इतिहास के पन्नों में दबी विरासत
बिहार का भागलपुर शहर अपने लंबे और गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। शहर की गलियों और इलाकों में ऐसी कई ऐतिहासिक धरोहरें छिपी हुई हैं, जिनसे आज की पीढ़ी अनजान है। इन्हीं में से एक ऐसी विरासत है जो सरकारी उपेक्षा और प्रशासन की अनदेखी के कारण धीरे-धीरे खंडहर होती जा रही है।
खंडहर में तब्दील हो रही 20 बीघे की संपत्ति
यह ऐतिहासिक धरोहर शहर के पॉलिटेक्निक कॉलेज के ठीक बगल में स्थित है। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान बनी यह इमारत किसी समय अपनी भव्यता के लिए जानी जाती थी, लेकिन आज यह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। जानकारी के अनुसार, यह विशाल परिसर लगभग 20 बीघे की जमीन पर फैला हुआ है। इस महलनुमा इमारत में कुल 30 कमरे बने हुए हैं, जो उस दौर की स्थापत्य कला और समृद्धि की कहानी बयां करते हैं।
प्रशासन की चुप्पी और बदहाल स्थिति
स्थानीय स्तर पर इस धरोहर की उपेक्षा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका रखरखाव करने वाला कोई नहीं है। शासन और प्रशासन ने इस ओर से अपनी नजरें पूरी तरह फेर ली हैं, जिसके चलते यह इमारत आज ढहने की कगार पर है। एक समय की शान रही यह जगह अब केवल मलबे का ढेर बनकर रह गई है। अगर समय रहते इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में भागलपुर के इतिहास का यह महत्वपूर्ण हिस्सा हमेशा के लिए मिट जाएगा।
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