रायगड़ा जिले में रैगिंग का खौफनाक मामला
ओडिशा के रायगड़ा जिले से हॉस्टल में रैगिंग की एक अत्यंत गंभीर और परेशान करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ स्थित एसएसडी हाई स्कूल के आवासीय परिसर में कक्षा 9 के करीब 20 से ज्यादा छात्र अपने सीनियर साथियों की क्रूरता का शिकार हुए हैं। आरोप है कि जब इन जूनियर छात्रों ने हॉस्टल में हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई और स्कूल प्रबंधन से शिकायत की, तो सीनियर छात्रों ने प्रतिशोध की भावना से उन पर हमला कर दिया।
बैट और डंडों से किया हमला
यह घटना बीते रविवार की रात को घटित हुई। जानकारी के अनुसार, कक्षा 10 के कुछ छात्र और उनके साथियों ने एक सोची समझी साजिश के तहत कक्षा 9 के करीब 20 छात्रों को एक बंद कमरे के अंदर बुलाया। वहां पहुँचते ही सीनियर छात्रों ने अपना आपा खो दिया और क्रिकेट के बैट तथा डंडों से जूनियर छात्रों की पिटाई शुरू कर दी। इस बेरहम पिटाई का एक वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सीनियर छात्रों का हिंसक चेहरा साफ देखा जा सकता है। मारपीट में कई जूनियर छात्र बुरी तरह घायल हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।
प्रशासन की कार्रवाई और हेडमास्टर पर सवाल
इस पूरी घटना ने स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से जांच शुरू कर दी है। स्कूल के हेडमास्टर को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि हेडमास्टर ने रैगिंग जैसी गंभीर शिकायतों को शुरुआत में ही गंभीरता से नहीं लिया, जो कि उनकी घोर लापरवाही को दर्शाता है। स्कूल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को न होने दिया जाए और सूचना मिलते ही तुरंत उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाए।
प्रबंधन का पक्ष और छात्रों का दर्द
स्कूल के इंचार्ज हेडमास्टर प्रताप चंद्र सौंता ने अपनी सफाई में कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मंगलवार की सुबह प्राप्त हुई। उन्होंने दावा किया कि घटना देर रात हुई थी, जिस कारण स्कूल प्रशासन को इसकी भनक नहीं लग सकी। हालांकि, पीड़ित छात्रों में शामिल शुभम नायक ने एक बेहद डरावनी सच्चाई बयां की है। शुभम का आरोप है कि हॉस्टल में लंबे समय से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि सीनियर छात्र अक्सर डंडों का उपयोग करके उनके साथ मारपीट करते थे। शुभम के अनुसार, इस बारे में उन्होंने शिक्षकों से पहले भी कई बार शिकायत की थी, लेकिन तब उनकी किसी ने नहीं सुनी और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि आज मामला इतना बिगड़ गया है कि छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अब जिला प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर इन परिस्थितियों के पीछे कौन जिम्मेदार है और शिकायत मिलने के बावजूद समय रहते सुरक्षा के कड़े कदम क्यों नहीं उठाए गए।
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