों में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता था। पूर्वी चंपारण के अंबिका नगर में रहने वाले पवन श्रीवास्तव बीते कई सालों से केले के बेकार पड़े तनों (थम) से बेहतरीन धागा तैयार कर रहे हैं। इस धागे का उपयोग करके वे न केवल विभिन्न प्रकार की आकर्षक वस्तुएं बना रहे हैं, बल्कि अब उनकी योजना कपड़ा उद्योग में एक बड़ा बदलाव लाने की है।

खेती के कचरे को बनाया कमाई का जरिया

पवन श्रीवास्तव मूल रूप से एक किसान हैं और उनका पैतृक गाँव हरसिद्धि प्रखंड के अंतर्गत घोगराहा बैरिया में स्थित है। गाँव में खेती के दौरान उन्होंने एक बड़ी समस्या को अवसर में बदलते देखा। उन्होंने गौर किया कि केले की बागवानी करने वाले किसान केले की फसल काटने के बाद उसके तने (थम) को पूरी तरह अनुपयोगी मानकर फेंक देते हैं। इस वजह से खेतों के आसपास कचरा जमा हो जाता था। पवन के मन में विचार आया कि क्यों न इस बेकार समझी जाने वाली वस्तु को उपयोगी बनाया जाए। इससे न केवल पर्यावरण साफ रहेगा, बल्कि केले की खेती करने वाले किसानों की भी अतिरिक्त आमदनी होगी। इसी सकारात्मक सोच के साथ उन्होंने केले के तने से धागा बनाने की शुरुआत की।

टोपी और बैग के बाद अब कपड़ों की बारी

पवन श्रीवास्तव की कड़ी मेहनत और नवीन सोच के बेहतरीन नतीजे सामने आए हैं। उन्होंने केले के धागे का उपयोग करके कई तरह के उत्पाद तैयार किए हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। उनके द्वारा बनाए जाने वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:

  • आकर्षक टोपी
  • मजबूत और सुंदर बैग
  • टिकाऊ मैट (चटाई)

इन उत्पादों को बेचकर उन्होंने अच्छा मुनाफा कमाया है। इस सफलता से उत्साहित होकर, अब वे केले के धागे पर आधारित एक बड़ा कपड़ा उद्योग विकसित करने की तैयारी में जुट गए हैं। हाल ही में उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए केले के धागे और सिल्क के धागे के मिश्रण से एक बेहद मजबूत और सुंदर रूमाल का सफल परीक्षण भी किया है।

धुलाई के बाद और बढ़ती है इस धागे की चमक

केले के धागे की खूबियों के बारे में बात करते हुए पवन श्रीवास्तव बताते हैं कि इससे बने कपड़े असाधारण रूप से मजबूत होते हैं। इस धागे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर धुलाई के बाद कमजोर होने के बजाय और भी अधिक साफ और चमकदार होता जाता है। इसका मुख्य कारण केले के धागे का प्राकृतिक स्वभाव है, जो नमी के संपर्क में आने पर और बेहतर होता जाता है। हालांकि, वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि धागा बनाने की यह प्रक्रिया केवल केले के हरे तने (थम) से ही संभव है। तने के सूख जाने के बाद उससे रेशा नहीं निकाला जा सकता, इसलिए सूखे तनों का इस काम में कोई उपयोग नहीं होता है।

किसानों की आय बढ़ाने और नए उद्योग की उम्मीद

पवन श्रीवास्तव का लक्ष्य केवल खुद के व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाना चाहते हैं। पूर्वी चंपारण के कई इलाकों में किसान बड़े पैमाने पर केले की खेती करते हैं और फसल के बाद तनों को फेंक देते हैं। पवन का मानना है कि यदि उनका कपड़ा उद्योग पूरी तरह से स्थापित हो जाता है, तो इससे स्थानीय किसानों की आय में भारी वृद्धि होगी। किसान अपने बेकार तने बेचकर अच्छी कमाई कर सकेंगे। इससे चंपारण में एक बिल्कुल नए और पर्यावरण के अनुकूल उद्योग की शुरुआत होगी, जिससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।

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