राजस्थान सरकार और करणी सेना के बीच अहम समझौता
राजस्थान की राजधानी जयपुर में चल रहे प्रदर्शनों और सियासी सरगर्मी के बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है। यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर हो रहे आंदोलन के दौरान करणी सेना और राज्य सरकार के बीच जारी गतिरोध के मामले में अब कुछ नरमी देखी जा रही है। राजपूत करणी सेना ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर सरकार को कड़ा अल्टीमेटम दिया था, जिसमें से अब दो मांगों पर सरकार ने सहमति दे दी है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद फिलहाल कुछ हद तक तनाव कम होता दिखाई दे रहा है, हालांकि पूरी तरह से समाधान अभी नहीं निकला है।
वार्ता के बाद बनी सहमति
इस पूरे मामले में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस चर्चा के दौरान करणी सेना ने अपनी प्रमुख मांगों को सरकार के सामने रखा। बैठक के बाद मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार ने मृतक देवराज सिंह के परिजनों को 21 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने परिवार के एक सदस्य को संविदा के आधार पर नौकरी देने का भी पक्का भरोसा दिया है। इन दो बिंदुओं पर बनी सहमति को लेकर करणी सेना की ओर से सकारात्मक रुख देखने को मिला है, जिससे आंदोलन का एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा फिलहाल शांत हो गया है।
क्या था देवराज की मौत का पूरा मामला
राजपूत करणी सेना द्वारा जयपुर में किए जा रहे यूजीसी रोलबैक आंदोलन में देवराज सिंह एक सक्रिय भागीदार थे। प्रदर्शन के दौरान अचानक उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद पूरे मामले ने एक उग्र रूप धारण कर लिया। करणी सेना ने सीधा आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा इस्तेमाल की गई वाटर कैनन की बौछार ही देवराज की मृत्यु का मुख्य कारण बनी। संगठन का दावा है कि पुलिस की इसी दमनात्मक कार्रवाई के चलते एक युवा ने अपनी जान गंवा दी। दूसरी तरफ, पुलिस और प्रशासन इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि देवराज की मौत के पीछे कोई अन्य कारण हो सकता है और इसे सीधे पुलिस की कार्रवाई से जोड़ना उचित नहीं है।
तीसरी मांग पर अभी भी है संशय
हालांकि आर्थिक सहायता और रोजगार की दो मांगें मान ली गई हैं, लेकिन करणी सेना की तीसरी सबसे महत्वपूर्ण मांग पर अभी भी कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला है। करणी सेना का साफ कहना है कि आंदोलन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज में शामिल और उसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मांग को लेकर सरकार का पक्ष फिलहाल थोड़ा अलग है। सरकार का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कराई जाएगी। यदि जांच के दौरान यह पाया गया कि किसी भी अधिकारी की ओर से लापरवाही या अनावश्यक बल का प्रयोग किया गया था और उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्पष्ट है कि इस मांग पर कोई तत्काल वादा नहीं किया गया है, जिसके चलते अभी भी पेंच फंसा हुआ है।
घेराव का दिया था अल्टीमेटम
इस समझौते से पहले स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई थी। करणी सेना ने सरकार को खुली चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं, तो वे मुख्यमंत्री कार्यालय यानी सीएमओ का घेराव करेंगे। संगठन ने अपनी रणनीति को लेकर कड़े तेवर दिखाए थे और लगातार आंदोलन की तैयारी की जा रही थी। हालांकि वार्ता के बाद दो मांगों पर बनी सहमति ने टकराव की स्थिति को फिलहाल तो टाल दिया है, लेकिन सभी विवादित मुद्दों का समाधान न होने के कारण स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है।
यूजीसी रोलबैक आंदोलन जारी रहेगा
बैठक के बाद करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने मीडिया से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यद्यपि देवराज के परिवार की मांगों को लेकर सरकार ने सकारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन यूजीसी रोलबैक की मूल मांग को लेकर हमारा आंदोलन पूरी तरह से जारी रहेगा। उन्होंने साफ किया कि यह मुद्दा अलग है और इसे किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाएगा। संगठन इस मांग के लिए अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा। इस घोषणा से यह स्पष्ट है कि सरकार के साथ हुई बातचीत केवल मृतक के परिवार के मुआवजे और नौकरी तक ही सीमित थी। सरकार के साथ सहमति बनने के बावजूद करणी सेना ने अपने मूल उद्देश्य को लेकर पीछे हटने से इनकार कर दिया है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें
अब भविष्य की कार्रवाई पूरी तरह से सरकार द्वारा कराई जाने वाली जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है। करणी सेना और आम जनता की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है या नहीं। यदि जांच रिपोर्ट में पुलिस के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तो सरकार पर कार्रवाई का दबाव और अधिक बढ़ जाएगा। इसके अलावा, मृतक देवराज सिंह के परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता और संविदा आधारित नियुक्ति की प्रशासनिक प्रक्रिया भी अब आगे बढ़ाई जाएगी।
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